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निवेश की एकल खिड़की में कानून का झोंका
बीएस संवाददाता / जयपुर December 16, 2010

राजस्थान सरकार ने निवेश प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए एकल खिड़की(सिंगल विंडो) नीति पर अध्यादेश लाने का फैसला किया है। मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। राज्य में एकल खिड़की को कानूनी आधार प्रदान करने एवं संबंधित विभागों, प्राधिकरणों द्वारा निर्धारित समयावधि में अनुमतियां और स्वीकृतियां प्रदान न करने पर त्वरित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के मकसद से यह कदम उठाने का फैसला किया गया।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज यहां संवाददाताओं को बताया कि राजस्थान एंटरप्राइजेज सिंगल विंडो एनेबलिंग ऐंड क्लीयरेंस ऑर्डिनेंस, 2010 को राज्य में 1 जनवरी, 2011 से पहले जारी किया जाएगा। राज्य सरकार ने यह पाया कि पहले से राज्य में लागू एकल खिड़की निस्तारण प्रणाली का विधिक आधार न होने के कारण समयबद्ध रूप से निवेश प्रस्तावों पर अनुमतियां और स्वीकृतियां जारी नहीं हो पा रही थी। इस प्रणाली में निवेशक को अंतत: अनुमतियों और स्वीकृतियों के लिए अपने आवेदन तथा शुल्क को विभिन्न विभागों में जमा करने के लिए संपर्क करने में समय और श्रम व्यर्थ करना पड़ता था। इस अध्यादेश के प्रभावी होने से अब राज्य में दस करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्तावों में अनुमतियों और स्वीकृतियों पर निर्णय लेने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सर्वाधिकार प्राप्त समिति सक्षम होगी एवं इस समिति के लिए ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन नोडल एजेंसी का कार्य करेगी।

निवेशक को अब अपनी इकाई को स्थापित करने के लिए आवश्यक अनुमतियों व स्वीकृतियों और सुविधाओं के लिए एक ही स्थान अर्थात नामित नोडल एजेंसी को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने का विकल्प दिया गया है। यह इलेक्ट्रॉनिक प्रार्थना पत्र निवेशक किसी भी स्थान से सीधे ही नोडल एजेंसी को भेज सकता है तथा इसी तरह की विभिन्न अनुमतियों व स्वीकृतियों के लिए शुल्क भी नोडल एजेंसी को जमा करा सकता है। नोडल एजेंसी द्वारा प्रार्थना पत्र संबंधित विभागों और एजेंसियों को भेजे जाएंगे। संबंधित विभागों और एजेंसियों को निर्धारित समय में निर्णय लेना होगा और निर्णय की सूचना निवेशक को तथा नोडल एजेंसी को संबंधित विभागों एवं एजेंसियों द्वारा दी जाएगी। विभागों द्वारा नोडल एजेंसी से अग्रेषित प्रार्थना पत्रों पर अतिरिक्तसूचना एक बार मे ही नोडल एजेंसी के माध्यम से निवेशक से प्राप्त करने का प्रावधान है।

यदि निर्धारित समयावधि में विभागों व एजेंसियों द्वारा प्रार्थनापत्र का निस्तारण नहीं होता है तो स्वत: ही अध्यादेश के द्वारा गठित राज्य स्तरीय सर्वाधिकार प्राप्त समिति एवं जिला स्तरीय सर्वाधिकार समिति इन प्रार्थनापत्रों पर वांछित अनुमतियां जारी कर सकती हैं। इनकी कानूनी स्थिति विभागों द्वारा जारी किए जाने वाली स्वीकृतियों और अनुमोदनों के समकक्ष और बाध्यकारी होंगी। ऐसे मामलों में जहां संबंधित विभागों और एजेंसियों द्वारा निर्धारित समयावधि में निस्तारण नहीं करने से सर्वाधिकार प्राप्त समितियों को निर्णय लेना पड़ता है, ऐसे प्रकरणों में उत्तरदायी सक्षम अधिकारी के विरुद्ध सर्वाधिकार प्राप्त समिति द्वारा यथोचित कार्रवाई आरंभ किए जाने का प्रावधान है। विभागों व एजेंसियों तथा जिला स्तरीय सर्वाधिकार प्राप्त समितियों के निर्णय के विरुद्ध निवेशक राज्य स्तरीय सर्वाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष एवं राज्य स्तरीय समिति के निर्णय के विरुद्ध सरकार के समक्ष निर्णय के 30 दिनों के अंदर अपील दायर कर सकता है।

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