बिजनेस स्टैंडर्ड - मोबाइल के जरिए मौद्रिक लेन देन से बड़े बदलाव की उम्मीद
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मोबाइल के जरिए मौद्रिक लेन देन से बड़े बदलाव की उम्मीद
मोबाइल के जरिए मौद्रिक लेन-देन अब दूर की कौड़ी नहीं है। बहुत जल्द यह मुख्यधारा में स्थान बना लेगा।
प्रबीर रॉय /  October 03, 2010

इस समय दुनियाभर में 4.5-5.5 करोड़ लोग लेनदेन के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं और अनुमान है कि अगले पांच वर्षों के दौरान यह आंकड़ा एक अरब से ऊपर निकल जाएगा। राशि के आधार पर भी अगले तीन वर्षों में यह 379 अरब डॉलर के ऊपर चला जाएगा। अगर इसमें घरेलू और अंतरराष्टï्रीय धन प्रेषण को जोड़ दिया जाए तो यह राशि 10 खरब डॉलर तक हो सकती है।
मोबाइल नेटवर्क संचालकों को ऐसे लेनदेन पर सेवाशुल्क के रूप में इससे सालाना 5 अरब डॉलर का सीधा राजस्व प्राप्त होगा। इसके अलावा उन्हें प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) तथा अन्य अप्रत्यक्ष राजस्वों से 3 अरब रुपये की अतिरिक्त आय भी होगी।
जहां तक भारत की बात है, यहां भी इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। (अ) देश की 60 फीसदी आबादी के पास मोबाइल फोन हैं और इनकी पहुंच देश के तमाम इलाकों में है। (ब) अगले कुछ वर्षो में देश में एक अरब से ज्यादा मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले लोग होंगे। यह संख्या दूरदर्शन, केबल और सैटेलाइट के दर्शकों, इंटरनेट, प्रिंट और रेडियो से जुड़े तमाम लोगों की संख्या से कहीं ज्यादा होगी। यह मोबाइल फोन आम आदमी के लिए बहुउपयोगी भूमिका निभाएगा। इसकी मदद से वह दैनिक संचार, सूचना तक पहुंच, नेटवर्किंग, मनोरंजन तथा वित्तीय सेवाओं से जुड़ी अपनी जरूरतें पूरी कर पाएगा।
हाल ही में किए गए एक आर्थिक अध्ययन के मुताबिक भारत जैसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश में पारंपरिक  खुदरा चैनलों पर निर्भरता, गणक व्यवस्था, शाखा और इंटरनेट तथा टेलीफोन आधारित चैनल आदि सारी व्यवस्थाएं सीधे मोबाइल से जुड़ जाएंगी।
मोबाइल फोन की मदद से वित्तीय सेवा प्रदान करना इंटरनेट के मुकाबले 10 गुना और बैंक जाकर कार्रवाई करने के मुकाबले 100 गुना तक किफायती पड़ सकता है। वर्ष 2008 की दूसरी छमाही में मोबाइल बैंकिंग के संदर्भ में भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देश सामने आने के बाद से 40 से अधिक बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए किसी न किसी तरह की मोबाइल आधारित वित्तीय सेवा शुरू कर दी है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि मोबाइल मनी को मौद्रिक लेनदेन का मुख्य तरीका बनाने में कौन से कारक मददगार साबित होंगे। पहली बात, दूरसंचार कंपनियों की कम कीमत वाले मोबाइल फोन उपलब्ध कराने, 3जी सेवा शुरू करने और डाटा प्लान को और प्रतिस्पर्धी बनाने की क्षमता। ऐसा होने पर यह आम आदमी के इस्तेमाल के लिए सहज होगा। वे बिना भारी भरकम बिल से डरे मोबाइल पर आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगे।
दूसरे, बैंक और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने वालों को फोन को इस तरह से सुविधाजनक बनाना होगा कि उपभोक्ता कम से कम कुंजियों का इस्तेमाल करके संबंधित लेनदेन को अंजाम दे सके। नई चीजों को अपनाने के प्रति जो हमारा एक मानसिक अवरोध होता है उसके लिए ग्राहकों को किसी न किसी तरह का प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराना होगा। इन सेवाओं के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना होगा।
हालांकि ऐसा करके भी बैंकिंग सुविधाओं से वंचित देश के 60 फीसदी लोगों को जोडऩे के समूचे प्रयास नहीं किये जा सकते। एक बैंक खाता ऐसा होना चाहिए जो ग्राहक की नजर में उसे आर्थिक लाभ पहुंचाने वाला हो। उसे खाताधारक की तमाम जरूरतें पूरा करने वाला होना चाहिए। बैंक खाता न केवल ब्याज देने वाला हो बल्कि उसे विभिन्न वित्तीय सेवाएं जैसे कि धन पे्रषित करने, ओवरड्राफ्ट, छोटे ऋण, पेंशन, बीमा, म्युचुअल फंड आदि भी प्रदान करता हो।
दुर्भाग्यवश, आम आदमी के वित्तीय समावेशन को बैंकों से जोड़कर देखना उनके लिए हमेशा से नुकसानदेह रहा है। आज स्थिति बदल गई है तमाम कामगारों के पास बैंक खाते हों अथवा नहीं लेकिन उनके पास मोबाइल फोन का कनेक्शन अवश्य है। अगर हम इन लोगों के लिए किसी तरह इलेक्ट्रॅानिक लेनदेन की व्यवस्था चालू कर पाएं तो यह उनके जीवन में बहुत बड़े परिवर्तन का कारक बनेगा। इसके बाद अगला कदम होगा आधार नंबर और इस लेनदेन को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोडऩा।
तीसरी बात, अगर देश में ऐसे बहुत से केंद्र बनाने हों जहां लोग मोबाइल फोन की मदद से भुगतान आदि कर सकें। इसके लिए नेटवर्क में व्यापक विस्तार की आवश्यकता होगी। अभी भारत जैसे विशाल देश में ऐसे 350,000 केंद्र हैं। संगठित खुदरा क्षेत्र बमुश्किल देश की जनसंख्या के तीन फीसदी हिस्से तक पहुंच रखता है। इसके स्तर में बहुत सुधार की आवश्यकता है और कम कीमत वाले मोबाइल फोनों को भी ऐसी सुविधाओं से युक्त करना होगा ताकि वे प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) के रूप में काम कर सकें।
अब कल्पना कीजिए एक ऐसी स्थिति की जहां देश भर में 10 लाख से ज्यादा लोग कारोबार से जुड़े हैं और वे लेनदेन के माध्यम, वित्तीय सेवा प्रदाता अथवा बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में भी काम करते हैं। देश के शेष एक अरब लोग वहां भुगतान और खरीदारी के अलावा अन्य सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। संक्षेप में कहा जाए तो मोबाइल फोन की सर्वव्यापकता के अलावा अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी आवश्यकता है।
जाहिर सी बात है कि नई पहलें ही इस समूचे परिवर्तन में सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। हालांकि बैंकों द्वारा इन परिवर्तनों को लेकर कितनी ग्राह्यïता दिखाई जाएगी इसे लेकर मैं सतर्क हूं। इसके दो उपाय हो सकते हैं। सबसे पहला यह कि बैंकों को अपने खुद ई-वैलेट शुरू करने चाहिए जिन्हें नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड अथवा एटीम की मदद से टॉपअप किया जा सके। इस दौरान कस्टमर के बारे में समस्त जानकारियां बहुत सावधानी से जुटानी चाहिए। इनके माध्यम से ग्राहकों को अधिकाधिक मूल्यवर्धित सेवाएं जैसे कि टिकट खरीदना बेचना, रीचार्ज करना, शॉपिंग, बिल का भुगतान, सब्सक्रिप्शन, नवीनीकरण, मनी ट्रांसफर, धन भेजना, दान देना आदि काम आसानी से उपलब्ध कराई जा सकें। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो बहुत जल्द दूरसंचार कंपनियां इस मामले में उनका स्थान ले लेंगी। एक बड़े दूरसंचार सेवा प्रदाता ने ऐेसा करने का लाइसेंस हासिल कर भी लिया है।
ई-मनी से जुड़ी दूसरी नई पहल में प्लेटफॉर्म केंद्रित सर्वर आधारित ई मनी आती है। यहां क्रेडिट और डेबिट एक सर्वर पर वर्चुअल आधार पर होते हैं। इनका इस्तेमाल ऑनलाइन भुगतान के लिए किया जा सकता है। इस माध्यम में भी मोबाइल की मदद प्रमाणीकरण और पुष्टिï के लिए की जा सकती है। अगर ऐसी पहल की गईं तो वे हमें इच्छित परिवर्तनों की ओर ले जाएंगी।

Keyword: mobile banking,
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