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आंदोलन को झटका देगी गन
विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए टेजर बंदूक से निकली गोली बन सकती है सुरक्षा बलों की बोली
अजय शुक्ला /  September 28, 2010

कई बार किसी विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर की गई सख्ती बड़ी चर्चा का केंद्र बन जाती है। सुरक्षाबलों की गोलियों से मरने वाले लोगों का मामला तूल पकड़ लेता है और शासन और प्रशासन को बैकफुट पर जाना पड़ता है। इन विरोध प्रदर्शनों पर हुई मौत को लेकर मानवाधिकारवादी हो-हल्ला खड़ा कर देते हैं और सुरक्षा बल अपने पक्ष में तर्क देते रहते हैं। बहरहाल अब ऐसे हालात न बनें इसके लिए एक पहल की जा रही है। मतलब कि विरोध प्रदर्र्शनों के दौरान सख्ती करने पर किसी की जान भी न जाए और मामला भी सुलट जाए।

 अब भारतीय सुरक्षा बलों ने इस तरह के मामलों से निपटने के लिए नायाब तरीका ढूंढ लिया है। इस महीने की 9 तारीख को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के दिल्ली के नजदीक मानेसर में बने मुख्यालय में एनएसजी के सात स्वयंसेवक कम खतरनाक टेजर बंदूक का जायजा लेते देखे गए। ये खुद अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर इस बंदूक के असर को भांप रहे थे। इसका असर भी नजर आ रहा था। कोई भी जवान तुरंत संभल पाने में नाकाम हो रहा था। टेजर बंदूक को अमेरिका की टेजर इंटरनैशनल ने बनाया है जो अपने लक्ष्य पर हल्के छर्रे मारने का काम करती है।

जिस पर भी इस बंदूक से गोली दागी जाती है उसके शरीर के कुछ हिस्से तक यह धंस जाती है और बिजली के करंट जैसा झटका मारती है। इससे सभी नसों और उन पर नियंत्रण कुछ देर के लिए थम सा जाता है। जिस व्यक्ति को भी इस बंदूक की गोली लगती है वह सुन और सोच तो सकता है लेकिन उसका शरीर दिमाग के दिए निर्देशों को तुरंत मानने में नाकाम हो जाता है। टेजर इटरनैशनल इस अवस्था को न्यूरोमस्क्युलर इनसेप्टिसेशन कहती है।

 दरअसल गर्मियों के दौरान कश्मीर घाटी में करीब 100 से भी ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत और उत्तर प्रदेश में जमीन अधिग्रहण को लेकर हुए आंदोलन की वजह से भारत की टेजर जैसी बंदूकों में दिलचस्पी बढ़ी है। जब एनएसजी में इसका परीक्षण किया जा रहा था उस वक्त कई राज्यों की पुलिस और भारतीय सेना के नुमाइंदे भी उसका जायजा ले रहे थे। एनएसजी ने विमानन कंपनियों में तैनात एयर मार्शलों के लिए पहले ही 200 ऐसे कम खतरनाक हथियारों के लिए निविदा जारी कर दी है। ताकि विमान अपहरण की साजिश को नाकाम किया जा सके जिसमें कई दफे बंधकों को भी गोली लगने की आशंका रहती है। सूत्रों का यह भी कहना है कि एनएसजी अपने क्षेत्रीय केंद्रों के लिए भी करीब 600 ऐसे कम खतरनाक हथियार खरीद सकती है।

टेजर इंटरनैशनल ने भारत सरकार के साथ 20 साल का एक करार किया है। यह कंपनी भारतीय पुलिस, अद्र्घसैनिक बलों और एनएसजी जवानों के बीच आक्रामक तरीके से टेजर बंदूक जैसे कम खतरनाक हथियार का विपणन कर रही है। भारत में टेजर इंटरनैशनल के कारोबार की कमान संभालने वाले परमजीत सिंह कहते हैं, 'कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले हर अधिकारी के पास कम खतरनाक हथियार का विकल्प भी होना चाहिए। फिलहाल पुलिस अधिकारियों को मजबूरी में गोलियां ही चलानी पड़ती हैं। टेजर गन की मदद से वह कानूनी बाधाओं और दूसरी कई दिक्कतों से पार पाकर भी अपने काम को अंजाम दे सकते हैं।

पुलिस को भी सिंह का यह विचार भा रहा है। सिंह के अनुसार जम्मू-कश्मीर, पंजाब, सिक्किम, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश के अलावा आईटीबीपी ने टेजर बंदूक में अपनी दिलचस्पी दिखाई है। उत्तर प्रदेश पुलिस के हवलदारों ने भी हाल ही में एनएसजी की तर्ज पर ही टेजर बंदूक का जायजा लिया है। हालांकि टेजर का दामन भी पूरी तरह से साफ नहीं है। इसकी वजह से अभी तक 245 मौतें हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र भी इसको लेकर अपनी भौंहें तरेर चुका है। लेकिन इसके बावजूद भी इसे एक हल माना जा रहा है।

Keyword: NSG, Teger Gun, police,
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