बिजनेस स?टैंडर?ड - मंत्रियों के आचरण में जरूरी है मर्यादा का पालन
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 29, 2022 08:01 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

मंत्रियों के आचरण में जरूरी है मर्यादा का पालन
दिल्ली डायरी
ए. के. भट्टाचार्य /  September 28, 2010

ज्योति बसु को ही भले ही कई शिकायतें रहती हों, लेकिन उस प्रोटोकॉल से वे कभी विचलित नहीं हुए जिसकी अपेक्षा उनसे की जाती थी। दो दशक से ज्यादा समय तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहते हुए बसु को कई विभिन्न पार्टियों व गठबंधनों (कांग्रेस, राष्ट्रीय मोर्चा, संयुक्त मोर्चा और भाजपा की अगुआई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) से संबंधित प्रधानमंत्रियों से जूझना पड़ा। बसु जब रायटर्स बिल्डिंग से पश्चिम बंगाल की सरकार का संचालन कर रहे थे तब वह ऊंचे कद के राष्ट्रीय नेता थे और केंद्र में शासन करने वाले सभी प्रधानमंत्रियों से वरिष्ठ थे। राजनीतिक तौर पर भी बसु वामपंथी पार्टी से संबंध रखते थे, जबकि बसु को जिन प्रधानमंत्रियों से जूझना पड़ा वे दूसरी राजनीतिक पार्टियों से संबंध रखते थे, लेकिन उन प्रधानमंत्रियों में से ज्यादातर के साथ उनका संबंध कम स्नेहपूर्ण था। जब भी किसी प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल या इसकी राजधानी कोलकाता का दौरा किया तब प्रोटोकॉल के मुताबिक मुख्यमंत्री ने अनिवार्य रूप से केंद्र सरकार के प्रमुख से मुलाकात की। बसु या यहां तक कि उनके उत्तराधिकारी बुद्धदेव भट्टाचार्य ने प्रोटोकॉल का सम्मान करने में कभी भी कोताही नहीं बरती, हालांकि उन्हें औपचारिक मुलाकात का मौका भले ही न मिला हो।

इसके उलट संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की रेल मंत्री ममता बनर्जी का ऐसे प्रोटोकॉल के प्रति काफी कम सम्मान है। मंत्री रहते हुए भी उन्होंने अपनी निजी प्राथमिकताओं को अपने व्यवहार पर हावी होने दिया है। ऐसे में उन्होंने बीमार ज्योति बसु से मुलाकात की होगी, लेकिन वहां मौजूद पश्चिम बंगाल सरकार के सदस्यों का अपमान करने से पहले शायद ही कभी दोबारा सोचा हो। पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री को नापसंद करने की बात वह गोपनीय नहीं रखतीं। इसे समझा जा सकता है क्योंकि उनकी राजनीति पूरी तरह से पश्चिम बंगाल में वामपंथियों के खिलाफ नफरत व घृणा पैदा करने पर आश्रित है। यह हालांकि इस बात की ïव्याख्या नहीं  करता कि केंद्रीय मंत्री केतौर पर वह प्रोटोकॉल का सम्मान आखिर क्यों नहीं करतीं। अगर राज्य में किसी रेल परियोजना में भारतीय रेल व पश्चिम बंगाल सरकार शामिल है तो आदर्श रूप से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री व रेल मंत्री को इसके उद्घाटन कार्यक्रम में मौजूद होना चाहिए।

बनर्जी को हालांकि बुद्धदेव भट्टाचार्य की मौजूदगी की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में, उन्होंने मुख्यमंत्री के बिना कार्यक्रम का आयोजन कर लिया। क्या यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है? शुद्धतावादी इस पर बहस कर सकते हैं, लेकिन रेल मंत्री वाम दल के साथ अपनी निजी दुश्मनी की भावना एक ऐसे स्तर तक नहीं ले जा सकतीं, जहां पश्चिम बंगाल के वंचित मुख्यमंत्री कानूनी रूप से इसे केंद्र-राज्य का मामला बना दें। दिलचस्प रूप से, उसी कार्यक्रम में (जिसकेलिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया था) मंच पर अतिथि केतौर पर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी मौजूद थे। क्या मुखर्जी की उपस्थिति यह बताने के लिए थी कि बनर्जी के व्यवहार को केंद्र के कांग्रेस नेतृत्व का मौन समर्थन हासिल था? वास्तव में नहीं, मुखर्जी ने बाद में हर किसी को यह कहते हुए इसमें सुधार किया कि वह एक अन्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे जहां वह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करेंगे। यह अलग मसला है कि यह कार्यक्रम नहीं हुआ, लेकिन मुखर्जी ने स्पष्ट रूप से इसे बताने की कोशिश की थी।

मंत्रालय संबंधी ऐसी गलती के लिए सिर्फ बनर्जी या मुखर्जी पर ही आरोप क्यों लगाया जाना चाहिए? खेल मंत्री एम. एस. गिल अपनी चमक खुद नहीं छिपा पाए जब उनकी हरकतों के परिणामस्वरूप पूर्व कुश्ती चैपिंयन व वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को सार्वजनिक तौर पर अपमान सहना पड़ा था। ऐसा तब हुआ था जब युवा खिलाड़ी द्वारा विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद गिल सिर्फ सुशील कुमार के साथ फोटो खिंचवाना चाहते थे। चैंपियन के कोच सतपाल सिंह उस फ्रेम में मौजूद थे जब सुशील कुमार के साथ गिल फोटो खिंचवा रहे थे, ऐसे में सिंह को उस फ्रेम से हटा दिया गया और तब पूरा कुश्ती समुदाय नाराज हो गया था। मंत्री पर इसका कोई असर नहीं हुआ और वह वैसे ही बने रहे।

ऐसे कई और उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रमंडल खेल से जुड़ी परियोजनाओं के तीव्र क्रियान्वयन के लिए शहरी विकास मंत्री एस जयपाल रेड्डी की अगुआई में मंत्रिसमूह का गठन किया था। पिछले हफ्ते रेड्डी ने करीब-करीब खुद ही इसका फैसला कर लिया कि उनका काम पूरा हो गया है और ग्रुप अपनी बैठकों का आयोजन बंद कर देगा, जबकि खेल की विभिन्न परियोजनाओं के क्रियान्वयन की बाबत समस्याएं बरकरार हैं और यह सरकार को शर्मिंदा करना जारी रखे हुए है।

आखिर रेड्डी ने काम पूरा होने की घोषणा करने का फैसला क्यों किया, जब राष्ट्र और निश्चित रूप से प्रधानमंत्री (जिसे वह रिपोर्ट करते हैं) इसके उलट सोच रहे हैं?
समस्या सिर्फ परंपरा व मंत्री के प्रोटोकॉल केप्रति सम्मान की बाबत अक्षमता या उदासीनता का नहीं है। संप्रग सरकार के मंत्रियों को निजी या राजनीतिक प्राथमिकताओं को केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका व जिम्मेदारी के ऊपर तवज्जो देने की अनुमति मिली हुई है। एक केंद्रीय मंत्री किसी राजनीतिक समूह का भी सदस्य होता है। गठबंधन में मंत्री किसी बहुसंख्यक दल का हिस्सा नहीं हो सकता जो सरकार का नेतृत्व करते हैं। यह प्रधानमंत्री का काम है कि वह यह सुनिश्चित करें कि उनकी अपनी पार्टी व विभिन्न राजनीतिक दलों से संबंध रखने वाले मंत्री अपनी जिम्मेदारी की उपेक्षा करते हुए अपने एजेंडे का पालन न करें। इसी नाकामी की वजह से ये मंत्री मर्यादा का उल्लंघन करने के बाद भी खुले घूम रहे हैं।

Keyword: political leaders, India, political parties in India,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या श्रीलंका में रुपये को विदेशी मुद्रा बनाने से बढ़ेगा लेनदेन
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.