बिजनेस स?टैंडर?ड - जीएसटी से लघु उद्योग क्षेत्र में आएगी मजबूती
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जीएसटी से लघु उद्योग क्षेत्र में आएगी मजबूती
इनपुट क्रेडिट तंत्र से उत्पाद कीमतों को प्रतिस्पद्र्घी बनाने में मिलेगी मदद
टीई नरसिम्हन /  September 13, 2010

प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जो फिलहाल राजनीतिक दलों के बीच विवाद की एक वजह बनी हुई है। यदि जीएसटी लागू होता है तो यह छोटे एवं मझोले उद्योगों (एसएमई) लिए अच्छी खबर साबित हो सकती है, हालांकि इससे उनकी बाध्यताओं में थोड़ा इजाफा भी होने की गुंजाइश है। एसएमई क्षेत्र के विशेषज्ञों की तो कम-से-कम यही राय है।

दोपहिया वाहन बनाने वाली अग्रणी कंपनी टीवीएस मोटर के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वेणु श्रीनिवासन का मानना है कि जीएसटी लागू होने से विनिर्माण क्षेत्र (एसएमई में जिसकी तादाद ज्यादा है) में प्रतिस्पद्र्घा एवं दक्षता बढ़ेगी और मौजूदा कर प्रणाली में सुधार आएगा।

श्रीनिवासन ने कहा, 'मेरी राय में जीएसटी एसएमई के लिए बड़ा प्रोत्साहन साबित होगा।Ó उन्होंने कहा, 'इसके कई फायदे हैं और हां इस क्षेत्र की कई इकाइयों को बाजार से बाहर भी होना पड़ सकता है।Ó श्रीनिवासन का कहना है कि जीएसटी से सामान्य श्रेणी में फायदा होगा। टीवीएस मोटर में अपने अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, 'हमारे पास टियर-1, 2 एवं 3 के आपूर्तिकर्ता हैं। जब आप खरीदारी के लिए उप-ठेका देते हैं तो इस पर 4 फीसदी केंद्रीय बिक्री कर लगता है, जिससे खरीदारी की पूरी प्रक्रिया आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह जाती। हमारे पास मिलेजुले (हाइब्रिड) मॉडल हैं, जो बहुत ज्यादा सक्षम नहीं हैं। इस प्रक्रिया में गुणवत्ता खराब होती है। एक बार जीएसटी लागू हो जाने के बाद एसेंबली की पूरी प्रक्रिया निपटाने के लिए टियर-1 इकाइयां पर्याप्त होंगी। टियर-2 इकाइयों की ओर से की जाने वाली आपूर्ति से एसेंबली का बाद वाला चरण पूरा होगा और टियर-3 इकाइयों की आपूर्ति छोटे उपकरणों के लिए होगी।Ó

पेशेवर सेवाएं मुहैया कराने वाली फर्म केपीएमजी में परोक्ष कर के प्रमुख सचिन मेनन का कहना है कि एसएमई क्षेत्र को जीएसटी से कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी। वे कहते हैं, 'दूसरे कर कानूनों की तरह ही इसका लागू होना इस क्षेत्र के लिए अच्छी बात साबित होगी, लेकिन कुछ मुश्किलें भी पेश आएंगी।

उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू हो जाने के बाद एसएमई क्षेत्र की इकाइयां आयात, अंतर-राज्य खरीदारी एवं स्थानीय खरीदारी जैसे मामलों में चुकाए जाने वाले करों (मूल सीमा शुल्क के अलावा) के लिए पूरा इनपुट के्रडिट लेने की स्थिति में होंगी।

मेनन और श्रीनिवासन हाल ही में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से जीएसटी विषय पर चेन्नई में आयोजित एक सेमिनार में हिस्सा लेने आए थे जहां उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड से बात की।

मौजूदा मूल्य वर्धित कर (वैट) प्रणाली के तहत देश के तमाम हिस्सों में मौजूद संभावित खरीदारों तक एसएमई इकाइयों की पहुंच सीमित है क्योंकि अंतर-राज्य बिक्री पर केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) की व्यवस्था है। इस पर खरीदारों के लिए इनपुट क्रेडिट नहीं होता इसलिए ज्यादा खरीदारी की लागत खरीदारों की जिम्मेदारी होती है।
मेनन ने बताया कि बड़ी कंपनियों के विपरीत एसएमई इकाइयों के पास दूसरे राज्यों में ओपन डिपो के लिए बुनियादी ढांचे की कमी होती है। इनका इस्तेमाल सीएसटी से बचने के लिए किया जाता है। लेकिन जीएसटी लागू हो जाने के बाद ऐसा नहीं रह जाएगा। दूसरे राज्यों में खरीद-बिक्री की लागत इनपुट क्रेडिट तंत्र के माध्यम से तकरीबन नगण्य हो जाएगी और इस वजह से उत्पादों के बीच प्रतिस्पद्र्घा बढ़ेगी। जाहिर है, कुछ इकाइयों को इससे परेशानी हो सकती है।

लेकिन मेनन का यह भी कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद कर रियायत से होने वाली बचत मौजूदा 1.5 करोड़ रुपये से घटकर 10 लाख रुपये तक सीमित रह जाएगी। इस स्थिति में खासकर उन क्षेत्रों के लिए जिन्होंने कारोबार की नई शुरुआत की है, कर रियायत से होने वाली बचत में कमी तकलीफदेह साबित होगी।

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