बिजनेस स्टैंडर्ड - देनदारी के बाद मान-मनौव्वल की तैयारी
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देनदारी के बाद मान-मनौव्वल की तैयारी
आपूर्तिकर्ताओं को मनाने की कवायद शुरू
इंदिरा कन्नन, ज्योति मल्होत्रा और सौभद्र चटर्जी /  August 26, 2010

लोकसभा द्वारा भारत के परमाणु दायित्व विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद संभावित परमाणु आपूर्तिकर्ताओं को धक्का लगा है। लेकिन भारत भविष्य के बिजनेस भागीदारों को राजी करने के प्रयास में लग गया है।

वरिष्ठï सरकारी अधिकारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि नए विधेयक में किसी परमाणु दुर्घटना की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं पर कई तरह की जिम्मेदारियां थोपी गई हैं। संबद्घ मंत्री इस संबंध में आपूर्तिकर्ताओं के साथ बातचीत शुरू करेंगे, चाहे ये आपूर्तिकर्ता भारत के हों या बाहर के।

मंत्री उन्हें यह भी आश्वासन देंगे कि भारत दुनिया में परमाणु व्यापार के लिहाज से सबसे अच्छी जगह है। बुश प्रशासन के दौरान अमेरिका में भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते पर काम कर रहे प्रमुख लोगों में शुमार एशले टेलिस ने कहा, 'अमेरिकी सरकार के हलकों में भय की मात्रा बढ़ी है।'

टेलिस अब वाशिंगटन स्थित थिंकटैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनैशनल पीस के सीनियर एसोसिएट हैं। नई दिल्ली में कम से कम दो मंत्रियों ने कहा कि आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक रास्ता यह हो सकता है कि वे ऑपरेटरों के साथ अलग से करार करें, जो कि हमेशा ही गोपनीय होता है। भारत ने रूस के साथ यही मॉडल अपनाया है।

रूस ने भारत को कई सारे परमाणु रिएक्टर दिए हैं और नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद उससे 16 और परमाणु रिएक्टरों के लिए मदद मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में एक समझौता रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुआ था।

आपूर्तिकर्ता देनदारी के दर्जे को लेकर रूस भारत को सतर्कतापूर्वक अवगत करा चुका है। भारत और रूस के बीच हुए पिछले समझौते में आपूर्तिकर्ता जिम्मेदारी को पूर्ववर्ती कानून के तहत अलग रखा गया था। रूस का कहना है कि वह यह जानना चाहता है कि इसे लेकर अब क्या व्यवस्था लागू होने जा रही है।

जो प्रमुख वजह भारत सरकार को इस व्यवसाय के प्रति आकर्षित कर रही है वह है इस व्यवसाय का बड़ा आकार। सरकार के आरंभिक आकलन के अनुसार यह नागरिक परमाणु दायित्व विधेयक अगले 20 वर्षों के लिए परमाणु व्यवसाय को कम से कम 150 अरब डॉलर तक पहुंचाने में आसान बनाएगा।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने गुरुवार को यहां मीडिया को बताया, 'हम उद्योग चैम्बरों से बातचीत करेंगे और उनकी शंकाओं को दूर करने की कोशिश करेंगे।' चव्हाण के अनुसार महाराष्ट्र में जैतपुर संयंत्र अगले 8-10 वर्षों में आपूर्तिकर्ताओं के लिए 90,000 करोड़ रुपये का व्यवसाय सृजित करने में सक्षम है।

संप्रग सरकार के अधिकारियों ने भी खुलासा किया है कि जहां जापानी कंपनियोंं को पदार्थों की आपूर्ति के लिए कई बड़े ठेके मिलने की उम्मीद है वहीं अमेरिकी कंपनियां भी बौद्घिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के जरिये कम से कम 20 अरब डॉलर के ठेके हथियाने की तैयारी कर रही हैं।

Keyword: Nuclear Liability Bill, IPR, India,
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