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वेबसाइटों के लिए ट्रैफिक का सबसे बड़ा स्रोत है फेसबुक
सवाल-जवाब
वनिता कोहली खांडेकर /  August 26, 2010

जॉन आर बरबैंक, सीईओ, नीलसन ऑनलाइन

नीलसन ऑनलाइन के सीईओ जॉन बरबैंक गत माह मैकिंजी ऐंड कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम की घोषणा के लिए भारत में थे। संयुक्त उपक्रम कंपनी एनएम इनसाइट सामान्य मीडिया को ब्रांड, उपभोक्ता सेवा और नए उत्पादों का विकास जैसे विपणन कार्यों के लिए सहयोग उपलब्ध कराएगी। उन्हें उम्मीद है कि नीलसन को स्रोताओं की बेहतर समझ और मैकिंजी के 13 देशों में परिचालन और विपणन अनुभव से संयुक्त उपक्रम को काफी फायदा मिलेगा। बरबैंक दुनिया के सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्र न्यूयॉर्क में कंपनी का कामकाज संभालते हैं। इसे दुनिया का सबसे मजेदार और कठिन ऑनलाइन बाजार माना जाता है। और उनकी कंपनी इस बात पर भी नजर रखती है कि स्रोता और दर्शक आनलाइन क्या कर रहे हैं। सीआईआई के मुंबई में हुए एक कार्यक्रम में शामिल होने आए बरबैंक ने वनिता कोहली खांडेकर से डिजिटल मीडिया पर बात की। मुख्य अंश :

क्या आप इस पर नजर रखते हैं कि अमेरिका में उपभोक्ता नेट का प्रयोग किस तरह से करते हैं?
ऑनलाइन इस्तेमाल में सोशल मीडिया (जैसे फेसबुक और ऑर्कुट) का विकास काफी मजेदार रहा है। इस पर (सोशल मीडिया) लोग औसतन प्रति माह अपने 6-7 घंटे बिताते हैं। अगर ऐसा किसी टीवी कार्यक्रम के साथ हो जाए तो वह काफी सफल कार्यक्रम बन जाएगा। अधिकांश वेबसाइटों के लिए सबसे बड़ा स्रोत फेसबुक है। इसलिए, कार्यक्रमों, फिल्मों, उत्पादों और सेवाओं पर इसका खासा असर पड़ा है।

सोशल मीडिया के पूरी तरह विकसित होने मीडिया व्यवसाय का हिस्सा बनने में कितना समय और लगेगा?
दृश्य, ध्वनि और गतिविधियों के सहारे टीवी विज्ञापन अधिक प्रभावी बनता है। इसी कारण एक नीरस उत्पाद भी रुचिकर लगने लगता है। क्या वेब यह कर सकता है? नहीं, यदि आप इसे व्यावसायिक और ऑनलाइन कर दें। लेकिन इस नीरस उत्पाद को रुचिकर बना सकते हैं, जब इसे बड़े स्तर पर किया जाए और दोस्त का नाम जोड़ दें। एक शोध के मुताबिक, तब यह 3 गुना अधिक प्रभावी हो जाता है। हमने फेसबुक के साथ ऐसा करके भी दिखाया है।

क्या विज्ञापनदाता इस बात को स्वीकार करते हैं कि इंटरनेट वही प्रभाव छोड़ता है जैसे टीवी?
अगर आप उसी टीवी कार्यक्रम के साथ विज्ञापन को नेट पर प्रसारित करेंगे तो उसका प्रभाव समय के साथ कहीं ज्यादा होगा। इसलिए हूलू (हूलू एक वेबसाइट है जो टीवी कार्यक्रमों और फिल्में दिखाने का प्रस्ताव देती है) का राजस्व काफी अधिक है।

क्या आप मानते हैं कि नेट पर सीपीएम (लागत प्रति मील) काफी कम है...
हूलू पर बैनर विज्ञापनों का मतलब कुछ अलग है। इस मामले में गूगल और ई-मेल अधिक कामयाब हैं (जहां बैनर विज्ञापन होते हैं), लेकिन सोशल मीडिया मनोरंजन भी है।

समूचे मीडिया पर विज्ञापनों के असर को किस तरह से देखते हैं?
सामान्य तौर पर नेट पर क्लिक करने के साथ ही विज्ञापन नजर आने लगते हैं, लेकिन वे विज्ञापनदाताओं के अनुकूल नहीं हैं। वे उन विज्ञापनदाताओं के लिए काम करते हैं जो त्वरित प्रतिक्रिया चाहते हैं। हालांकि, अधिकांश उत्पादों पर लोग क्लिक ही नहीं करते। जबकि टीवी पर इस बात की गणना नहीं की जा सकती कि विज्ञापनों के प्रसारण के दौरान कितने लोग स्टोर में कुछ खरीदने के लिए चले गए।

विभिन्न माध्यमों पर लोगों द्वारा बिताए गए समय की गणना आप कैसे करते हैं?
ऑलाइन बिताए गए समय का एक तिहाई लोग टीवी के सामने बिताते हैं। इसलिए लोग जब ऑनलाइन होते हैं तो दोस्तों के साथ चैटिंग करते हैं और टीवी देखने के दौरान शो पर टिप्पणी करते हैं। हाल ही में जब मैं टीवी पर ऑस्कर लाइव देख रहा था तो मेरा बच्चा सो गया, तब मैंने कार्यक्रम को पॉज (भारत में डीटीएच कंपनियों ने भी यह सेवा देनी शुरू कर दी है।)

देकर बच्चे को सुलाने चला गया और लौटकर फिर से कार्यक्रम देखने लगा। इसलिए लोग 30 सेकंड के विज्ञापन के दौरान आपस में बातचीत करते रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या क्या इंटरनेट उस 30 सेकंड के समय को बचा सकता है? इसलिए मैं कहता हूं कि अगर आप सोशल मीडिया का हिस्सा बनना चाहते हैं तो टीवी देखना होगा।

Keyword: Facebook, CII, Orkut, CEO, Nielsen Online,
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