बिजनेस स्टैंडर्ड - 'मामूली बदलाव की दरकार'
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'मामूली बदलाव की दरकार'
अरिजित बर्मन /  August 25, 2010

विवादास्पद परमाणु दायित्व विधेयक में से 'इरादतन'  शब्द हटाने के बाद बुधवार को इसे संसद में पेश कर दिया गया। पर भारतीय उद्योग जगत खास तौर पर आपूर्तिकर्ता संबंधी प्रावधानों से खुश नहीं है। इस बारे में लार्सन ऐंड टुब्रो के प्रमुख ए एम नाइक से अरिजित बर्मन ने बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश:

प्रस्तावित परमाणु दायित्व विधेयक में आपूर्ति संबंधी प्रावधानों को लेकर आपकी चिंता क्या है?
हर परमाणु संयंत्र से तकरीबन 300 से 400 आपूर्तिकर्ता जुड़े होते हैं। इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि दायित्व संबंधी दावे की स्थिति में परिचालक आपूर्ति करने वालों की आड़ ले सकता है। आपूर्ति करने वालों पर यह नियम इकाई की उम्र और इसके बाद के 20 साल के दायित्व अवधि तक लागू रहेगा। यह प्रावधान न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत।

क्या यह कदम उपकरण आपूर्ति कारोबार को अलाभकारी बना देगा?
हां, अगर इसे ऐसे ही लागू कर दिया जाता है। सभी आपूर्तिकर्ता कारोबारी संगठन हैं, इसलिए वे असीमित दायित्व वाले समझौते स्वीकारने की स्थिति में नहीं हैं। आपूर्ति करने वालों को जरूरी बीमा कवर भी नहीं मिल रहा।

अगर मौजूदा स्वरुप में ही विधेयक को पारित कर दिया जाता है तो एलऐंडटी के लिए आगे का रास्ता क्या होगा?
मौजूदा समझौतों की जो शर्तें जिस स्तर की दायित्व की बात करती हैं, उसी स्तर पर इन्हें इन समझौतों पर लागू होना चाहिए। एनपीसीआईएल भारतीय उद्योग जगत के लिए मददगार रहा है। हमें यकीन है कि एनपीसीआईएल और एलऐंडटी के बीच इस मसले पर कोई स्पष्ट रास्ता निकलेगा। परमाणु उपकरण उत्पादन के लिए हमने संयुक्त उपक्रम बनाया है।

आप परमाणु कारोबार के विकास की बात करते रहे हैं। पर क्या यह विधेयक विकास में बाधक बनेगा?
हम आणविक ऊर्जा कार्यक्रम के स्वदेशीकरण में अपनी क्षमताओं के जरिए अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने तकरीबन सभी अंतरराष्ट्रीय परमाणु प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समझौते किए हैं। इस विधेयक में मामूली सुधार कर दिया जाए तो एलऐंडटी अब भी परमाणु कार्यक्रम के जरिए इस कारोबार के विकास की बात पर कायम है।

आपके मुताबिक विधेयक के आपत्तिजनक प्रावधान में क्या बदलाव किया जाना चाहिए?
अभी आपूर्ति करने वालों का एक निश्चित दायित्व है। यह संयंत्र लगाने के 24-30 महीने बाद तक लागू रहता और इसके लिए आर्थिक प्रावधान भी निश्चित हैं। इसलिए निश्चित दायित्व की बात होनी चाहिए।

कहा जा रहा है कि भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में प्रस्तावित विस्तार के बाद यहां की उपकरण निर्माताओं के लिए वैश्विक बाजार खुलेंगे...
हमारी कंपनी समेत भारत की किसी भी कंपनी को परमाणु उपकरण निर्यात करने में सक्षम बनाने के लिए सभी भारतीय कानूनों का वैश्विक कानूनों के साथ तालमेल बनाना होगा।

Keyword: Nuclear Liability Bill, L&T, NPCIL,
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