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वैश्विक एसयूवी दिग्गज बनने की राह पर एमऐंडएम
मोटा निवेश
राम प्रसाद शाहू /  August 22, 2010

कोरिया की वाहन निर्मात कंपनी सांगयोंग के अनुमानित 2,000 करोड़ रुपये में अधिग्रहण के साथ ही महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के  लिए विश्व स्तर की स्पोट्र्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) कंपनी बनने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

सांगयोंग के अधिग्रहण के बाद महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के लिए एक ओर जहां यूरोपीय बाजार में पहुंच आसान हो जाएगी वहीं कुछ नई तकनीक  से भी रूबरू होने का मौका मिलेगा। इससे कंपनी को अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में एसयूवी की कमी को पाटने में मदद मिलेगी।

कोरियाई कंपनी का अधिग्रहण महिंद्रा के लिए सकारात्मक माना जा रहा है और इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भी कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसके पास पहले से ही 60 अरब डॉलर नकदी के रूप में हैं।

हालांकि, सांगयोंग के शोध एवं विकास के प्रयास को बढ़ावा देने के लिए महिंद्रा ऐंड महिंद्रा को काफी मात्रा में रकम निवेश करनी पड़ सकती है। कोरियाई वाहन निर्माता कंपनी पिछले 8 सालों से कोई भी नया वाहन नहीं उतार पाई है और पिछले कुल सालों से अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में नयापन लाने की कोशिश कर रही है।

अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए कंपनी छोटी एसयूवी-कोरांडो सी 200 इस साल उतारने की योजना बना रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि पिछले तीन सालों के दौरान 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेलने के बाद यह धीरे-धीरे मुनाफे की पटरी पर लौट रही है।

बदल रहे दिन
सांगयोंग के प्रदर्शन में कुछ सुधार हुआ है। बिक्री और संचालन दोनों स्तरों पर सुधार स्पष्टï तौर पर देखा जा सकता है।  करीब दो साल के अंतराल पर जून तिमाही में कंपनी का ईबीआईटीडीए आंकड़ा सकारात्मक रहा है और कैलेंडर वर्ष 2009 के मुकाबले कैलेंडर वर्ष 2010 में कंपनी की बिक्री दोगुनी होकर 80,000 यूनिट तक रहने की संभावना है।

एडलवाइस के अनुसार वित्त वर्ष 2011-12 में सेंगयॉन्ग का अनुमानित घाटा 100 करोड़ रुपये रह सकता है जो महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की संचयी आमदनी का करीब 3 फीसदी होगा। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा से मिलने वाली नकदी की मदद से कंपनी को अपने ऊपर कर्ज के बोझ को कम करने और उत्पाद पोर्टफोलियो बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

राह में कुछ कांटे भी
एक ओर जहां वर्ष 2009-10 में लगभग सभी श्रेणियों में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी लेकिन मौजूदा कैलेंडर वर्ष में प्रतिस्पद्र्धा तेज होने के साथ ही आपूर्ति की समस्याओं के चलते इसकी हिस्सेदारी घट रही है।

यूटिलिटी व्हीकल (यूवी) श्रेणी में इसकी हिस्सेदारी जनवरी के 56 फीसदी से घटकर जुलाई में 49 फीसदी रह गई। हालांकि कंपनी आपूर्ति की समस्याओं से निपटने की कोशिश में लगी है लेकिन इस पर नियंत्रण पाने में कुछ तिमाहियों का समय लग सकता है। सांगयोंग के अधिग्रहण से महिंद्रा ऐंड महिंद्रा को रेक्सटॉन जैसे महंगे एसयूवी वाहन 20 लाख रुपये की कीमत पर उतारने में मदद मिल सकती है।

हल्के व्यावसायिक वाहन खंड में भी कंपनी की हिस्सेदारी जनवरी के 33 फीसदी के मुकाबले घट कर 26 फीसदी रह गई है। एडलवाइस का मानना है कि मैक्सिमो और जियो के एक टन से कम के संस्करण के उतारने सें अपनी खोई हुई हिस्सेदारी वापस पाने में मदद मिल सकती है।

विकास की रणनीति और मूल्यांकन
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा पिछले पांच सालों से अधिग्रहण और नई साझेदारियों के जरिये नई उत्पाद श्रेणी जोड़ रही है। यहां तक कि गैर-वाहन खंड कंपनी ने (टेक महिंद्रा के जरिये) सत्यम कंप्यूटर का अधिग्रहण किया और इसके कायापलट में लगी है। हाल में ही कंपनी ने काइनेटिक मोटर्स के दोपहिया कारोबार को खरीदा है और अब अपने पोर्टफोलियो को और अधिक मजबूती देने के लिए सरकारी कंपनी स्कूटर इंडिया को खरीदने के बारे में सोच रही है।

कंपनी की नजर मोटरसाइकिल कारोबार पर भी है और इस साल के अंत तक इस कारोबार में भी उतर सकती है। कंपनी की विकास दर और मुनाफा दोनों बेहतर रहने के अनुमान हैं। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने विशाल पोर्टफोलियो पर उचित ध्यान देने की है।

अगले दो साल में कंपनी की मुख्य खंडों में विकास दर के मजबूत रहने के अनुमानों के बीच ज्यादातर विश्लेषक कंपनी के शेयरों के मूल्यांकन को लेकर उत्साहित हैं। वे इसके शेयरों का मूल्यांकन 740-750 रुपये के बीच कर रहे हैं।

Keyword: SUV, M&M, EBITDA,,
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