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परमाणु दायित्व पर सरकार को राहत
परमाणु दायित्व विधेयक पर भाजपा हुई सरकार के साथ
बीएस संवाददाता /  August 19, 2010

दूसरे देशों के साथ भारत के परमाणु संबंधों के लिए बेहद अहम माने जा रहे परमाणु दायित्व विधेयक के संसद में पारित होने का रास्ता साफ हो गया है। संसद की एक स्थायी समिति ने इस संबंध में बुधवार को एक रिपोर्ट पेश की जिसमें परमाणु हादसे की स्थिति में मुआवजा राशि को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

इस विवादास्पद विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में लंबे समय से खींचतान चल रही थी लेकिन बुधवार के ऐलान के बाद यह राजनीतिक गतिरोध खत्म हो गया।
हालांकि वामपंथी दलों ने अभी भी इसका समर्थन नहीं किया है।

वामपंथी दल मुआवजे की राशि को और भी ज्यादा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं जिसे समिति ने अतार्किक करार दिया है। इससे पहले संसद के दोनों सदनों में कुछ पार्टियों ने विधेयक के लिए कंाग्रेस और भाजपा के बीच 'सौदेबाजी' का आरोप लगाया। इन आरोपों के बीच ही समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गई।

कांग्रेस सांसद टी सुब्बारामी रेड्डी की अगुआई वाली 25 सदस्यीय समिति ने इस रिपोर्ट को तैयार किया। समिति ने अपनी सिफारिश में मुआवजे की राशि को बढ़ाने की पुरजोर अपील करते हुए कहा,'समिति सिफारिश करती है कि मुद्रास्फीति के मौजूदा स्तर और भारतीय मुद्रा के क्रय मूल्यों को विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए परिचालन करने वाली कंपनी के दायित्व को बढ़ाने की जरूरत है जो इस समय 500 करोड़ रुपये है।

इसे बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये किए जाने की आवश्यकता है।'रेड्डी ने इस विधेयक को देश के लिए बेहद अहम बताया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'सरकार चाहे तो यह राशि बढ़ा सकती है लेकिन इसे किसी भी सूरत में घटाना नहीं चाहिए।' रिपोर्ट में समिति ने विधेयक में इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख करने की सिफारिश की है कि इसके तहत आने वाले परमाणु संयंत्रों का कोई निजी परिचालक नहीं होगा।

इसके मुताबिक यह विधेयक केवल केंद्र सरकार या उसके द्वारा स्थापित किसी प्राधिकरण या निगम या परमाणु ऊर्जा अधिनियम,1962 में परिभाषित किसी सरकारी कंपनी के माध्यम से उनके स्वामित्व और नियंत्रण वाले परमाणु संयंत्रों पर ही लागू होगा। समिति ने विधेयक में दिये गए मुआवजे के दावे की दस वर्ष की अवधि को भी कम बताते हुए इसे 20 वर्ष करने की सिफारिश की है।

उसने इसकी दलील में कई विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि विकिरण से होने वाले कैंसर का पता लगने में कम से कम पांच से सात वर्ष लगते हैं। इसलिए इस सीमा को दस की बजाय लगभग 20 वर्ष किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटना होने की स्थिति में संबंधित संयंत्र के संचालक को अग्रिम मुआवजा देना होगा तथा उसके बाद वह अपनी देनदारी आपूर्तिकर्ताओं के साथ द्विपक्षीय आधार पर सुलझा सकेगा।

बात-मुलाकात से बनी बात
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को भाजपा के वरिष्ठï नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित पार्टी के प्रमुख नेताओं से बातचीत कर इस विधेयक पर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने की पहल की थी। भाजपा ने मंगलवार को ही संकेत दे दिया था कि इन सिफारिशों के मान लेने पर वह विधेयक का समर्थन करने को
तैयार है।

भाजपा का साथ मिल जाने से सरकार को अब इस विधेयक को पारित कराने में कोई कठिनाई नही होगी और इसके लिए उसे बसपा, सपा और राजद जैसे दलों पर भी निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली पहले ही कह चुके हैं कि अगर कानून का बुनियादी स्वरूप ऐसा बन जाता है जैसा पार्टी पहले से कहती रही हैं तो हम इस विधेयक का समर्थन करेंगे।

दूसरी ओर वाम दलों ने समिति की रिपोर्ट में अपनी असहमति दर्ज कराते हुए कहा है कि दुर्घटना होने की स्थिति में मुआवजे की अधिकतम राशि 1,500 करोड़ रुपये काफी कम है। इसे बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए। रेड्डी ने इस मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

सौदेबाजी नहीं
भाजपा और कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी, राजद और वामपंथी दलों  के इस आरोप को एकदम निराधार बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को सोहराबुद्दीन मामले में क्लीन चिट देने के एवज में परमाणु दायित्व विधेयक पर साथ- साथ होने की सौदेबाजी की गई है। भाजपा ने कहा कि  उसकी कुछ आपत्तियां थीं जो दूर हो गईं।

Keyword: Nuclear Liability Bill,BJP, UPA,,
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