बिजनेस स्टैंडर्ड - आरबीआई का संतुलित कदम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, October 26, 2020 10:09 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

आरबीआई का संतुलित कदम
संपादकीय /  August 10, 2010

यह आश्चर्यजनक नहीं है कि भारत में क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (सीडीएस) शुरू करने की योजना को पुनर्जीवित करने के भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले पर काफी आशंकाएं पैदा हुई हैं। पहली बार 2007 में यह योजना सामने आई थी। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान इसी तरह के एक अन्य वित्तीय उपकरण (सीडीओ - क्रेडिट डिफॉल्ट ऑब्लिगेशन) के साथ सीडीएस ने काफी बदनामी झेली थी।

दरअसल इन उपकरणों के कारण बाजारों का धराशायी होना, उन प्रमुख कारकों में से एक था जिनकी वजह से पश्चिमी बैंक लडख़ड़ा गए थे। भारतीय केंद्रीय बैंक के आलोचक तर्क देंगे कि ऐसे उपकरण को पेश करने का निर्णय कर उसने वित्तीय संकट के सबकों को नजरअंदाज किया है। इस फैसले पर बाद में पछताना पड़ सकता है। जवाबी तर्क यह है कि आरबीआई ने बाजार विरोधी सिद्धांत पर चलने के बजाय वित्तीय संकट से सबक लिए हैं।

वित्तीय संकट के बाद यह ऐसा पहला वित्तीय उपकरण नहीं है जिसे आरबीआई बढ़ावा देगा। वह 2009 में मुद्रा व ब्याज दर वायदा की शुरुआत कर चुका है।आरबीआई के फैसले से यह संकेत मिलता है कि उसके आकलन के मुताबिक, पश्चिमी देशों की वित्तीय व्यवस्था लडख़ड़ाने की वजह ऐसे उपकरणों की मौजूदगी नहीं थी। इसके बजाय सटोरिया गतिविधियों के साथ मिलकर बाजार का जरूरत से ज्यादा परिष्करण उनके लिए गलत साबित हुआ।

ढीले-ढाले नियामकों के जरिए इसे बढ़ावा मिला। सीडीएस बीमा के समान होते हैं और बॉन्ड जारी करने वालों की ओर से संभावित डिफॉल्ट से बचाव करते हैं। पश्चिमी बाजारों में समस्या यह है कि सीडीओ और मॉर्गेज पर आधारित सिक्योरिटीज जैसे सभी विदेशी संरचनात्मक उत्पादों, न कि सामान्य बॉन्डों के लिए सीडीएस की पेशकश की गई। उदार दिशानिर्देशों की वजह से ऐसे लेनदेन ने पारदर्शिता के साथ समझौता कर लिया।

नियमन की ढीली व्यवस्था का मतलब यह था कि सीडीएस की खरीद इसकेवास्तविक खरीदारों तक सीमित नहीं थी बल्कि वास्तव में इसका इस्तेमाल सटोरियों ने बाजार में दांव लगाने के लिए किया। 2007 में बकाया सीडीएस का अनुमानित मूल्य 450 खरब डॉलर था और अनुमान है कि 200 खरब डॉलर सट्टेबाजी से संबद्ध थे।

सीडीएस की बाबत आरबीआई के दिशानिर्देश इन दोनों समस्याओं से बचाव करते हैं। सीडीएस की पेशकश सिर्फ सामान्य कॉरपोरेट बॉन्डों के लिए की जा सकती है और इसके वास्तविक संपत्तिधारकों द्वारा ही इसकी खरीद की जा सकती है। आरबीआई ने मानकीकृत उपकरण पर भी जोर दिया है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लेनदेन की सूचना देने की बाबत कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं।

समृद्ध सीडीएस बाजार का ठोस प्रतिफल मिल सकता है। बॉन्ड धारकों को जोखिम की भरपाई का जरिया उपलब्ध करवाकर वह मरणासन्न कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में जान फूंक सकता है। विडंबना यह है कि इसमें पर्याप्त खतरे हैं और व्यवस्थित तरीके से खतरे कम करने के लिए आरबीआई इन नए बाजारों का जरूरत से ज्यादा विनियमन कर सकता है।

ब्याज दर वायदा बाजार के साथ ऐसा हो चुका है। आरबीआई ने नए उपकरण को बढ़ावा देकर सही कदम उठाया है। नए बाजार में प्रतिभागियों को आकर्षित करने के लिए अब उसे नियामक सतर्कता और सही प्रोत्साहन के बीच संतुलन बनाना होगा।

Keyword: RBI, CDS, CDO,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सेबी को एमएफ योजनाएं बंद करने की शर्तें बनानी चाहिए कड़ी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.