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'घर' के लोग बताएंगे नक्सली इलाकों की समस्याएं
बैठक 7 अगस्त को नई दिल्ली में बुलाई गई है
रजत रॉय / कोलकाता August 05, 2010

मध्य और पूर्वी भारत के एक बड़े हिस्से में बढ़ती नक्सली हिंसा से जूझ रही केंद्र सरकार को आखिरकार यह समय आ गया है कि अगर इस बीमारी को जड़ से खत्म करना है तो जंगलों और जनजातीय इलाकों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को सबसे पहले दूर करना होगा।

इसी दिशा में पहला कदम बढ़ाते हुए गृह, वन और पर्यावरण मंत्रालय ने गैर-सरकारी विशेषज्ञों और दूसरे लोगों की एक संयुक्त बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इन इलाकों में रह रहे लोगों की मूल परेशानियों को समझना है। यह बैठक 7 अगस्त को नई दिल्ली में बुलाई गई है और इसका थीम होगा- 'जंगली इलाकों में चरमपंथी समस्याओं से निपटना।'

इस बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्री पी चिदंबरम करेंगे और इसमें थोड़ समय के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भाग लेने की भी संभावना है। इस बैठक की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें संबंधित मसलों पर विशेषज्ञों की राय तो सुनी जाएगी ही साथ ही इसमें वन प्रशासन के अधिकारियों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। दरअसल इन लोगों का ही रोजमर्रा की जिंदगी में वास्तविक हालात से पाला पड़ता है।

इस बैठक के लिए नक्सल प्रभावित वन इलाकों से वन अधिकारियों को बुलाया गया है ताकि उनसे यह पता किया जा सके कि सरकार ने इन इलाकों के लिए जो नीतियां बनाई हैं उनका जंगलों में रहने वाले लोगों और जनजातीयों पर क्या असर पड़ता है। गौरतलब है कि पिछले 20 सालों के दौरान नक्सलियों ने आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के वन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है।

ये ऐसे इलाके हैं जहां विभिन्न जनजातीय समुदाय बसते हैं और नक्सली इन्हें अपनी फौज में तो शामिल करते ही हैं साथ ही जब कभी नक्सलियों के खिलाफ मुहिम छेड़ी जाती है तो वे इन्हीं लोगों को अपनी ढाल बनाकर लड़ते हैं।

इस बैठक में शरीक होने जा रहे एक विशेषज्ञ ने बताया कि ज्यादा जोर यह जानने पर होगा कि खदानों को अवैध तरीके से लीज पर देने और इन इलाकों में जनजातीयों के हाशिये पर जाने का क्या संबंध हैं। इन इलाकों में नक्सली हिंसा की गंदी राजनीति तो कर ही रहे हैं साथ ही इनके पास लौह अयस्क, कोयला, तांबा आदि खनिजों के भंडार हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने यह पाया है कि जहां इन इलाकों में विकास से जुड़े तमाम कार्यों में भारी मुश्किलें आती हैं वहीं जिन ठेकेदारों को खदान लीज पर दिए गए हैं उन्हें यहां काम करने में किसी तरह की कोई समस्या नहीं आती है। नक्सली संगठनों और उद्योग सूत्रों के मुताबिक शांति से काम करने के एवज में इन ठेकेदारों की ओर से नक्सलियों को भुगतान किया जाता है।

Keyword: Naxalite areas, problems, Chattisgarh, Orissa, Jharkhand,
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