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मोबाइल: बोलें, बतियाएं, धन भेजें और मंगाएं
तकनीकी तरकश
प्रियंका जोशी /  July 29, 2010

जैसा कि किसी भी लोकप्रिय किराना स्टोर में होता है, पुणे में सचिन चंडाक की किराना दुकान में भी अपने-अपने बिल जमा करने के लिए ग्राहक कतार में खड़े हैं। लेकिन, यहां बिल के पैसे चुकाने का तरीका अलग है- काउंटर पर चंडाक को सीधे-सीधे पैसे नहीं दिए जा रहे हैं, बल्कि ये पैसे ग्राहक मोबाइल फोन के माध्यम से उनके अकाउंट में जमा करा रहे हैं।

हालांकि लक्ष्मी रोड स्थित चंडाक के स्टोर पर नजर न पड़े, शायद यह संभव न हो, लेकिन इस दुकान के मालिक को मालूम है कि उनके इलाके में मौजूद सुपरमार्केट को टक्कर देने के लिए ग्राहकों को कुछ तो अतिरिक्त सुविधा देनी होगी। इसलिए उन्होंने खुद ही उस प्रायोगिक परियोजना का हिस्सा बनने का फैसला किया, जिसे मोबाइल मनी सर्विस के नाम से जाना जाता है। यह सुविधा यस बैंक की पेशकश है, जिसे उसने नोकिया और ओबोपे (जो यस बैंक को तकनीकी मदद पहुंचाता है) के साथ मिलकर शुरू की है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से अनुमति मिलने के बाद यस बैंक ने मोबाइल मनी सेवा की शुरुआत की है। ओबोपे और नोकिया फिलहाल पुणे और चंडीगढ़ में प्रायोगिक तौर पर ये सेवाएं मुहैया करा रही हैं। इस सेवा के तहत मोबाइल फोन के उपभोक्ता अपने यूटिलिटी बिलों के भुगतान समेत केवल टेक्स्ट मैसेज की मदद से पैसे कहीं भेज भी सकते हैं और कहीं से पैसे मंगा भी सकते हैं।

शानदार ग्रोथ की उम्मीद
अनुसंधान एवं सलाहकार कंपनी टावरग्रुप के एक आकलन के मुताबिक वर्ष 2013 तक भारत में मोबाइल बैंकिंग सेवा का इस्तेमाल करने वाले सक्रिय उपभोक्ताओं की संख्या 5.3 करोड़ के स्तर तक जा पहुंचेगी। वर्ष 2009 में यह संख्या 1 करोड़ थी। यह कुल मिलाकर 51.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाता है।

आईसीआईसीआई बैंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के वी कामत कहते हैं, 'बैंकिंग क्षेत्र के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती देश के तकरीबन 600 जिलों के 6,00,000 गांवों के 60 करोड़ लोग हैं। वे मोबाइल फोन बैंकिंग की पहुंच बढ़ाने के लिए महत्त्वपूर्ण जरिया साबित हो सकते हैं- ग्राहकों की खरीदारी से लेकर लेन-देन प्रक्रिया संपन्न होने तक।' उन्होंने कहा, 'हम उन इलाकों को लक्ष्य कर सकते हैं, जहां परंपरागत बैंकिंग सेवा की पहुंच नहीं है।'

तब तो चंडीगढ़ में नरूला जनरल स्टोर के मालिक गौरव नरूला यदि मोबाइल मनी एजेंट बनने में कारोबार का जबरदस्त मौका देखते हैं तो कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है। खासकर तब, जब उनके शहर के तमाम कारोबारियों, दुकानदारों और किसानों के पास मोबाइल फोन है- या कम-से-कम वे इस सुविधा का इस्तेमाल करते हैं। नरूला इस प्रणाली से खुश हैं। वह कहते हैं, 'अब ग्राहक मेरे दुकान पर आते हैं और बिल का भुगतान एसएमएस के माध्यम से करते हैं।'

दरअसल मोबाइल फोन के माध्यम से पेमेंट करना सरल है, जिसका इस्तेमाल आम लोग कर सकते हैं। यही आम लोग सबसे ज्यादा ग्राहक होते हैं। नरूला कहते हैं, 'इसमें सुरक्षित एसएमएस का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें उपयोगकर्ताओं को मोबाइल डाटा प्लान की जरूरत नहीं होती।

चंडीगढ़ के ही एक दूसरे दुकानदार अरविंद गर्ग ने पाया कि 15 दिनों के दौरान 25 से ज्यादा ग्राहक मोबाइल मनी सेवा इस्तेमाल में लाए। एक्सलेंट स्टेशनर्स, फास्ट फूड एपेरल्स स्टोर चलाने वाले गर्ग ने पाया मोबाइल फोन के जरिए लेनदेन का दायरा 1,000 रुपये तक जा पहुंचा, जबकि इसका औसत 500 रुपये के आसपास है।

वह कहते हैं, 'मैं समझता हू कि एक बार पूरे देश में यह सेवा शुरू हो जाने के बाद लोग जल्दी से आपसी लेन-देन के लिए यह सेवा इस्तेमाल में लाने लगेंगे। सूचीबद्घ उपयोगकर्ताओं को यश बैंक एटीएम कार्ड भी देता है। इस वजह से ऐसे लोग जिनके पास मोबाइल अकाउंट है, किसी भी वक्त पैसों की निकासी कर सकते हैं।'

युवाओं से मोटी कमाई
पुणे की स्थिति अलग है। यहां की ज्यादातर आबादी बाहर से आए हुए युवाओं की है, जिनमें से अधिकांश या तो छात्र हैं या पेशेवर। चंडाक कहते हैं, 'हमारे ज्यादातर युवा ग्राहक अधिक पैसे लेकर नहीं चलते। इसलिए वे चाहते हैं कि उनके मोबाइल अकाउंट में 200-500 रुपये हमेशा उपलब्ध रहें, ताकि फोन रिचार्ज जैसे काम में दिक्कत न आए।'

चंडीगढ़ के नरूला भी अपने दूसरे स्टोर में ग्राहकों को मोबाइल मनी सेवा मुहैया कराना चाहते हैं। वह कहते हैं, 'ग्राहक अब बड़े होशियार हो गए हैं, खासकर युवा ग्राहक। उनके पास क्रेडिट या डेबिट कार्ड नहीं होता, इसलिए वे मोबाइल मनी सेवा के माध्यम से कैशलेस लेनदेन करके काफी खुश होते हैं।'

यस बैंक के समूह अध्यक्ष (ट्रांसैक्शन बैंकिंग ग्रुप) सरेश सेठी का कहना है कि चंडीगढ़ के बहुत सारे युवा उपयोगकर्ता पर्सन2पर्सन (पी2पी) मोबाइल ट्रांसफर की सुविधा इस्तेमाल करते हैं। यह दर्शाता है कि यह सेवा युवाओं में खासा लोकप्रिय हो रही है।

Keyword: Mobile Banking, RBI, P2P,,
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