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वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए उधारी तीन गुना बढ़ी
अप्रैल-जून 2010 में वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए कुल कोष प्रवाह 300 फीसदी बढ़ कर 2,50,210 करोड़ रुपये हो गया जो पिछले साल की समान अवधि में 61,475 करोड़ रुपये था
बीएस संवाददाता / मुंबई July 26, 2010

वाणिज्यिक क्षेत्र से ऋण की मांग में आई मजबूती की वजह से वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इस क्षेत्र के लिए कुल कोष प्रवाह में तीन गुना की वृद्घि दर्ज की गई है। उधारी में यह वृद्घि विशेषकर बैंकिंग प्रणाली, हाउसिंस फाइनैंस कंपनियों और आईपीओ निर्गमों की वजह से आई।

अप्रैल-जून 2010 में वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए कुल कोष प्रवाह 300 फीसदी बढ़ कर 2,50,210 करोड़ रुपये हो गया जो पिछले साल की समान अवधि में 61,475 करोड़ रुपये था। 2010-11 की पहली तिमाही के दौरान वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए कुल उधारी में लगभग 65 फीसदी योगदान अकेले बैंकिंग क्षेत्र का रहा। इस तिमाही के दौरान बैंक उधारी में साल दर साल आधार पर 21.7 फीसदी तक का इजाफा हुआ।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) की नई मैक्रोइकॉनोमिक ऐंड मोनेटरी डेवलपमेंट रिपोर्ट के अनुसार गैर-बैंकिंग स्रोतों से फंड प्रवाह पहली तिमाही के दौरान 49 फीसदी तक बढ़ा। यह वृद्घि गैर-वित्तीय संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक निर्गमों जैसे घरेलू स्रोतों के साथ साथ बाह्ïय वाणिज्यिक उधारी, अमेरिकन डिपोजिटरी रिसीट (एडीआर) और ग्लोबल डिपोजिटरी रिसीट (जीडीआर) जैसे विदेशी स्रोतों की वजह देखने को मिली है।

इस अवधि में जहां बैंकों ने 3जी और बीडब्ल्यूए स्पेक्ट्रम के लिए दूरसंचार कंपनियों की ओर से मांग में इजाफा देखा वहीं कंपनियों ने कोष जुटाने के लिए आईपीओ की भी मदद ली। गैन-वित्तीय संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक निर्गमों के जरिये जुटाए जाने वाला कोष इस अवधि में 5,187 करोड़ रुपये तक पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान 236 करोड़ रुपये था।

समान अवधि में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का कॉरपोरेट डेट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक क्षेत्र में निवेश 8,517 करोड़ रुपये से 54 फीसदी तक घट कर 3,936 करोड़ रुपये रह गया। पहली तिमाही में इस बीमा कंपनी ने इक्विटीज में लगभग 9,000 करोड़ रुपये का निवेश किया।

अप्रैल-जून 2010-11 में भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश घट कर 19,823 करोड़ रुपये रह गया जो अप्रैल-जून 2009-10 में 21,877 करोड़ रुपये था। वैश्विक बाजारों में हालात में आए सुधार के साथ बाहरी स्रोतों से उधारी बढ़ कर 9,091 करोड़ रुपये हो गई।

वाणिज्यिक क्षेत्रों की ओर से ऋण की मांग में तेज वृद्घि के परिणामस्वरूप बैंकों ने म्युचुअल फंडों से अपना धन बड़ी मात्रा में वापस निकाला। जून के अंत तक बैंकों ने म्युचुअल फंडों की डेट स्कीमों से 8,335 करोड़ रुपये निकाले। जून की तिमाही के दौरान एडीआर, जीडीआर आदि में विदेशी स्रोतों से कोष में शानदार इजाफा हुआ और यह 215 करोड़ रुपये से बढ़ कर  4,832 करोड़ रुपये रहा।  

Keyword: RBI, GDR, ADR, Commercial sector, demand for loans,
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