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स्थानांतरण के लिए आईआरडीए और बीमा कंपनियां साथ-साथ
नेहा पांडेय /  June 25, 2010

बीमा कंपनियां और इस क्षेत्र की नियामक संस्था स्वास्थ्य बीमा के स्थानांतरण की मंजूरी देने के लिए बातचीत को टालती रही है। इसके पीछे सोच यह है कि कोई व्यक्ति जिसका मेडिकल बीमा कवर 1 लाख रुपये से ज्यादा है वह अपनी बीमा कवर की सुविधा को पाते हुए दूसरे बीमाकर्ता की सेवा ले सके, इसकी मंजूरी मिलनी चाहिए।

गैर-जीवन बीमाकर्ताओं के संगठन, सामान्य बीमा परिषद (जीआईसी) के एस एल मोहन का कहना है, 'हमने यह प्रस्ताव रखा है कि बीमित व्यक्ति के पास यह विकल्प होना चाहिए कि वे बीमा कवर के हर फायदे को पाते हुए दूसरे बीमाकर्ताओं की सेवा ले सकें।' हालांकि इस तरह के बदलाव में भी कई तरह की परेशानियां मौजूद हैं।

अगर आप एक कंपनी से दूसरी कंपनी की सेवा लेने के लिए आपको एक नई शुरुआत करनी होगी। आपको एक नए ग्राहक के तौर पर देखा जाता है और प्रीमियम लगाया जा सकता है और यह ज्यादा हो सकता है। अगर आपको पहले पॉलिसी की अवधि के  दौरान कोई बीमारी हो गई तो इसे पहली बीमा कंपनी की पॉलिसी के तौर पर समझा जाएगा।

आपको पहले निर्धारित समय सीमा को पूरा करना होगा उसके बाद किसी बीमारी के लिए पॉलिसी कवर लागू होगी। मिसाल के तौर पर 6-9 महीने की अवधि को पूरा करने के बाद ज्यादातर पॉलिसी का भुगतान कुछ इलाज के बाद ही दिया जाता है।

बीमा पॉलिसी को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में हस्तांतरित करने से सबकुछ नहीं बदल सकता है। जीआईसी के पूर्व अधिकारी के एन भंडारी का कहना है, 'इसके तहत पॉलिसीधारक को न्यूनतम बेस कवर बनाए रखा जाता है जो सभी बीमा कंपनियों के लिए समान होता है।'

बेस कैरीओवर

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण और बीमा कंपनियां 'न्यूनतम बेनिफिट प्लान' बनाने के लिए इस मसले पर विचार कर रही हैं। यह बेस कवर और सुविधाओं का मिला-जुला रूप होता है जिसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

ऑप्टिमा इंश्योरेंस ब्रोकर के राहुल अग्रवाल का कहना है, 'एक पोर्टेबल स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को इसलिए पेश किया जा रहा है ताकि इसमें आसानी से बदलाव किया जा सके और बीमा पॉलिसी के लाभ को भी बरकरार रखा जाए।' एक बार जब नियामक की अनुमति मिल जाएगी तो बीमाकर्ता ऐसे बीमा कवर की बिक्री कर पाएंगे।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप बेस कवर ज्यादा फायदा चाहते हैं तो इसे एक नई पॉलिसी के तौर पर देखा जाएगा। मिसाल के तौर पर अगर आपने कंपनी ए के साथ 5 सालों की अवधि के लिए 5 लाख का बीमा कवर ले रखा है।

आप चाहते हैं कि आप बीमाकर्ता बी के पास अपनी पॉलिसी हस्तांतरित कर लें तो आप केवल बेस कवर जो 1-2 लाख रुपये हैं उसे शिफ्ट कर सकते हैं। अगर आप अपने बेस कवर को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करना चाहते हैं तो नई पॉलिसी के नियमों के मुताबिक आपसे शुल्क लिया जाएगा।

दूसरी बात यह है कि आपकी मौजूदा उम्र के मुताबिक प्रीमियम नई पॉलिसी के मुताबिक ही होंगे। हालांकि बेस कवर पर आप तुरंत दावा कर सकें गे। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह पोर्टेबिलिटी ज्यादा फायदेमंद होगी जो मौजूदा बीमाकर्ता से असंतुष्ट होते हुए भी कोई बदलाव लाने में सक्षम नहीं होते। इसके अलावा कंपनियां भी ऐसे लोगों के लिए नई पॉलिसी देने में हिचकती है।

कुछ मुश्किलें

इसमें कुछ नकारात्मक बातें भी हैं। मौजूदा पॉलिसी में एक पॉलिसीधारक अपने पास एक नो क्लेम बोनस रख सकता है। यह हर क्लेम फ्री वर्ष के लिए बढ़े हुए कवर के तौर पर आता है। इस योजना के तहत आप अपने संचित बोनस को कैरी फारवर्ड नहीं कर सकते हैं। अगर आपके पास कस्टमाइज बीमा पॉलिसी है तो आप शिफ्टिंग में सारी सुविधाएं बरकरार नहीं रहेंगी।

फ्यूचर जेनेराली जनरल इंश्योरेंस के हेल्थ इंश्योरेंस के प्रमुख श्रीराज देशपांडे का कहना है, 'आप किसी बेनिफिट प्रोडक्ट से इनडेमिनिटी प्रोडक्ट में शिफ्ट नहीं कर सकते हैं। लेकिन कई समान प्रोडक्ट हैं जिन्हें आप शिफ्ट कर सकते हैं।'

स्वास्थ्य सुरक्षा

खूबियां
बीमित व्यक्ति एक  कंपनी से दूसरी कंपनी की सेवा ले सकता है
निश्चित बेस कवर के स्थानांतरण की इजाजत
बेस कवर के साथ न्यूनतम लाभ का भत्ता

खामियां
समान पॉलिसी में ही स्थानांतरण की इजाजत
विस्तृत कवर को नई पॉलिसी माना जाएगा

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