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धन जुटाया मगर कैपेक्स खर्च एक तिहाई
बाकी बचे धन का कर्ज पुनर्भुगतान, तरल निवेशों, सामान्य कारोबारी उद्देश्यों, सहयोगी कंपनियों और इश्यू खर्चों में ही निवेश किया गया
बी जी शिरसाठ और अशोक दिवासे / मुंबई June 23, 2010

एक विश्लेषण के मुताबिक बीते तीन साल में आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के जरिए धन जुटाने वाली ज्यादातर कंपनियों ने इसमें से आधे से भी कम धन का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स के लिए किया है। इसमें 47 कंपनियों का सर्वेक्षण किया गया।

कुल जुटाई गई करीब 41,780 करोड़ रुपये की राशि में से करीब 40 फीसदी यानी 17,200 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंडों और बैंक जमाओं जैसी तरल परिसंपत्तियों में लगाए गए। अन्य 18 फीसदी का इस्तेमाल सहयोगी कंपनियों के कर्ज पुनर्भुगतान, इनमें निवेश और सामान्य कारोबारी उद्देश्यों में किया गया।

वर्ष 2007 के सार्वजनिक इश्यू दिशा-निर्देशों के तहत सेबी ने कंपनियों को कहा कि वे अपने तिमाही परिणामों की जानकारी शेयर बाजारों को दे। इन 47 कंपनियों ने बताया कि इश्यु से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल उन्होंने कहे गए उद्देश्यों के लिए किया है।

इन कंपनियों द्वारा दी गई जानकारियों पर आधारित हमारा विश्लेषण बताता है कि जुटाई गई कुल राशि का कोई एक तिहाई हिस्सा यानी करीब 14,200 करोड़ रुपये पूंजीगत विस्तार में खर्च किए गए। इन 47 कंपनियों में से 15 ने कहा कि जुटाई गई राशि में से 90 फीसदी धन का इस्तेमाल उन्होंने कहे गए उद्देश्यों में इस्तेमाल किया है।

इसके अलावा इस राशि में भी 60 फीसदी का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स में किया गया। बाकी बचे 40 फीसदी हिस्से का इस्तेमाल कर्ज भुगतान, सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों, सहयोगी कंपनियों में निवेश और इश्यू खर्चों में किया गया।

मसलन, मुंद्रा पोर्ट द्वारा जुटाए गए 1,771 करोड़ रुपये में से 825 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कोयला टर्मिनल और सेज परियोजनाओं में किया गया। वहीं अपनी सहयोगी कंपनी और संयुक्त उपक्रम परियोजनाओं में इसने 316 करोड़ रुपये का निवेश किया। कंपनी ने 586.8 करोड़ रुपये सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों और 43.4 करोड़ रुपये इश्यू खर्चों के तौर पर लगा दिए।

अन्य 15 कंपनियों ने बताए गए उद्देश्यों के लिए आईपीओ से जुटाए धन का 50 से 90 फीसदी हिस्सा खर्च किया। गहन विश्लेषण ने दर्शाया कि कैपेक्स का इस्तेमाल करीब 45 फीसदी था। बाकी बची 16 कंपनियों ने बताए गए उद्देश्यों में धन के आधे से कम हिस्से का इस्तेमाल किया।

डाटा के विश्लेषण में यह बात सामने आई कि 20 फीसदी धन उत्पादन में विस्तार करने में निवेश किया गया। मसलन, करीब 11,500 करोड़ रुपये जुटाने वाली रिलायंस पावर ने अपनी 7,060 मेगावाट की आरओएसए बिजली परियोजना पर अब तक 3,096 करोड़ रुपये खर्च किए है। ऐसी कंपनियां जो 2009-10 में अपने आईपीओ लाई, वे अपनी जुटाई गई राशि का इस्तेमाल मौजूदा वित्त वर्ष में करने की उम्मीद कर रही हैं।

अगस्त 2009 में 6,038 करोड़ रुपये जुटाने वाली एनएचपीसी ने अब तक सिर्फ 616 करोड़ रुपये ही खर्च किए हैं। कंपनी ने ऊर्जा मंत्रालय को 2,013 करोड़ रुपये दिए और 3,288 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया।

गोदरेज प्रॉपर्टीज ने दिसंबर 2009 में 468.85 करोड़ रुपये जुटाए। कंपनी ने भू-विकास अधिकारों का प्राप्त करने पर 25 करोड़ रुपये इस्तेमाल किए और 150 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान पर खर्च किए गए। ऑयल इंडिया ने 2,777 करोड़ रुपये जुटाए। उसमें से 1,484 करोड़ रुपये कैपेक्स के लिए बरते गए।

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