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अब ऑटो रिक्शा आपसे सिर्फ एक कॉल दूर
तकनीक के सहारे परिवहन को सुगम बनाने की तैयारी कर रहे हैं आईआईटी से पढ़े दो युवक
प्रावदा गोडबोले /  June 17, 2010

आंखों में उनके जुनून दिख रहा था। वे उबीदा का मतलब समझा रहे थे। संस्कृत में उबी का अर्थ स्थान और इदा का ज्ञान है।

संस्थापक और निदेशक मुकेश झा व जनार्दन प्रसाद ने पुणे में एक नंबर डायल करते ही ऑटोरिक्शा उपलब्ध कराने वाली कंपनी की शुरुआत की है। कंपनी का नाम है उबीदा सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड।

प्रसाद ने बताया कि इस क्षेत्र में कैब और टैक्सी की सुविधा देने वाली कंपनियां पहले से मौजूद हैं। इनकी तुलना में ऑटोरिक्शा सस्ता पड़ता है और लोग अक्सर इसका इस्तेमाल भी करते हैं। फिर भी इसकी सवारी के लिए लोगों को काफी कठिनाइयां उठानी पड़ती हैं। इसीलिए हमने ऑटोरिक्शा को लोगों के घरों तक ले जाने के बारे में सोचा, जिससे कि उनका समय बचे और उन्हें ऑटो की सवारी हासिल करने में मुश्किल न हो।

विचार तो काफी अच्छा था, लेकिन उसे अमल में लाना आसान नहीं था। उन दोनों के दिमाग में यही सवाल था कि क्या ऑटो चालक उनके इस नेटवर्क का हिस्सा बनना पसंद करेंगे? क्या यह आसान होगा और इसे व्यावसायिक रूप से सफलता मिलेगी?इसके बावजूद दोनों आईआईटियन अपनी कोशिशों में जुट गए।

आईआईटी कानपुर में केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान बने दोनों दोस्तों को भरोसा था कि एक दिन वे अपना उद्योग अवश्य स्थापित करेंगे। वैज्ञानिक सोच के साथ उन्होंने 100 ऑटोरिक्शा चालकों के बीच सर्वे किया। उन्होंने उनकी चिंताओं और समस्याओं को समझने की कोशिश की। उन्होंने तीन सौ ग्राहकों से भी बातचीत की और उनसे इस सेवा की जरूरत के बारे में जाना।

सर्वे का निष्कर्ष यह निकला कि ऑटोरिक्शा चालक 25 फीसदी समय खाली घूमते हैं, जबकि ग्राहक ऑटोरिक्शा खोजने में और चालक को जाने के लिए राजी करने में अपना काफी समय बेकार कर देते हैं। तब झा और प्रसाद को विश्वास हो गया कि वह सही दिशा में जा रहे हैं।

दोनों ने फरवरी 2010 में अपने विचार को शुरुआती अमलीजामा पहनाया। उनके मुताबिक यह इस तरह काम करता है, जब ग्राहक कहीं जाने की योजना बनाता है तो उसे जाने से एक घंटा पहले  पर कॉल करनी होती है। तब दोनों आईआईटियन का बनाया गया उपकरण काम करना शुरू कर देता है।

इससे उस क्षेत्र में मौजूद ऑटोरिक्शा और उपलब्ध चालकों के बारे में मालूम चल जाता है। इसके बाद ग्राहक के मोबाइल पर मैसेज के माध्यम से ऑटोरिक्शे का रजिस्ट्रेशन नंबर, चालक का नाम, उसका मोबाइल नंबर, चलने का समय, गंतव्य स्थल की दूरी और अनुमानित किराये की जानकारी पहुंचा दी जाती है।

झा ने बताया कि अभी तक उन्होंने उपलब्ध ढांचे का उपयोग किया है। शुरुआत में सिर्फ परिचितों और मित्रों को ही यह सुविधा दी गई है। उन लोगों को रिक्शाचालकों के नंबर नोट करा दिए गए, जो घर के आसपास के थे और घर से ही कहीं जाना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि अब हम इस सेवा को बड़े व्यवसाय का रूप देने की तैयारी कर रहे हैं। अब हमारी लोगों को घरों से ऑफिस लाने ले जाने की योजना है। हम इसे व्यावसायिक रूप देने के लिए एक कॉल सेंटर भी बनाएंगे।

प्रसाद ने बताया कि ट्रायल के तौर पर शुरू की गई इस सेवा में हमने अपनी काफी बचत का इस्तेमाल किया है। फिलहाल कई कंपनियों ने हमसे जुड़ने की इच्छा जताई है और कई तो साझेदारी करने का इरादा भी रखती हैं। लेकिन हम अभी बिना लाभ और हानि वाले व्यवसाय के रूप में काम करना चाहते हैं। अगली तिमाही तक इसी पैटर्न पर काम करने का इरादा है।

उनकी प्रति सेवा पांच से 10 रुपये वसूलने की योजना है।इसके विस्तार के तहत अधिक से अधिक चालकों को जोड़ने के लिए उनकी ऑटोरिक्शा मालिकों (किराये पर चलाने वालों) की सेवा लेने की योजना भी है। इस समय यह सेवा फोन पर ही दी जा रही है, लेकिन भविष्य में वेबसाइट और मैसेज सर्विस तक इसको विस्तार दिया जाएगा।

भले ही यह सेवा अभी गति नहीं पकड़ पाई है, लेकिन बधाई और धन्यवाद के संदेश उन्हें मिलने लगे हैं। बुजुर्गों और शारीरिक रूप से विकलांग लोगों के लिए भी यह सुविधा उपलब्ध है।

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