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करीब से जानिए बराक हुसैन ओबामा को
पुस्तक समीक्षा
कनिका दत्ता /  06 15, 2010

अगर इस किताब की प्रकाशक पिकाडोर एक साल पहले इसे प्रकाशित करती तो गैर-अमेरिकी लोगों के लिए यह किताब ज्यादा प्रासंगिक साबित हो सकती थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को करीब से जानने के लिए यह किताब बहुत उपयोगी है। इसमें ओबामा के जीवन के कई पहलुओं को समेटने की कोशिश की गई है। मसलन-उनकी जिंदगी, राष्ट्रपति चुनाव के लिए अभियान और नस्लभेद जैसे विषय किसी भी गंभीर पाठक के लिए बढिय़ा बौद्विक खुराक हो सकते हैं।
 
ओबामा को राष्ट्रपति बने हुए अब तकरीबन डेढ़ साल हो गए हैं और इसे लेकर शुरू में जो उत्साह बना था, वह अब ठंडा पड़ चुका है। अब लोग अंदरखाने की कहानियों और उनकी सरकार के कामकाज की समीक्षा को लेकर ज्यादा उत्सुक हैं। न्यू यॉर्कर के संपादक डेविड रेमनिक को इन अपेक्षाओं के बारे में अच्छे से पता होगा। आखिर वह ओबामा की विकास यात्रा के साक्षी रहे हैं। 

अपनी किताब में उन्होंने इन बुनियादी चीजों पर तो रोशनी डाली ही है, साथ ही किताब की प्रस्तावना का थोड़ा विस्तार कर उसमें ओबामा के एक साल के कार्यकाल की समीक्षा की है। नई पेशकश में इसे नई सामग्री कहा जा सकता है लेकिन रिपोर्ताज और समीक्षा के लिहाज से यह उतनी ज्यादा नहीं कही जाएगी। इसके बावजूद यह किताब ओबामा को नजदीकी से जानने का मौका देती है। 

इस किताब में काफी कुछ है जो आप दुनिया के सबसे ताकतवर और अहम ओहदे पर बैठे शख्स के बारे में जानने को बेसब्र होंगे। मसलन आर्थिक मंदी के दौर में ओवल ऑफिस की कमान संभालते वक्त उनके हावभाव कैसे थे या फिर तब उनकी प्रतिक्रिया कैसी थी जब नोबेल फाउंडेशन ने शांति के लिए उन्हें दुनिया का सबसे सम्मानित तमगा देने का ऐलान किया। 

जहां तक रेमनिक की बात है तो एक पत्रकार के तौर पर उन्हें खास प्रतिष्ठा हासिल है। उन्होंने कभी भी जल्दबाजी वाली पत्रकारिता नहीं की है। शोध और चीजों पर बारीक पकड़ के बाद ही रेमनिक की लेखनी शुरू होती है। जिन्होंने भी लेनिन्स टॉम्ब और रीसरेक्शन जैसी किताबें पढ़ी होंगी वे बता सकते हैं कि इन किताबों में उन्होंने बेहद सधे अंदाज में साम्यवादी सोवियत संघ के विघटन के बाद बने रूस के बारे में लिखा था। इसके लिए जितना शोध किया था उतना ही उनका खुद का गहन विश्लेषण मौजूद था। उनकी 586 पन्नों की नई किताब द ब्रिज भी इस मामले में अपवाद नहीं है और इन पैमानों पर पूरी तरह खरी उतरती है। वह मानते हैं कि बराक ओबामा का उभरना इतिहास का एक बेहद अहम अध्याय है।
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सामयिक मामलों पर पैनी नजर रखने वाली लेखिका और स्तंभकार मॉरीन डॉड ने भी उनको द वन (केवल एक) का उपनाम दिया है। उनका मानना है कि रेमनिक, ओबामा की व्हाइट हाउस तक की यात्रा के हमराही रहे हैं और उन्होंने सामयिक अमेरिकी इतिहास और राजनीति के चश्मे से इस पूरे दौर को घटित होते देखा है। 

दिलचस्प बात यह है कि रेमनिक को खुद ओबामा से ही सबसे ज्यादा प्रतिस्पद्र्घा करनी पड़ रही है क्योंकि ओबामा की खुद की लिखी किताब भी उनके बारे में कई बातें उजागर करती हैं। ओबामा द्वारा लिखी गई किताबें 'ड्रीम्स फ्रॉम माय फादर और द ऑडेसिटी ऑफ होप आत्मकथा या टिप्पणियों की शैली में ही लिखी गई हैं। लेकिन ओबामा ने जो लिखा है उससे भी सभी बातें सामने नहीं आती हैं। 

इस मामले में जो बाकी रह जाता है उसे रेमनिक की किताब पाटने की कोशिश करती है। इस किताब में ऐतिहासिक पृष्ठïभूमि और बदलते दौर की रिपोर्टिंग की गई है। यह किताब दो हिस्सों में बंटी है। इसमें उनकी शुरुआती जिंदगी से लेकर हार्वर्ड में बिताए वक्त का भी जिक्र है। अपनी पहचान के लिए ओबामा को कई जटिलताओं से जूझना पड़ा। दूसरे अफ्रीकी-अमेरिकियों की मानसिकता से उनकी सोच अलग थी। 

ओबामा की जड़ों तक जाने के लिए रेमनिक ने केन्या में आजादी के लिए चले आंदोलन तक के वक्त को टटोला है। ओबामा के केन्याई पिता को अन्य छात्रों के साथ कुछ अमेरिकी संस्थानों की वित्तीय मेहरबानी से अमेरिका आने का मौका मिला। दरअसल केन्या के करिश्माई नेता थॉमस मोया चाहते थे कि आजादी के बाद सरकार चलाने के लिए बेहतर अधिकारी चाहिएं और छात्रों को अमेरिका में जाकर पढ़ाना और प्रशिक्षित कराना उनकी पहल का ही हिस्सा था। अमेरिका में ही उन्होंने शादी की और उसके बाद ओबामा का जन्म हुआ।
 
किताब में ओबामा सीनियर के बारे में काफी तफसील से लिखा गया है। उसके बाद ओबामा की जिंदगी जिन रास्तों से होकर गुजरी उसका जिक्र भी किताब में बड़े ही रोचक ढंग से किया गया है। किताब की शैली से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ओबामा के लिए रेमनिक के दिल में खास इज्जत है लेकिन उन्होंने वस्तुनिष्ठता के साथ कोई समझौता नहीं किया।

Keyword: The Bridge - Life and Rise of Barack Obama, book review, US president,
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