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बंगाल में ट्रेन पर नक्सली हमला
पश्चिम बंगाल में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पर नक्सलियों के हमले में 70 लोग मरे
बीएस संवाददाता/एजेंसी / कोलकाता May 29, 2010

पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुरा में सरडीहा और खेमसौली स्टेशन के बीच शुक्रवार तड़के नक्सली हमले की वजह से मुंबई जा रही ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए और इनमें से पांच दूसरी लाइन पर आ रही मालगाड़ी से टकरा गए।

खबर लिखे जाने तक इस दुर्घटना की वजह से कम से कम 70 लोगों के मरने की खबर की पुष्टि हो गई है। इस दुर्घटना में तकरीबन 200 लोग घायल हुए हैं। गृह मंत्रालय ने की तरफ से कहा गया है कि घटनास्थल पर राहत कार्य के लिए आपदा प्रबंधन बल की चार टीमों को लगाया गया है।

साथ ही राहत कार्य में राज्य सरकार और रेलवे की टीम भी लगी हुई है। अभी तक की जांच के मुताबिक नक्सलियों द्वारा रेल पटरी को नुकसान पहुंचाने जाने की वजह से ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। दूसरी लाइन पर आ रही मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन से टकरा गई। इस वजह से यह दुर्घटना और भयावह हो गई।

दुर्घटनास्थल पर पहुंची रेल मंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि रेल पटरी पर विस्फोट करने की वजह से ट्रेन की बोगियां पटरी से उतरी हैं। बाद में सूत्रों के हवाले से यह खबर आई कि फिशप्लेट से छेड़छाड़ की गई थी और इस वजह से दुर्घटना हुई। इस दुर्घटना के बाद पत्रकारों से बातचीत में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुध्ददेव भट्टाचार्य ने कहा कि नक्सली हर ओर से आ रहे हैं।

पीसीपीए ने ली जिम्मेदारी

माओवादियों से समर्थन प्राप्त पीपुल्स कमेटी अगेन्स्ट पुलिस एट्रोसिटी (पीसीपीए) ने ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस ने इस हमले की की जिम्मेदारी ली है। पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एस करपुरकायस्थ ने कहा, 'रेलवे ट्रैक के नजदीक पीसीपीए ने दो पोस्टर छोड़े हैं जिनमें ट्रेन के पटरी से उतरने की स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी ली गई है।'

इन पोस्टरों में लिखा है, 'हमने पहले मांग की थी कि जंगलमहल से संयुक्त सुरक्षा बलों को वापस बुलाया जाए और माकपा के अत्याचारों को खत्म किया जाए लेकिन इन मांगों को पूरा नहीं किया गया।'

एक अन्य पोस्टर में मांग की गई है कि संयुक्त सुरक्षा बलों को इस इलाके से फौरन वापस बुलाया जाना चाहिए। पिछले साल अक्टूबर में पीसीपीए ने दुर्घटनास्थल के नजदीक ही चार घंटे तक नई दिल्ली-भुवनेश्वर एक्सप्रेस को रोके रखा था।

आर्थिक मदद की घोषणा

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इस दुर्घटना में मारे जाने वालों के परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा और आश्रितों में से एक को रेलवे में नौकरी देने की घोषणा की है। वहीं उन्होंने घायलों को एक लाख रुपये देने की घोषणा की है। वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मृतकों के परिवार को दो लाख रुपये और घायलों को 50,00 रुपये की मदद की घोषणा की है।

बढ़ गई वारदात

रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस कैलेंडर साल में रेलवे पर नक्सलियों ने 32 हमले किए हैं। इसमें से 20 मौके ऐसे रहे हैं जब पटरियों से छेड़छाड़ की गई। पिछले साल नक्सलियों ने रेलवे पर 58 हमले किए थे। वहीं 2008 में यह संख्या 30 थी। इसमें से 19 मौके ऐसे थे जब नक्सलियों ने पटरियों पर विस्फोट किया था।

विस्फोट की संभावना

अभी इस दुर्घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है। पर इस दुर्घटना में विस्फोटक के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 'ट्रेन के ड्राइवर ने एक धमाका सुना था। इसलिए हम इसकी पड़ताल कर रहे हैं। हमें पता है कि नक्सलियों की पहुंच खतरनाक विस्फोटकों तक है।'

जिम्मेदारी से ना

पिछले महीने ममता बनर्जी ने कहा था कि रेलवे पर बढ़ रहे नक्सली हमले से रेलवे के राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा था, 'नक्सलियों के बंद और अवरोधों की वजह से 500 करोड़ रुपये का नुकसान हमें हो चुका है। इससे माल ढुलाई और यात्रियों की आवाजाही पर नकारात्मक असर पड़ता है।'

हालांकि, ममता इस दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने से कतरा रही हैं। उन्होंने कहा, 'कानून एवं व्यवस्था राज्य का विषय है। राज्य सरकार और गृह मंत्रालय को इस पर ध्यान देना चाहिए।'

थम सकता है रात्रि परिचालन

इस हमले के मद्देनजर रेलवे नक्सल प्रभावित राज्यों में रात में ट्रेनों का परिचालन रोकने पर विचार कर रहा है। रेलवे बोर्ड के सदस्य विवेक सहाय ने कहा, 'हम उड़ीसा, बिहार, बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में रात के समय के दौरान परिचालन को स्थगित करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

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