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यूरोप ने किया पूरी दुनिया को परेशान
ग्रीस की समस्या ने आज की तारीख में पूरी दुनिया को परेशान कर रखा है। जरूरत है इस पर जल्द काबू पाने की, नहीं तो इस महामारी को दुनिया भर में फैलते देर नहीं लगेगी। बता रहे हैं
आकाश प्रकाश /  May 29, 2010

आजकल बाजार का रुख काफी उतार-चढ़ाव से भरा हुआ है। वजह है, यूरोप, खास तौर पर ग्रीस और पश्चिमी देशों  को लेकर मौजूद आशंकाएं।

यूरोपीय देशों के नेताओं की ईमानदार कोशिशों के बावजूद बाजार शांत होने को तैयार नहीं है। जर्मनी के अपने सीडीएस बॉन्ड और 10 अहम वित्तीय संस्थानों के शेयरों के कारोबार पर सीमित रोक लगाए जाने से बाजार को पसीना आ गया था।

इन कदमों से बाजार का परेशान होना लाजिमी ही था क्योंकि इससे यूरोप में एकजुटता की कमी फिर से सबके सामने आ गई। साथ ही, इस कदम ने निवेशकों को ऐसे बुरे लोगों के रूप में पेश किया, जो अर्थव्यवस्था के लिए मुसीबत पैदा करते हैं। नेताओं ने असल समस्या पर ध्यान दिए बगैर निवेशकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

बाजार और नेताओं के बीच चल रही इस लड़ाई पर बयानबाजी करने से इसका हल नहीं निकलेगा। साथ ही, निवेशकों को डर है कि जर्मनी के इस कदम की नकल दूसरे यूरोपीय देश भी कर सकते हैं। दरअसल, बाजार ग्रीस संकट से निपटने के लिए सुझाए गए तरीके पर अपनी मुहर लगाने के लिए तैयार नहीं है। इसी वजह से सारी समस्या पैदा हो रही है।

यह हकीकत है कि ग्रीस को 2.5 साल की मोहलत की वजह से इस देश को अगले कम से कम 30 महीनों तक पैसों के लिए किसी के सामने गिड़गिड़ाना नहीं पड़ेगा। लेकिन बाजार इस योजना से संतुष्ट नहीं है। बिकवालों की मानें तो 30 महीनों की इस राहत अवधि के गुजरने के बाद भी ग्रीस का लोक ऋण और जीडीपी अनुपात 150 फीसदी का होगा।

ऐसे में यह अर्थव्यवस्था कैसे स्थिर रह पाएगी? बाजार जब आज ही कर्ज मुहैया करने के लिए तैयार नहीं है, तो वह 30 महीने के बाद इसके लिए क्यों तैयार होगी? वह भी तब इस मुल्क पर कर्ज का इतना बड़ा बोझ होगा। ग्रीस की आर्थिक क्षमता के बारे में बाजार अब भी सवाल खड़े कर रहा है।

बिकवालों के मुताबिक इस राहत से फिलहाल के लिए तरलता का खतरा तो टल गया है, लेकिन लंबी अवधि का सवाल अब भी बरकरार है। अपनी आर्थिक क्षमता को बरकरार रखने के लिए ग्रीस को राजकोषीय नीति में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे। साथ ही, उसे एक अर्थव्यवस्था के तौर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी इजाफा करना पड़ेगा।

इन दोनों बातों के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति की जरूरत होगी और लोगों को भरोसे में लेना होगा। हालांकि, ग्रीस के मौजूदा हालात को देखते हुए इन दोनों बातों का होना असंभव सी बात लगती है। सवाल यह है कि आप स्थानीय आबादी पर अचानक इतना बड़ा बोझ कैसे डाल सकते हैं? क्या स्थानीय राजनीति इतने बड़े बोझ को अकेले अपने कंधे पर डालने के तैयार हो जाएगी?

बिकवाल ग्रीस में कर्ज की पुनर्संरचना की उम्मीद कर रहे है, जिसमें देनदारों को कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। अगर ग्रीस में पुनर्संरचना हुई तो पिग्स देश (पुर्तगाल, इटली, आयरलैंड, ग्रीस और स्पेन) भी आज नहीं तो कल इसी राह पर निकल सकते हैं।

ध्यान रहे कि आरबीएस ने कहा था कि ग्रीस, स्पेन और पुर्तगाल में विदेशी संस्थानों ने दो लाख करोड़ यूरो के कर्ज बांटे हैं। कर्ज पुनर्संरचना, कर्ज न चुका पाने की महामारी के फैलने की आशंका और इसके असर ने इसकी लीमन घटना के साथ तुलना करने के लिए लोगों को मजबूर कर दिया है।

ग्रीस एक छोटी सी अर्थव्यवस्था है। इसकी यूरोपीय संघ के कुल जीडीपी में सिर्फ 2 फीसदी की हिस्सेदारी है। फिर भी यूरोपीय देशों (खास तौर फ्रांस और जर्मनी) के बैंकों का यहां अरबों डॉलर का कर्ज फंसा हुआ है। इसमें पुनर्संरचना की वजह से इन बैंकों को बड़ी चपत लग सकती है, जिसका नतीजा उनकी बैंलेस शीटों में देखने को मिल सकता है। इससे बचने के लिए यूरोपीय संघ में शामिल देशों की सरकारों को अपने बैंकों की आर्थिक क्षमता में इजाफा करना पड़ेगा।

इसी से पैदा होता है, कर्ज न चुका पाने की महामारी के फैलने का डर। इस कारण से इसकी लीमन संकट के साथ तुलना और भी जरूरी हो जाती है। अगर बैंक को ग्रीस के बॉन्ड में तगड़ा घाटा पड़ा तो इससे सभी उन बैंकों की तलाश में जुट जाएंगे, जिन्होंने इसमें मोटा निवेश कर रखा है। इससे बैंकों के आपसी लेनदेन पर असर पड़ेगा क्योंकि कोई भी डूबते हुए जहाज की सवारी पसंद नहीं करता।

इससे तरलता पर असर होगा, जिसके बैंकों और उनके ग्राहकों की आर्थिक सेहत पर असर होगा। फिर वही होगा, जो हमें लीमन संकट के दौरान देखने को मिला था। बाजार फिर दूसरे पिग्स देशों की ओर अपने कदम बढ़ाएगा। इसीलिए भले ही ग्रीस की अर्थव्यवस्था का आकार छोटा हो, लेकिन उसकी समस्या, एक बड़ी समस्या है। इसके काफी बड़े नतीजे देखने को मिल सकते हैं।

शुरुआती संकेत के रूप में लाइबोर दरों में इजाफा देखने को मिल रहा है। साथ ही, कर्ज की अदलाबदली में भी काफी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। इसके अलावा, निवेश बाजार में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से बाजार में परेशानी का आलम है और इसी कारण से हर कोई जोखिम से दूर रहना चाहता है।

दरअसल, सिर्फ 18 महीने पहले ही विश्व ने मंदी का दौर झेला था और इस बार कोई अपनी तैयारी कसर नहीं रहने देना चाहता है। ग्रीस के सामने इस मुसीबत से निपटने का एक ही रास्ता है, जिस पर उसे कठोर कदमों से चलना होगा। उसे कड़े नियम बनाने होंगे। साथ ही, उसे अपने कर्ज की पुनर्संरचना नियमित तरीके से करनी होगी, जिसमें उसे बाहरी मदद भी लेनी पड़ सकती है।

एक बार बैंक इस पुनर्संरचना योजना पर अपनी मुहर लगा दें, तो ईयू को इनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। इसी से बैंकों के आपसी लेनदेन पर असर नहीं होगा। साथ ही, स्पेन, पुर्तगाल और दूसरे देशों को भी बाजार को भरोसे में लाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।

बाजार के मूल्यांकन को देखते हुए कोई भी आज पैसे लगाने के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन अगर हम इंतजार करें तो बेहतर होगा। हमें उस वक्त तक का इंतजार करना चाहिए, जब ग्रीस पुनर्संरचना के लिए तैयार हो जाए। साथ ही, इसके बाजार पर होने वाले नतीजे के लिए भी हमें इंतजार करना चाहिए। अगर ईयू के नीति-निर्धारक सही तरीके से कदम उठाते हैं, तो यह काफी अच्छा मौका होगा खरीदारी का।

हालांकि, वास्तविक अर्थव्यवस्था के मामले में इससे अब भी अछूता है, लेकिन खतरा विदेशी निवेश पर है। एक बार फिर से देसी बाजारों ने वैश्विक खतरे को देखते हुए फिसलना शुरू कर दिया। सिर्फ इसी महीने में देसी शेयरों में डॉलर के आधार पर 13 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

उम्मीद है कि हमारे नीति-निर्धारक ग्रीस की इस समस्या से समय रहते सबक लेंगे। वे समझेंगे कि बाजार गैर जिम्मेदाराना राजकोषीय नीति को ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं करेगा। सिर्फ बीते 10 दिनों में मैं ऐसे 3 प्रेजेंटेशन में शामिल हुआ हूं, जिसमें उभरते हुए बाजारों में कमजोर राजकोषीय नीति वाले देश और संवेदनशील बाजार के रूप में सिर्फ भारत का नाम लिया गया है।

निवेशक ज्यादा चिंतित नहीं हैं, लेकिन हमें आज की तारीख में मजबूत राजकोषीय स्थिति की जरूरत है। हम अपने घाटों का अंदरूनी स्रोतों से ही पूरा कर लेते हैं, इसीलिए हम पर वैश्विक बाजारों का ज्यादा असर नहीं होगा। लेकिन हमें अपनी राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की जरूरत है। तभी हमें विदेशों से निवेश मिलता रहेगा।

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