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स्टैंडर्ड चार्टर्ड की नजर टिकी है उभरते बाजारों पर
शरत चेल्लुरी /  May 25, 2010

स्टैंडर्ड चार्टर्ड (स्टैनचार्ट) का इंडियन डिपोजिटरी रिसीट (आईडीआर) ऑफर भारतीय पूंजी बाजारों के लिए पहला ऑफर होगा।

स्टैनचार्ट बड़े वैश्विक बैंकों में शुमार है। 5,000 से अधिक एटीएम और 1700 शाखाओं के नेटवर्क के साथ यह बैंक 71 देशों में परिचालन करता है। बैंक ने 100-115 रुपये की कीमत पर 24 करोड़ आईडीआर के जरिये 2,400-2,760 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।

एक आईडीआर स्टैनचार्ट के शेयर के 10 फीसदी के बराबर है। इसलिए 10 आईडीआर बैंक के एक शेयर के बराबर हैं। इस इश्यू के जरिये जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कंज्यूमर और होलसेल बिजनेस के विस्तार और बैंक की वैश्विक मौजूदगी बढ़ाने के लिए किया जाएगा। यह भी उम्मीद की जा रही है कि भारतीय एक्सचेंजों पर लिस्टिंग से भारत में इसकी दृश्यता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

उपयुक्त समय

विकसित बाजारों के विपरीत कम विकसित या उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्थाओं में तेज विकास इन क्षेत्रों में काम कर रही कंपनियों के लिए अच्छे अवसर मुहैया करा रहा है।

कुल वैश्विक कारोबार में स्टैनचार्ट को अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित बाजारों से महज 10 फीसदी हासिल होता है। इसका बाकी बिजनेस एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से आता है। 2009 में बैंक के मुनाफे में भारत का योगदान लगभग 20 फीसदी रहा।

एशिया से आने वाले 70 फीसदी बिजनेस के साथ बैंक न सिर्फ विकसित बाजारों में संकट से जूझने में सफल रहा है बल्कि उसने मुनाफे में वृद्धि भी दर्ज की है। 2007-08 के दौरान स्टैनचार्ट की परिचालन आय में औसतन 17 फीसदी तक का इजाफा हुआ, जबकि इसका शुद्ध लाभ 8 फीसदी बढ़ा था।

वर्ष 2009 के लिए हालांकि इसकी आय में वद्धि मजबूत थी और बैंक लागत से निपटने में सक्षम था, लेकिन स्टैनचार्ट को ज्यादा प्रावधान का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि इसका कर खर्च काफी बढ़ गया जिससे मुनाफे की रफ्तार थम गई थी।

विविधीकृत परिचालन

स्टैनचार्ट का परिचालन कंज्यूमर और होलसेल बैंकिंग में विभाजित है। कंज्यूमर बैंकिंग क्षेत्र में यह 1.4 करोड़ से अधिक ग्राहकों के लिए बैंकिंग, जमा संबंधित सेवाएं, क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, मॉर्गेज, ऑटो फाइनैंस और संपदा प्रबंधन जैसी सेवाएं मुहैया कराता है।

इन ग्राहकों में इंडीविजुअल एवं एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) शामिल हैं। हालांकि वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से 2008 में बैंक ने इस सेगमेंट में उधारी की रफ्तार धीमी कर दी थी। इसके बाद 2009 में उधारी में इजाफा कर दिया।

पिछले दो वर्षों में 7-8 फीसदी की उदार दर पर ऋण में तेजी आने के बाद 2010 में उधारी में तेज उछाल दर्ज होने की संभावना है। समान अवधि में होलसेल बैंकिंग 20 फीसदी बढ़ा है।  होलसेल बैंकिंग ग्राहक-केंद्रित बिजनेस है। यह कॉरपोरेट और संस्थागत ग्राहकों की जरूरतें पूरी करता है।

बैंक मजबूत सीमा-पार क्षमताओं से भी लैस है और अपनी व्यापक भौगोलिक उपस्थिति के परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवाह का लाभ उठाने में भी पूरी तरह सक्षम है। बैंक अपनी घरेलू मौजूदगी बढ़ाने के लिए कंपनियों के साथ काम कर रहा है।

कंज्यूमर बिजनेस में सीमित उधारी की वजह से कुल कारोबार में होलसेल बैंकिंग की हिस्सेदारी 2007 के 47 प्रतिशत से बढ़ कर 2009 में बढ़ कर 61 प्रतिशत हो गई। वित्तीय बाजारों और कॉरपोरेट फाइनैंस सेगमेंट की वजह से स्टैनचार्ट के होलसेल बैंकिंग बिजनेस का परिचालन लाभ पिछले दो वर्षों में 33 फीसदी बढ़ा है।

तर्कसंगत निवेश

स्टैनचार्ट की लगभग 53 फीसदी देनदारियां सस्ते डिपोजिट हैं जो भारत में इसके ज्यादातर निजी प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अधिक है और इससे भी बैंक को बढ़त मिली है। शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) के संदर्भ में अन्य कई बैंकों से पीछे बना हुआ है।

2008 में बैंक का एनआईएम 2.5 फीसदी था और 2009 में यह लगभग 2.3 फीसदी रह गया जो एचडीएफसी बैंक और ऐक्सिस बैंक की तुलना में कम है। उभरती अर्थव्यवस्था में सुधार के अच्छे संकेतों की वजह से मार्जिन में भी सुधार आ सकता है।

कुल मिला कर अगले दो वर्षों में बैंक की परिचालन आय और शुद्ध मुनाफे में क्रमश: लगभग 18-20 फीसदी और 12-15 फीसदी की दर पर वृद्धि देखी जा सकती है। 115 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर आईडीआर इश्यू को इसकी 2009 की आय के 15 गुना पर आंका गया है।

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