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फार्मा : मूल्यांकन की सवारी
दिशासूचक
आकाश जोशी और सुनयना वासुदेव /  May 25, 2010

पीरामल के फॉर्म्यूलेशन बिजनेस के लिए प्रीमियम मूल्यांकन ने एबट लैब्स को भारत में सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी बना दिया है।

लगता है कि भारतीय कंपनियों के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारी-भरकम रकम के भुगतान का चलन जोर पकड़ रहा है। एबट द्वारा चुकाई जाने वाली उद्यम कीमत (3.7 अरब डॉलर) अनुमानित रूप से 2011 की बिक्री का आठ गुना और ईबीआईटीडीए का 33 गुना होगी।

यह भारतीय कंपनियों के लिए उद्योग के औसत से लगभग दोगुना है। इससे पहले रैनबैक्सी ने भी प्रीमियम मूल्यांकन आकर्षित किया। दाइची सैंक्यो द्वारा इसकी बिक्री के 6.4 गुना का भुगतान किया गया। पीरामल हेल्थकेयर का मौजूदा मूल्यांकन पिछले कुछ वर्षों में किए गए ज्यादातर वैश्विक अधिग्रहणों की तुलना में अधिक है।

इससे उस उद्योग की कंपनियों का उत्साह बढ़ेगा जो अपने बिजनेस को मजबूत प्रीमियम मूल्यांकन पर बेचना चाहेंगी। ऐसी उम्मीदों को लेकर कुछ कारण भी मौजूद हैं, क्योंकि भारतीय और अन्य उभरते बाजार मजबूत बने रहने का दावा कर रहे हैं। बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स ने इस साल बेंचमार्क सेंसेक्स को मात दी है।

2010 की शुरुआत के बाद से ही यह इंडेक्स 5.16 फीसदी बढ़ा है जबकि सेंसेक्स में इस अवधि में 6 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है। विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय दवा बाजार अनुमानित रूप से लगभग 8 अरब डॉलर का है और 2025 तक यह बढ़ कर 20 अरब डॉलर से भी अधिक हो जाने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी जीडीपी वृद्धि की लगभग 1.6 गुना है।

अमेरिकी और यूरोपीय बाजार के महज दो फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है। इसलिए समान अवधि में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी दोगुनी होकर 50 फीसदी रहने की संभावना है। भारतीय कंपनियां आकर्षक लक्ष्य की ओर देख रही हैं। ये कंपनियां मजबूत उत्पादन संयंत्रों और सस्ती निर्माण इकाइयों की पहुंच से लैस हैं।

अच्छी घरेलू मांग के साथ साथ कई भारतीय कंपनियों की निर्यात भागीदारी काफी दमदार है। भारतीय कंपनियां जेनरिक ड्रग सेगमेंट पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित कर रही हैं, क्योंकि नए उत्पाद के लॉन्च के लिए लगभग एक अरब डॉलर की रकम खर्च किए जाने की जरूरत होती है और उन्हें उत्पाद के विफल रहने का जोखिम भी उठाना पड़ता है।

विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि चिंताओं के संदर्भ में मुद्रा में पांच फीसदी की वृद्धि प्रति शेयर आमदनी पर समान रूप से नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

गोदरेज उत्पाद : तीन पर तीन

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (जीसीपीएल) द्वारा हाल में अर्जेंटीना स्थित इश्यू ग्रुप का अधिग्रहण उसकी 'तीन पर तीन' रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी ने तीन महाद्वीपों एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका में अपनी तीन मुख्य श्रेणियों होम केयर, पर्सनल वॉश और हेयर केयर के जरिए मौजूदगी दर्ज करने योजना बनाई है।

इससे करीब एक पखवाड़ा पहले कंपनी ने अपने संयुक्त उद्यम गोदरेज सारा ली में शेष 51 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया, जिसके बाद यह अधिग्रहण किया गया है। कंपनी ने अफ्रीका में तूरा और इंडोनेशिया में मेगासारी को भी खरीदा है।

कारोबार के लिहाज से अर्जेंटीना में इश्यू ग्रुप की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत है जबकि मूल्य के लिहाज से हिस्सेदारी 11.4 प्रतिशत है और उसका वितरण नेटवर्क करीब 83 प्रतिशत हिस्से में फैला है। इससे जीसीपीएल को अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार में 20 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि 20 करोड़ डॉलर का अर्जेंटीना बाजार 22 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।

इतना ही नहीं इश्यू ग्रुप का परिचालन ब्राजील और उरुग्वे जैसे पड़ोसी देशों में भी है। दोनों कंपनियों के बीच समानता का पता इस तथ्य से चलता है कि दोनों ही कम मूल्य वाले हेयर कलर खंड पर ध्यान केंद्रित करते हैं। गोदरेज को उम्मीद है कि इस अधिग्रहण से उसे पाउडर आधारित हेयर डाई के लिए बाजार मिल सकेगा।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण साबुन खंड में उसकी बढ़ती बाजार हिस्सेदारी में ठहराव आने का अनुमान है। सौदे की रकम ईबीआईडीए (ब्याज, मूल्यह्रास और परिशोधन से पूर्व आय) की 8 गुनी है और उम्मीद है कि परिचालन के पहले साल में आय बढ़ने लगेगी।

इस सौदे पर बाजार की तात्कालिक चिंता हिस्सेदारी में कमी की संभावना को लेकर थी। उम्मीद है कि कंपनी इक्विटी के जरिए 700 करोड़ रुपये चुकाएगी। कंपनी के पास 300 करोड़ रुपये की नकदी है और वह इन अधिग्रहणों के वित्त पोषण के लिए कर्ज भी लेगी। विश्लेषकों का मानना है कि इश्यू अधिग्रहण की कीमत करीब 250 करोड़ रुपये है।

उम्मीद है कि कंपनी की इक्विटी में करीब 7 प्रतिशत की कमी आएगी। इसके साथ ही ऋण में वृद्धि होने से आय प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आय के अनुमान थोड़े कम रह सकते हैं और इसलिए थोड़ी गिरावट भी देखने को मिल सकती है।

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