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पीएम बोले मन 'मोहिनी' बोली
बीएस संवाददाता /  May 24, 2010

फिलहाल साउथ ब्लॉक में बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अभी अविजित रहकर अपनी पारी जारी रखना चाहते हैं।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के एक साल पूरा होने के बाद पहली बार आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री ने इस बात का ऐलान किया। जब उनसे पूछा गया कि छह साल प्रधानमंत्री रहने के बाद क्या वह संन्यास की तो नहीं सोच रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने जवाब दिया, 'मुझे जो काम सौंपा गया है वह अभी पूरा नहीं हुआ है और जब तक यह पूरा नहीं हो जाता तब तक संन्यास की बात सोचना ही बेमानी है।' बहरहाल कांग्रेस महासचिव और नेहरू गांधी परिवार के राजनीतिक वारिस राहुल गांधी को लेकर अपने बयान में जरूर प्रधानमंत्री संयत दिखे।

उनके कार्यकाल के बीच में प्रधानमंत्री पद पर राहुल की ताजपोशी को लेकर किए गए सवाल को प्रधानमंत्री ने जवाब नहीं दिया लेकिन इतना जरूर कहा कि राहुल कैबिनेट में आने की पूरी योग्यता रखते हैं और इस मामले पर वह उनसे मैंने कई बार बात भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा,'मुझे यह याद नहीं कि अंतिम बार इस मामले में मैंने उनसे कब बात की थी।'

पार्टी के साथ पीएम

राहुल गांधी के लिए गद्दी छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा,'कई बार मैं सोचता हूं कि युवा लोगों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। जब भी कांग्रेस पार्टी फैसला लेगी मैं किसी के लिए भी कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार हूं।' दरअसल राजधानी के सियासी गलियारों में इस तरह की चर्चा चलती रहती है कि जब 2012 में राष्ट्रपति की कुर्सी खाली होगी तो उत्तराधिकार की इस कवायद को अंजाम दिया जाएगा।

चर्चा इस बात को लेकर है कि तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति बनाकर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा। हालांकि प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि वह अपने काम को बीच में छोड़ना नहीं चाहेंगे। पूरी कांफ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री कई बार असहज दिखे, उन्होंने कई बार पानी पिया, कई वाक्य अधूरे छोड़े और न ही किसी मौके पर चुटकी लेने की कोशिश की।

हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि अगले साल पश्चिम बंगाल, केरल और असम में होने वाले चुनावों को लेकर वह कतई परेशान नहीं हैं क्योंकि इसमें अभी काफी वक्त है। प्रधानमंत्री कार्यालय और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच कुछ मसलों पर विवाद की बात को प्रधानमंत्री ने पूरी तरह से बेबुनियाद बताया।

उन्होंने कहा,'इस मामले में जरा भी सच्चाई नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष मेरी पार्टी की नेता हैं और मैं एक कांग्रेसी हूं। मेरे और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच किसी मसले पर भी मतभेद नहीं हैं।' उन्होंने राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के गठन के फैसले को भी सही ठहराया।

अपनी पार्टी के मंत्रियों और सहयोगी पार्टियों के मंत्रियों के बचाव में भी प्रधानमंत्री ने अलग-अगल रवैया अख्तियार किया। चीन में गृह मंत्रालय की चीन नीति को लेकर सरकार पर कटाक्ष करने वाले पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश और सीमित शक्ति का रोना रोने वाले गृह मंत्री पी चिदंबरम का प्रधानमंत्री ने अच्छे तरीके से बचाव किया।

वहीं द्रमुक के कोटे से मंत्री बने ए राजा और तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी इस मामले में उतने भाग्यशाली साबित नहीं हुए। उनको कड़ा संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मतभेद की बात को सार्वजनिक तौर पर उठाना 'ठीक नहीं' है। बनर्जी के कैबिनेट बैठकों से गायब रहने के मसले पर उन्होंने कहा,'कैबिनेट की बैठक हर हफ्ते होती है। मंत्रियों के पास अपनी बात रखने के कई मौके होते हैं।'

प्रधानमंत्री ने वामपंथी दलों को लुभाने के लिए कहा कि समान विचारों और विकास में विश्वास रखने वाले दलों को हमारे साथ मिलकर काम करना चाहिए। इस तरह से उन्होंने खुलेआम वामपंथी दलों को न्यौता दे दिया। दरअसल कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के रवैये से खुश नहीं है। ऐसे में ममता से मोहभंग की स्थिति में सरकार को वामपंथी दलों के सहारे की दरकार पड़ सकती है।

प्रधानमंत्री ने सीबीआई के गलत इस्तेमाल के आरोप को भी निराधार बताया। उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार का समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों से कोई गुप्त समझौता नहीं है।

जब उनसे यह पूछा गया कि उनके जीवन में अहमियत रखने वाली दो महिलाओं सोनिया गांधी और उनकी पत्नी गुरशरण कौर में उन पर किसका प्रभाव ज्यादा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इन दोनों की सलाह पर काम करते हैं और खुद को भाग्यशाली समझते हैं लेकिन दोनों महिलाएं 'अलग-अलग' मसलों पर राय देती हैं।

प्रधानमंत्री के श्रीमुख से

भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार आगे बढ़ चुका है। राष्ट्रीय हितों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों को असैन्य परमाणु क्षतिपूर्ति विधेयक को समर्थन देना चाहिए। 
भारत एक लोकतांत्रिक देश है। इस लिहाज से हर किसी को अपनी राय जताने का अधिकार है। जब तक कोई हिंसा का इस्तेमाल नहीं करता उस पर रोक नहीं लगाई जा सकती ।
मैं विकास का जायजा लेने के लिए कश्मीर जा रहा हूं। विकास की रफ्तार तेज करने के लिए राज्य सरकार से बात भी करूंगा। हमारी सरकार पाकिस्तान से बातचीत के लिए भी तैयार है।  
देश का प्रधानमंत्री होने के नाते मैं संसद और जनता के प्रति जवाबदेह हूं। दंतेवाड़ा या कहीं और जो भी दुखद घटनाएं घटी हैं, उसका मुझे दुख है। कुछ मसले हैं जिनको हल किया जाना है।

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