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म्युचुअल फंड : प्रतिफल के अलावा भी रखें कुछ बातों का ध्यान
निवेश : पोर्टफोलियो में शेयरों की संख्या, परिसंपत्ति के आकार और दूसरे फंडों और बेंचमार्क से तुलना भी बेहतर फंड के चयन में मदद कर सकती हैं
आशीष पई /  May 24, 2010

जब कोई म्युचुअल फंड किसी इक्विटी योजना को लेकर ज्यादा प्रतिफल का प्रचार करता है, तो निवेशक उस ओर खींचे चले जाते हैं।

वास्तविक प्रतिफल निराशाजनक होने पर निवेशक या तो अपना भाग्य बदलने की उम्मीद में योजना के साथ बने रहते हैं या वहां से निकल फिर से अपने जोड़-घटाव के हिसाब से किसी उच्च स्तर की योजना में निवेश करते हैं। सवाल यह है कि क्या किसी म्युचुअल फंड योजना का चुनाव करने के लिए प्रतिफल एकमात्र और सबसे महत्त्वपूर्ण शर्त है?

प्रतिफल सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है, लेकिन आप बाकी चीजों को भी नहीं छोड़ सकते हैं। सबसे पहले प्रतिफल के तर्क को समझना होगा। एक इक्विटी ग्रोथ स्कीम का उदाहरण लेते हैं। आसानी से समझने के लिए मान लिया कि एनएवी इस तरह से है-

प्रतिफल

हमारे पास अलग-अलग समय के लिए अलग-अलग सुनिश्चित प्रतिफल हैं। शुरुआत से अब तक सालाना औसत प्रतिफल 16 फीसदी है। पहले छह महीने का प्रतिफल 20 फीसदी है, वहीं पहले एक साल का प्रतिफल महज 10 फीसदी है।

अगर 30 जून 2008 से 30 जून 2009 के बीच प्रतिफल का हिसाब लगाया जाए, तो यह शून्य है। इससे स्पष्ट होता है कि किसी म्युचुअल फंड का चुनाव करने के लिए प्रतिफल एकमात्र पर्याप्त साधन नहीं हैं। विभिन्न समयावधियों में मिले प्रतिफल का इस्तेमाल कर फंड आपको गुमराह कर सकता है।

मूल्यांकन अवधि

जोखिम से तालमेल बिठाते हुए प्रतिफल आशाओं को पूरा करने के लिए हरेक योजना का अपना निवेश लक्ष्य और निश्चित समयावधि होती है। एक इक्विटी फंड का मूल्यांकन मध्यम से लंबी अवधि में उसके प्रदर्शन के हिसाब से करना चाहिए। इसके अलावा भी कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

निवेश उद्देश्य

प्रत्येक फंड का अपना निवेश लक्ष्य होता है जो फंड के उद्देश्यों में पहले से तय होता है। किसी निवेशक को ऐसे फंड का चुनाव करना होता है जो उसकी निवेश जरूरतों से मेल खाता हो और फिर उसी हिसाब से निवेश करना होता है। मसलन, कुछ फंड सूचकांक से बेहतर प्रतिफल देने के लिए मिड-कैप शेयरों में निवेश करते हैं। कुछ सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के शेयरों में निवेश करते हैं।

पोर्टफोलियो

अगर आप योजना के पोर्टफोलियो पर नजर डालते हैं, तो आपको फंड की निवेश प्रक्रिया का साफ अंदाजा हो जाता है। जैसे डायवर्सीफाइड इक्विटी फंडों को लीजिए। इस श्रेणी में अच्छा प्रदर्शन करने वाली फंड योजनाओं के पोर्टफोलियो से साफ जाहिर हो जाता है कि उनके पास सिर्फ शीर्ष के शेयर हैं, वहीं दूसरों के निवेश का बड़ा हिस्सा मिड-कैप कंपनियों में जाता है।

चढ़ते बाजार में मिड-कैप में ज्यादा निवेश वाली योजना दूसरों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन जब बाजार की स्थिति ठीक नहीं हो, तो मिड-कैप भारी नुकसान भी दे सकते हैं। लिहाजा सुनिश्चित कर लें कि आपके लक्ष्य फंड की निवेश रणनीति से मेल खाते हैं। जोखिम और प्रतिफल के आधार पर पोर्टफोलियो का निर्माण किया जाता है। साथ ही पोर्टफोलियो की नकदी जरूरतें भी योजना के उद्देश्यों के हिसाब से होती हैं।

परिसंपत्ति का आकार

सहारा म्युचुअल फंड, टॉरस म्युचुअल फंड और आईएनजी म्युचुअल फंड आदि प्रदर्शन के हिसाब से भले ही प्रथम 5 या 10 फंडों में हो सकते हैं। हालांकि, उनकी परिसंपत्ति काफी कम है।

जैसे सहारा पावर ऐंड नैचुरल रिसोर्सेज फंड की परिसंपत्ति महज 6 करोड़ रुपये है। इसी तरह टॉरस इन्फ्रा फंड की पूंजी 28 करोड़ रुपये और आईएनजी कॉन्ट्रा फंड की पूंजी 16 करोड़ रुपये है। आमतौर पर कम परिसंपत्ति वाली योजनाओं में ज्यादा उतार-चढ़ाव और विचलन दिखता है। निवेशकों को ठीक-ठाक परिसंपत्ति आकार वाली योजनाओं को तरजीह देनी चाहिए।

बेंचमार्क प्रदर्शन

यह जरूरी है कि फंड के प्रतिफल की तुलना विभिन्न समयावधियों में बेंचमार्क के प्रतिफल से की जाए। आमतौर पर एसऐंडपी सीएसएक्स निफ्टी, बीएसई सेंसेक्स, बीएसई 100 और बीएसई 500 आदि बेंचमार्क होते हैं। एक अच्छे फंड की निशानी साल दर साल बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन दिखाने की उसकी क्षमता है।

एक सक्रिय निवेश रणनीति का उद्देश्य बेंचमार्क से ज्यादा प्रतिफल देना होता है और इस अतिरिक्त प्रतिफल को 'अल्फा' कहते हैं। निवेशकों को निवेश से पहले विभिन्न समयावधियों में मिल रहे प्रतिफल में नियमितता भी देखनी चाहिए।

व्यवसाय चलन

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फंड घराने किस तरह से अपना व्यवसाय चलाते हैं। उनके परिचालन में कितनी पारदर्शिता है? अगर फंड घरानें ऊंचे नैतिक मापदंड और अच्छा कार्पोरेट गवनर्ेंस नहीं रखते हैं, तो सबसे अच्छे प्रदर्शन को भी बुरा सपना बनने में देर नहीं लगती है।

जेएम म्युचुअल फंड के हाई फाई फंड, स्मॉल ऐंड मिड-कैप फंड ऐसे ही उदाहरण हैं। एक फंड बहुत ज्याद जोखिम उठा सकता है और अतुलनीय मुनाफा कमा सकता है। मगर स्थितियां पलटने पर भारी नुकसान भी हो सकता है। इस स्थिति में आप जानते हैं कि आप निवेश कर बड़ा जाखिम ले रहे हैं। लेकिन फंड की रणनीति में अचानक आए बदलाव के चलते आपका नुकसान होना ज्यादा दुखद है।

दूसरे फंडों से तुलना

निवेश सलाह समूहों के पास इस तरीके का तुलनात्मक अध्ययन मौजूद होता है। दूसरे फंड घरानों के मुकाबले किसी फंड का प्रदर्शन कैसा रहा है, इसकी जानकारी इस तुलना से मितली है। साथ फंडों से तुलना किसी फंड प्रबंधक की कुशलता के आकलन के लिए जरूरी होता है। इससे पता चलता है कि कोई प्रबंधक किस हद तक दूसरे फंडों को पछाड़ने में सफल हुआ है।

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