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वितरकों की आपसी लड़ाई में मारा गया 'ट्रेल कमीशन'
जयदीप घोष / मुंबई May 18, 2010

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) ने वितरकों को उन ग्राहकों पर ट्रेल कमीशन देना बंद कर दिया है जिन्होंने अपना अकाउंट एक वितरक से दूसरे वितरक के पास हस्तांतरित किया है। एसोसिएशन ने पिछले सप्ताह इस आशय का परिपत्र जारी किया।

एसोसिएशन के मुख्य कार्याधिकारी एच एन साइनोर ने बताया, 'इस मामले में विचार विमर्श करने और इसकी खूबियों व खामियों पर विचार करने के बाद बोर्ड ने यह फैसला किया है कि किसी भी वितरक को कमीशन नहीं दिया जाना चाहिए।'

यह परिपत्र इस मायने में महत्त्वपूर्ण है क्योंकि 1 अगस्त से एंट्री लोड यानी प्रवेश प्रभार पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पिछले कुछ महीने से ग्राहकों को जोड़ने की प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि कुछ बड़े वितरकों के एजेंट, छोटे खिलाड़ियों के ग्राहकों को लुभाने की कोशिश में लगे हुए हैं और उनके खाते के हस्तांतरण के लिए एक फॉर्म पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश कर रहे हैं।

परिपत्र में यह कहा गया है कि जब भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ग्राहकों को अनापत्ति प्रमाणपत्र के बगैर भी वितरक बदलने की मंजूरी दी, उसके बाद से वितरक को बदलने की गुजारिश में तेजी से इजाफा हुआ।

इसकी वजह ट्रेल कमीशन है। अगर कोई ग्राहक म्युचुअल फंड स्कीम से जुड़ा है तो परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) की ओर से तिमाही और मासिक आधार पर वितरकों को ट्रेल कमीशन का भुगतान किया जाता है। प्रवेश प्रभार पर प्रतिबंध लगने से वितरकों की उस आमदनी पर जबरदस्त असर पड़ा है जिसे वे ग्राहकों को किसी म्युचुअल फंड स्कीम दिलाने के एवज में पाते थे।

प्रवेश प्रभार 2.25 फीसदी या इक्विटी स्कीम के लिए उससे ज्यादा था। एक प्रमुख वितरक यह आसानी से स्वीकार करता है कि ग्राहकों को जोड़ने के लिए होड़ मची है और इस प्रतिस्पर्धा में कुछ को नए ग्राहक मिल रहे हैं या कुछ ग्राहकों को खो रहे हैं।  दरअसल कुछ ऐसे हालात हैं कि किसी छोटे ब्रोकर के मौजूदा ग्राहकों से संपर्क किया जाता है। उसके बाद उन ग्राहकों से यह कहा जाता है कि उन्हें बेहतर सुविधा नहीं मिल रही है।

मिसाल के तौर पर कई ग्राहकों को यह पता नहीं था कि प्रवेश प्रभार पर प्रतिबंध है और उन्होंने सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट (सिप) को जारी रखा। नतीजतन मौजूदा वितरक को हर महीने परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी से 2.25 फीसदी का प्रभार मिल रहा था। ऐसे ग्राहकों को प्रतिद्वंद्वी एजेंटों ने कहा कि अकाउंट हस्तांतरण से उन्हें हर महीने 2.25 फीसदी की बचत होगी।

 दूसरी ओर जो ग्राहक प्रवेश प्रभार का भुगतान नहीं कर रहे थे उन्हें बेहतर सेवाओं का ऑफर दिया गया। ग्राहकों द्वारा हस्ताक्षर किए हुए हस्तांतरण पत्र एएमसी को भेजा गया। इसके बदले एएमसी ने पुराने ग्राहकों को एक पत्र जारी किया और कहा कि ब्रोकर कोड में बदलाव किया गया है।

उद्योग के सूत्रों का कहना है कि ब्रोकर कोड में बदलाव की वजह जानने वाली कुछ फंड कंपनियों को हस्तांतरण पत्र भेजा गया जिसमें ग्राहक के हस्ताक्षर के साथ एक वजह दी गई जो मौजूदा वितरक से होने वाली असंतुष्टि से जुड़ी हुई थी। हालांकि कई छोटे खिलाड़ियों ने इस तरह के हालात बनने पर एएमसी से संपर्क करना शुरू कर दिया।

उन्होंने यह शिकायत करनी शुरू की कि साल के ज्यादातर दिनों तक ग्राहक उनसे जुड़े हुए थे और ट्रेल कमीशन का भुगतान किसी और को किया जा रहा है। इस गंभीर समस्या पर विचार करने के बाद एएमसी ने हल निकालने के लिए एसोसिएशन से संपर्क किया। जो परिपत्र 7 मई को जारी किया गया था उसमें यह निर्देश दिया गया कि म्युचुअल फंड कंपनी को पुराने या नए वितरक किसी को भी ट्रेल कमीशन का भुगतान करने की जरूरत नहीं है।

इसके बदले रकम को एक अलग खाते में रखा जाना चाहिए और इसका इस्तेमाल निवेशकों की शिक्षा के लिए किया जाना चाहिए। एक बड़े म्युचुअल फंड वितरक बजाज कैपिटल के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राजीव दीप बजाज का कहना है, 'पुराने और नए वितरक, किसी को भी ट्रेल कमीशन का भुगतान नहीं किया जाता है तो निवेशकों को कैसे फायदा मिलेगा? उन्हें कुछ न कुछ जरूर मिलना चाहिए।' 

फंड कंपनियों का दावा है कि प्रवेश प्रभार न होने की वजह से नए ग्राहकों को जोडने की कवायद को लेकर वितरकों की दिलचस्पी में कमी आई है। ट्रेल कमीशन को लेकर जो भी हालात बन रहे हैं इससे समस्या जटिल होगी।

Keyword: AMFI, distributors, trail comission, H N Sinor, agent, sebi, AMCs,
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