बिजनेस स?टैंडर?ड - औद्योगिक सुधार से पूंजीगत सामान क्षेत्र हुआ गुलजार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, November 27, 2022 08:23 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश?लेषण खबर

औद्योगिक सुधार से पूंजीगत सामान क्षेत्र हुआ गुलजार
मोटा निवेश : अमल में तेजी और बढ़ती मांग से इंजीनियरिंग कंपनियों का कायाकल्प होने की उम्मीद है। बता रहे हैं
जितेंद्र कुमार गुप्ता /  May 17, 2010

भारत के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में चालू वर्ष के पहले तीन महीनों के दौरान लगातार सुधार देखा गया है। यह दर औसतन 15 फीसदी है।

अहम बात यह है कि समान अवधि के लिए कैपिटल गुड्स इंडेक्स, जो संयंत्रों और औद्योगिक गतिविधियों में इस्तेमाल मशीनरी और अन्य भारी उपकरणों की मांग दर्शाता है, 42 फीसदी के औसत से बढ़ा है। तो 2009 में बुरे वक्त का सामना कर चुके देश के कैपिटल गुड्स निर्माताओं के लिए इसके क्या मायने हैं?

विलंबकारी प्रभाव

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं, 'आम तौर पर अगर कैपिटल गुड्स इंडेक्स मजबूत वृद्धि दिखाता है तो इससे अन्य उद्योगों के विकास को भी बढ़ावा मिलता है। साथ ही, निजी पूंजीगत खर्च में व्यापक सुधार की संभावना बनेगी हालांकि इसमें 3-4 महीने का और वक्त लग सकता है।'

पिछले साल मार्च 2009 की तिमाही के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि गिर कर 5.8 फीसदी रही जबकि मार्च 2008 की तिमाही में यह 8.6 फीसदी थी। यह भी एक वजह थी कि भारत की आईआईपी (इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन) वृद्धि वर्ष 2008-09 की पहली छमाही के लिए महज 1-2 फीसदी पर बनी रही।

हालांकि अब अर्थव्यवस्था में सुधार आया है और कुछ खास उद्योगों एवं क्षेत्रों में निजी औद्योगिक पूंजीगत खर्च भी बढ़ना शुरू हो गया है और अब यह गति बरकरार रहने की संभावना है।

सुंदरम बीएनपी परिबा म्युचुअल फंड के कैपेक्स अपॉर्चुनिटीज फंड के श्रीविद्या राजेश कहते हैं, 'औद्योगिक आंकड़ों में वृद्धि उत्साहजनक है। हालांकि औद्योगिक पूंजीगत खर्च में बाद में व्यापक रिकवरी अबी नहीं दिखी है। औद्योगिक सेगमेंट में कई कंपनियां विस्तार का इंतजार कर रही हैं, क्योंकि मांग अभी स्थिर नहीं हुई है। यह क्षमता विस्तार अगली दो-तीन तिमाहियों के दौरान ही संभव हो पाएगा।'

बहाली के संकेत

विश्लेषक मान रहे हैं कि कैपिटल गुड्स क्षेत्र में रिकवरी आ रही है। मैक्वेरी रिसर्च में इंजीनियरिंग क्षेत्र पर नजर रखने वाले इंदरजीतसिंह भाटिया ने एक ताजा नोट में लिखा है, 'हमने इस क्षेत्र की चार कंपनियों - अरेवा टीएंडडी, थर्मेक्स, क्रॉम्पटन ग्रीव्स और हैवेल्स- से बातचीत की और इन सभी कंपनियों ने पुष्टि की कि मौजूदा परियोजनाओं के निष्पादन में तेजी आई है, क्योंकि ग्राहकों ने परियोजनाओं में तेजी लाने को कहा है।'

प्रमुख इंजीनियरिंग कंपनियों की निष्पादन दर दिसंबर, 2009 की तिमाही में घट कर लगभग 5-6 फीसदी रह गई थी। लेकिन मार्च, 2010 की तिमाही में यह सुधर कर 20 फीसदी रहने की उम्मीद है।

प्रमुख रूप से क्रॉम्पटन ग्रीव्स, एलएंडटी, सीमेंस, एबीबी और थर्मेक्स जैसी कंपनियों के औद्योगिक आर्डर में पिछले 3-4 महीनों में वृद्धि हुई है और दृश्यता और अपेक्षाकृत कम कमोडिटी कीमतों की वजह से ये कंपनियां अब बेहतर स्थिति में हैं। भाटिया ने कहा कि कंपनियों ने पुष्टि की है कि ऑर्डरों का प्रवाह पिछले तीन महीनों में काफी बढ़ा है और 2010-11 में यह गति बरकरार रहने की संभावना है।

बड़ी कंपनियों के लिए अवसर

इस सुधरते माहौल की पृष्ठभूमि में जो कंपनियां मुनाफे की मलाई काट रही हैं, उनमें एलएंडटी भी प्रमुख रूप से शामिल है, क्योंकि बेहतर मार्जिन की अपेक्षा के साथ इसकी ऑर्डर बुक और निष्पादन दर में सुधार देखा जा रहा है।

औद्योगिक सेगमेंट की जरूरतें पूरी करने वाली थर्मेक्स भी विश्लेषकों की पसंदीदा कंपनी बनी हुई है। कंपनी को उच्च क्षमता वाले बिजली उपकरणों के निर्माण क्षेत्र में प्रवेश करने का लाभ मिलेगा। अधिक औद्योगिक पूंजी खर्च क्रॉम्पटन ग्रीव्स के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

कंपनी गहन प्रतिस्पर्धा के बावजूद बिजली क्षेत्र में टीएंडडी उपकरणों में अपने दबदबे की वजह से पहले ही कापी हद तक लाभान्वित हो चुकी है। हालांकि क्रॉम्पटन ग्रीव्स की एकमात्र चिंता यूरोपीय बाजारों के लिए उसके भारी-भरकम निवेश को लेकर है जहां अल्पाविध से लेकर मध्यावधि में इसके विकास की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।

ज्यादातर विश्लेषक कमजोर निष्पादन, अत्यधिक खर्च, कम ऑर्डर प्रवाह और परिचालन मुनाफा मार्जिन में गिरावट की वजह से एबीबी को लेकर भी चिंतित बने हुए हैं। इसके अलावा मौजूदा मूल्यांकन और भविष्य के आय अनुमानों को देखते हुए एबीबी का शेयर महंगा है।

भारत की सबसे बड़ी विद्युत उपकरण निर्माता बीएचईएल के लिए हालांकि राजस्व संभावना अच्छी है, लेकिन कंपनी को बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वजह से चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है जिसका नकारात्मक असर इसके शेयर पर देखा जा सकता है।

दूसरी तरफ विश्लेषक वोल्टास और ब्लू स्टार को खरीदने की सलाह दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक सेगमेंट में भारी भरकम निवेश की वजह से इन कंपनियों को लाभ मिलेगा।

Keyword: IIP, reforms, capital goods index, plants, machinery, care ratings, madan sabanvis,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या नियमों में संशोधन से बीमा क्षेत्र में बढ़ेगा निवेश
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.