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सुधार और सावधानी
संपादकीय /  May 13, 2010

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) अभी भी बढ़त के क्रम में है। मार्च 2010 के दौरान सूचकांक में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 13.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

हालांकि वित्त बाजार के अर्थशास्त्रियों के अनुमानों के मुकाबले यह आंकड़ा थोड़ा ही कम है, लेकिन आठ महीने पहले शुरू हुए औद्योगिक सुधार के स्थायित्व को लेकर कुछ-एक सवालों की गुंजाइश तो बनती ही है। इससे पहले अर्थशास्त्रियों ने मार्च 2010 के दौरान करीब 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद जताई थी।

इसके साथ ही 2009-10 की अंतिम तिमाही के दौरान 15.1 प्रतिशत की जोरदार विकास दर दर्ज की गई है और पूरे वित्त वर्ष के लिए यह आंकड़ा 10.4 प्रतिशत रहा है। उद्योगों की ऐसी विकास दर के साथ वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 7.5 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है। यह 7.2 प्रतिशत के अग्रिम अनुमानों के मुकाबले थोड़ा अधिक है।

मार्च में औद्योगिक विकास का आधार काफी व्यापक रहा है और लगभग सभी घटकों- बुनियादी वस्तुओं, मध्यवर्ती वस्तुओं, पूंजीगत वस्तुओं और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में तेजी देखने को मिली है। हालांकि इस दौरान उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तु खंड में सुस्ती देखने को मिली और वह केवल 3.3 प्रतिशत की वृद्धि ही दर्ज कर सका।

इसके ठीक विपरीत उपभोक्ता वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं ने औसत को पीछे छोड़ते हुए क्रमश: 27 प्रतिशत और 32 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की। मार्च के आंकड़ों के आधार पर अगर वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान विकास की तस्वीर खींची जाए तो पता चलता है कि पूंजीगत वस्तुओं और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के हाथ में विकास की कमान है जबकि उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएं पिछड़ रही हैं।

अगर चालू वित्त वर्ष के विकास परिदृश्य के बारे में बात की जाए तो कुछ चेतावनी के संकेत मिलते हैं। अगर अन्य कारणों को छोड़ दिया जाए तो भी मौजूदा 'आधार प्रभाव' के कारण इस साल आईआईपी की विकास दर कम रहने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2009-11 की दूसरी छमाही के दौरान अपवाद स्वरूप उच्च विकास दर के कारण 2010-11 की समान अवधि के दौरान विकास दर में कमी आने का अनुमान है। ऐसे में मौजूदा वर्ष के अंत में अगर विकास के आंकड़े कमजोर रहते हैं तो इस पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

एक बार फिर पूंजीगत वस्तुओं में जोरदार उछाल के बावजूद कई संदेह हैं जो यह दावा करते हैं कि निवेश के माहौल में पूरी तरह से सुधार नहीं हुआ है। उनका दावा है कि पूंजीगत वस्तुओं में तेजी ट्रकों की बिक्री में बढ़ोतरी (ट्रक और बस परिवहन उपकरण के रूप में पूंजीगत वस्तुओं की श्रेणी में शामिल हैं) और लंबित ऑर्डर को पूरा करने के लिए मशीनरी निर्माण में बढ़ोतरी के कारण देखने को मिली है।

यह बढ़ोतरी बिजली और दूरसंचार क्षेत्र के कारण हुई है। ताजा ऑर्डर क्षमता विस्तार की इच्छा रखने वाली निजी क्षेत्र की कंपनियों से मिलेंगे, हालांकि इसकी उम्मीद कम ही लगती है। संक्षेप में कहें तो पूंजीगत वस्तुओं में तेजी का यह अर्थ नहीं है कि निवेश मांग में व्यापक रूप से बढ़ोतरी हो रही है।

निहितार्थ यह है कि औद्योगिक विकास के जोरदार आंकड़ों के बावजूद रिजर्व बैंक को नीतिगत दरों में बढ़ोतरी के बारे में कोई भी फैसला सावधानी के साथ उठाना चाहिए।

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