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क्या आप अपनी बीमा पॉलिसी सरेंडर करना चाहते हैं?
पर्सनल फाइनैंस
मनीश कुमार मिश्र /  May 11, 2010

कहीं आपको भी अभिकर्ता ने बीमा को निवेश का विकल्प बताते हुए, उसके ऊंचे प्रतिफल का लाभ दिखा कर बीमा पॉलिसी बेची थी? एकाध वर्ष में उसके प्रदर्शन को देखकर आप अब उसे सरेंडर करने की सोच रहे हैं?

आपका सोचना सही है। वास्तविकता यह है कि बीमा का कोई भी उत्पाद निवेश का उचित विकल्प साबित नहीं हो सकता है। अगर बीमा निवेश का ऐसा ही विकल्प होता तो आपके मन में इसे सरेंडर करने के विचार ही क्यों उठते भला।

सर्वप्रथम, एक बात प्रत्येक व्यक्ति को मान लेनी चाहिए कि बीमा के लिए एक कीमत चुकानी पड़ती है। यह खर्च कोई व्यक्ति कितना ज्यादा या कम उठाना चाहता है यह उनका व्यक्तिगत मामला होता है। आपने कभी बीमा कंपनियों का विज्ञापन या उनके उत्पाद की विवरणिका देखी है?

उस पर छोटे अक्षरों में ही सही लेकिन लिखा होता है कि बीमा आग्रह की विषय वस्तु है। इसका मतलब है कि बीमा बेची नहीं जाती है इसके लिए आग्रह किया जाता है। जीवन बीमा प्रत्येक ऐसे व्यक्ति के लिए जरूरी है जिसकी कोई आर्थिक जिम्मेदारी है। बीमा के लिए टर्म पॉलिसी का चुनाव करना एक बेहतर निर्णय है।

बीमा के लिए ग्राहक पटाने वाले अभिकर्ता या बीमा पॉलिसी लेने वाले ग्राहक भी विशुध्द बीमा पॉलिसी या टर्म पॉलिसी नहीं लेना चाहते हैं क्योंकि इसमें परिपक्वता पर कुछ हासिल नहीं होता है। लेकिन आश्रितों को सस्ते में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने वाला यह उत्पाद सर्वोत्तम है।

कम प्रतिफल

आर्क फाइनैंशियल प्लानर के प्रमाणित वित्तीय योजनाकार हेमंत बेनिवाल कहते हैं, 'परिपक्वता पर एकमुश्त राशि पाने की खातिर लोग मनीबैक या एंडोमेंट योजनाएं लेते हैं। शायद वे भूल जाते हैं कि वे जितनी राशि प्रीमियम के तौर पर दे रहे हैं उसमें से बीमा कवर के लिए टर्म पॉलिसी के प्रीमियम के लगभग बराबर कर राशि काट ली जाती है।

एडमिन्सट्रेटिव शुल्क अधिक होते हैं और कोष को सुरक्षित उपकरणों में निवेश किए जाने की वजह से ऐसे पॉलिसियों पर मिलने वाला प्रतिफल कम, 4-6 प्रतिशत, होता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति के लिए यह बेहतर होगा कि वह टर्म पॉलिसी ले और शेष राशि को, अगर जोखिम नहीं उठाना चाहता है तो, पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेशित करे जहां उसे 8 प्रतिशत सालाना का प्रतिफल मिलेगा।'

सरेंडर करने की वजह

अपनी भूल का एहसास होने पर लोग चाहते हैं कि ऐसे बीमा योजनाओं से बाहर हो जाएं। दुर्भाग्य यह है कि बीमा योजनाओं से बाहर होने के लिए आपको खासा घाटा उठाना पड़ता है। तो क्या इस घाटे के बावजूद पॉलिसी को सरेंडर करना उचित होगा? दिए गए प्रीमियम और भविष्य में दिए जाने वाले प्रीमियम के आधार पर तीन तरह की परिस्थितियां बन सकती हैं।

सरेंडर करने पर क्या मिलेगा?

कोई भी पॉलिसी तीन वर्ष बाद ही सरेंडर की जा सकती है। शर्त यह है कि आपने तीनों वर्षों में प्रीमियम दिया हो।

ऑप्टिमा इंश्योरेंस ब्रोकर्स के मुख्य कार्याधिकारी राहुल अग्रवाल कहते हैं, 'अगर आपने केवल एक या दो साल ही प्रीमियम दिया है तो पॉलिसी सरेंडर करने पर आपको कुछ नहीं मिलेगा। तीन वर्ष तक प्रीमियम अदा करने के बाद भी पॉलिसी सरेंडर करने पर आपको कुल दिए गए प्रीमियम का 25 से 70 प्रतिशत (यह प्रीमियम आवंटन शुल्क पर निर्भर करता है) प्राप्त होगा।'

यह गणना 20 वर्ष की अवधि वाली पॉलिसी के आधार पर की गई है। यह प्रतिशतता दिए गए प्रीमियम, विभिन्न शुल्क और पॉलिसी की अवधि के अनुसार बदलते हैं। दूसरे शब्दों में पॉलिसी की शुरुआती अवस्था में इसे सरेंडर करने पर आपको 0-70 प्रतिशत वापस मिलता है।

इसे सरेंडर करने के बाद प्राप्त राशि एवं भविष्य में दिए जाने वाले प्रीमियम को इस तरह निवेशित किए जाने की जरुरत है कि सालाना प्रतिफल लगभग 10 से 15 प्रतिशत का मिले। अगर आपको विश्वास है कि आप इससे बेहतर प्रतिफल प्राप्त कर सकते हैं तो पॉलिसी सरेंडर कर दीजिए।

मध्यावस्था : अगर आप पॉलिसी के मध्यावस्था में हैं तो आपके पास दो विकल्प होते हैं-

पॉलिसी को सरेंडर कर दिया जाए : बेनिवाल कहते हैं, 'मध्यावस्था में पॉलिसी सरेंडर करने पर आपको दिए गए प्रीमियम का 80 से 100 प्रतिशत मिल जाता है। प्राप्त राशि एवं भविष्य के प्रीमियम का कहीं और निवेश कर दीजिए।'

लेकिन क्षतिपूर्ति के लिए आपको वार्षिक 10 से 20 प्रतिशत का प्रतिफल पाने की जरुरत है। इसलिए निवेश के ऐसे ही विकल्प का चयन करें। बेनिवाल कहते हैं, 'इक्विटी विशाखित फंडों में निवेश करना सबसे बेहहतर विकल्प है।'

पॉलिसी को पेड अप कर दें : दूसरे विकल्प के तौर पर आप अपने पॉलिसी को पेड अप करवा सकते हैं। आपके पास दो विकल्प होते हैं- सम एश्योर्ड शून्य करवाते हुए फंड प्रबंधन की अनुमति देना और बीमा कवर बरकरार रखते हुए फंड प्रबंधन करवाना। उल्लेखनीय है कि बीमा कवर जारी रखने के मामले में मर्त्यता शुल्क कटना जारी रहेगा और इससे आपके फंड का मूल्य प्रभावित होगा।

अंतिम अवस्था : अग्रवाल कहते हैं कि अगर आपकी पॉलिसी 3 से 5 वर्षों में परिपक्व होने वाली है तो इसे जारी रखना ही सबसे बेहतर विकल्प है। 3 से 5 वर्ष का प्रीमियम बचाकर आप कुछ नहीं कर सकते हैं। ऐसी अवस्था में पॉलिसी सरेंडर करना बुध्दिमानी नहीं होगी।

Keyword: insurance policy, surrender, term policy, maturity, return,
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