बिजनेस स?टैंडर?ड - रेटिंग का सच
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रेटिंग का सच
साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  May 08, 2010

इस साल मार्च में स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स की तरफ से स्पेन को एए+ की रेटिंग मिली थी, वित्तीय प्रतिबध्दताओं को पूरा करने की दृष्टि से यह 'काफी मजबूत क्षमता' का संकेतक थी।

पुर्तगाल और इटली की रेटिंग ए+ थी (वित्तीय प्रतिबध्दताओं के लिए मजबूत क्षमता)। एक साल पहले यूनान भी वहीं था। दक्षिणी यूरोप के 'पिग्स' देशों (जैसा कि उन्हें संबोधित किया जाता है) की आज अलग कहानी है।

ग्रीस (यूनान) को तेजी से जंक बॉन्ड स्टेटस की तरफ धकेल दिया गया। अन्य तीन पिग्स देशों को भी निचला क्रम दिया गया है। हालांकि वे अभी भी निवेश की श्रेणी में है जो सट्टे की श्रेणी से बेहतर है। लेकिन चारों देशों में बेहतर रेटिंग वाले स्पेन में बेरोजगारी की दर 19 फीसदी है (यूरोप में सबसे ऊंची) और 11.5 फीसदी का राजकोषीय घाटा भी है।

इसके अलावा साल 2009 में इसकी अर्थव्यवस्था 4.9 फीसदी की दर से सिकुड़ी है। इनमें से अन्य देशों की भी स्थिति ऐसी ही है : उच्च बेरोजगारी, सिकुड़ता उत्पादन, बड़ा बजट घाटा, बड़ी सार्वजनिक देनदारी। कुल मिलाकर भारत के मुकाबले इसकी सॉवरिन रेटिंग बेहतर है, यह बीबीबी (-) है, जो इसे सिर्फ निवेश की श्रेणी में खड़ा करती है।

निश्चित तौर पर भारत का राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक ऋण ज्यादा है, लेकिन 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही अर्थव्यवस्था इनसे उन देशों के मुकाबले बेहतर तरीके से निपट सकती है जिनकी अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है।

पिग्स देशों के उलट एक ओर जहां भारत का चालू खाते का घाटा इसके पूंजी अंतर्प्रवाह की तुलना में ज्यादा है और विदेशी ऋण की तुलना में विदेशी मुद्रा भंडार ज्यादा है, वहीं सरकार का कुल कर्ज जीडीपी के 82 फीसदी से नीचे है जो चारों पिग्स देशों में से दो देशों से कम है (इटली और यूनान का कुल सरकारी कर्ज जीडीपी का 115 फीसदी है) और कुछ ऐसा ही पुर्तगाल के साथ भी है।

अब तक एस ऐंड पी का विचार है कि पिग्स देशों के मुकाबले भारत कम रेटिंग का हकदार है। साल 2009 की शुरुआत में चीन और यूनान क्यों एक ही श्रेणी की रेटिंग (ए) के दायरे में थे जबकि स्पेन की रेटिंग एएए+ थी। मार्च की तरह हाल तक भी एस ऐंड पी यूनान की बीबीबी+ रेटिंग की पुष्टि कर रहा था (कृपया यह जान लीजिए कि यह भारत के मुकाबले बेहतर था)।

यह कुछ हफ्ते बाद यूनान के जंक बॉन्ड स्टेटस को सिर्फ घटाने के लिए तब किया गया जब वह धराशायी होने के करीब था। इस बीच, सिर्फ चीन की रेटिंग ही ए+ है, हालांकि इसकी महत्त्वपूर्ण सांख्यिकी एएए अर्थव्यवस्था केऔसत के मुकाबले बेहतर है, चाहे यह आर्थिक विकास हो, चालू खाते का अधिशेष हो, राजकोषीय घाटा हो या ऋण-जीडीपी अनुपात हो।

न सिर्फ चीन बल्कि ब्रिक देशों का ऋण-जीडीपी अनुपात कई आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले औसतन कम है, साथ ही इनका राजकोषीय घाटा भी कम है। लेकिन क्या इनमें से कोई चीज रेटिंग में प्रतिबिंबित हुई? इसकेलिए कोई मौका नहीं था। रेटिंग महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय पूंजी की लागत को प्रभावित करती है, जो कि कोई देश हासिल करना चाहता है।

आम तौर पर बीबीबी रेटिंग वाले देश को पांच साल की रकम के लिए एएए रेटिंग वाले देश के मुकाबले 1 फीसदी ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है। यह खाई नाटकीय रूप से तब सिकुड़ जाती है जब आप ए रेटिंग वाले हैं न कि बीबीबी रेटिंग वाले, लेकिन ब्रिक समूह के तीन देश बीबीबी रेटिंग वाले हैं।

अगर रेटिंग सही होती तो डिफॉल्ट के खिलाफ बीमा में रिस्क प्रीमियम उन देशों के लिए ज्यादा होता जिनकी रेटिंग कम है। लेकिन पिग्स देशों के मुकाबले चीन का काफी कम प्रीमियम पर नियंत्रण है - जो रेटिंग को झूठा बनाता है। रेटिंग एजेंसी तर्क देती हैं कि उभरते हुए बाजारों में बड़े राजनीतिक खतरे हैं।

सही है, यह बात आप यूनान के लोगों  को बताइये जो एथेंस की गलियों में दंगा कर रहे हैं और त्रिशंकु संसद और कर्ज व घाटे को देखते हुए (जो पिग्स की छवि पेश करता है) ब्रिटेन को राहत (बेलआउट) के लिए आईएमएफ के पास जाना पड़ सकता है। ब्रिटेन की रेटिंग एएए की है।

ऐसे में क्या यह गलत मूल्य निर्धारण के खतरे का मामला है (जिसकी वजह से पश्चिमी वित्तीय संकट पैदा हुआ और इसके केंद्र में रेटिंग एजेंसियां थी) या उभरते हुए बाजारों के खिलाफ व्यवस्थित पक्षपात?

Keyword: S&P, spain, rating, portugal, italy, economy,
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