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कर्मचारियों को निवेश के गुर सिखा रही है सीआईएल
इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  May 06, 2010

देश के दूरदराज इलाकों में फैले कोल इंडिया के दफ्तरों और खनन स्थलों पर जल्दी ही एक असामान्य गतिविधि देखने को मिलेगी।

उन स्थानों पर अस्थायी शिविर लगाकर कंपनी के चार लाख कामगारों को शेयर बाजार में निवेश की खूबियों के बारे में बताया जाएगा। यह नवरत्न कंपनी कामगारों की शिक्षा की बाबत पहल करती रही है, लेकिन यह वास्तव में अलग तरह का मामला है।

इसका कारण यह है कि कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) इस साल जुलाई के आखिर में या अगस्त की शुरुआत में आने वाला है और अगर इसके कर्मचारी निवेश के इच्छुक होंगे तो सीआईएल उन्हें सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

सीआईएल यूटीआई टेक्नॉलजी के साथ गठजोड़ करने जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसके सभी कामगारों व अधिकारियों को परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) कार्ड जारी कर दिया गया है। इसके अलावा कंपनी डीमैट अकाउंट खोलने के लिए बैंकों से भी बातचीत कर रही है। शेयर बाजार में निवेश के लिए ये चीजें आवश्यक हैं।

हाल में आए सार्वजनिक कंपनियों के आईपीओ में खुदरा निवेशकों की कम भागीदारी को देखते हुए सीआईएल चाहती है कि डीमैट अकाउंट और पैन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए जल्दी से जल्दी काम शुरू कर दिया जाए।

सीआईएल के चेयरमैन पार्थ भट्टाचार्य कहते हैं, ' यह भारी भरकम काम है, कुछ उस तरह का जो कि हमने ऐसी अल्पावधि में कभी नहीं किया है, लेकिन इसके लायक समय है।' उन्होंने कहा, ' अगर हमारे आधे कर्मचारी भी आईपीओ में निवेश करते हैं तो यह दो लाख खुदरा निवेशकों की भागीदारी के बराबर होगा।'

यही वजह है कि आखिर भट्टाचार्य खुदरा मोर्चे पर आईपीओ की कामयाबी को लेकर उत्साहित क्यों हैं, जबकि सरकार ने कर्मचारी निवेशक को 10 फीसदी की छूट देने के उनके सुझाव को दरकिनार कर दिया है और सिर्फ 5 फीसदी छूट देने की बात कही है।

आईपीओ में सहायता करने वाले मर्चेंट बैंकर्स का कहना है कि सीआईएल इसकी कीमत इस तरह तय करेगी कि खुदरा निवेशकों के हाथ में कुछ आए जो कि कुछ अन्य पीएसयू ने नहीं किया। इस तरह लग रहा है कि शेयर की कीमत 190 रुपये होगी और उम्मीद है कि यह करीब 25 फीसदी प्रीमियम पर सूचीबध्द होगी।

अगर ऐसा हुआ तो इश्यू प्राइस पर 5 फीसदी की छूट पाने वाले कर्मचारियों को अल्पावधि में अपने निवेश पर ठीक-ठाक मुनाफा मिल जाएगा। इश्यू प्राइस पर भट्टाचार्य टिप्पणी नहीं करना चाहते क्योंकि इसे तय करने का अधिकार सरकार के पास है, लेकिन उनका कहना है कि सीआईएल के कर्मचारियों को निश्चित तौर पर पछतावा नहीं होगा, अगर वे अपनी कंपनी में निवेश करने का फैसला लेते हैं।

किसी भी मामले में, शैक्षिक गतिविधि चलाए जाने के बाद डीमैट व पैन कार्ड धारक हमारे कर्मचारी अगर आईपीओ में निवेश नहीं करते हैं तो भी कम से कम उन्हें शेयर बाजार के बारे में पर्याप्त जानकारी जरूर मिल जाएगी। चेयरमैन ने कहा, 'जब हम बाजार शिक्षा का अद्भुत कार्यक्रम समाप्त कर लेंगे तो उनमें से ज्यादातर लोगों को सेंसेक्स के बारे में समझ पैदा हो जाएगी।'

भट्टाचार्य कहते हैं कि ताजा कवायद सीआईएल द्वारा कर्मचारियों के हक में अंजाम दी जा रही बड़ी कवायदों का हिस्सा है। उदाहरण के तौर पर, देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के साथ गठजोड़ के जरिए अभूतपूर्व सुरक्षा के कदम अपनाए गए हैं। चेयरमैन का कहना है कि पूरी दुनिया में कोयला खनन में दुर्घटना उसका उसका हिस्सा बना हुआ है, लेकिन सीआईएल ऐसी दुर्घटनाओं की संख्या को तेजी से घटाने में सक्षम बन गया है।

आंकड़े बताते हैं कि चीन की कोयला खदानों में होने वाली दुर्घटनाओं की दर अमेरिका व भारत जैसे देशों के मुकाबले कम से कम 25 गुना ज्यादा है। भारत के 0.33 प्रति हजार प्रति वर्ष मृत्यु दर की तुलना विकसित देशों से की जा सकती है, लेकिन सीआईएल सालाना इसमें कम से कम 50 फीसदी की कमी लाना चाहती है।

जमीन के भीतर स्थित खदान में ज्यादातर दुर्घटनाएं उसकी छत गिरने की वजह से होती हैं और प्रबंधन ने पाया है कि ऐसी आपदा को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर कोई तकनीक नहीं है। छत को सपोर्ट देने के लिए रूफ बोल्टिंगस्टिचिंग विधि के इस्तेमाल और आधुनिक रूफ बोल्टिंग मशीन के जरिए ड्रिलिंग की शुरुआत के अलावा कंपनी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से गठजोड़ किया है, जो इस क्षेत्र में कुछ उम्दा काम कर रहा है।

उदाहरण के तौर पर आईआईटी खड़गपुर वायरलेस नेटवर्क सिस्टम पर काम कर रहा है जो जमीन के भीतर स्थित खदान की छत गिरने का तत्काल अनुमान लगा सकता है। कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज द्वारा किया जा रहा अन्य काम है जमीन के भीतर स्थित खदान व जमीन की सतह पर स्थित खदान की आग की निगरानी।

इसके अलावा थर्मल रिमोट सेंसिंग के आंकड़ों का इस्तेमाल कर झरिया कोल फील्ड्स में आग की गतिविधियों की निगरानी भी वह कर रहा है। झरिया में कई खदानों में भयंकर आग लगी हुई है। इसके साथ ही, 430 खदानों में खतरों के आकलन का काम पूरा हो गया है और सीआईएल ने रेडार आदि की स्थापना के जरिए आरऐंडडी सिस्टम लगाया है।

इसने खदान में कंप्यूटराइज्ड एनवायरनमेंट टेलीमॉनिटरिंग सिस्टम लगाया है ताकि खदान में आग का पता लगाया जा सके। प्रभावित लोगों के परिजन को तत्काल नौकरी मुहैया कराने के अलावा यह किया गया है। साथ ही ऐसे लोगों के परिवारों को समर्थन देने के लिए बच्चों की मुफ्त शिक्षा, प्रशिक्षण की सुविधा मुहैया कराई गई है और इसके लिए उदार तरीके से बजट बनाया गया है।

दुनिया की सबसे बड़ी खनन कंपनी सीआईएल के देश भर में स्थित दफ्तरों में इस साल बनाए गए स्मारकों को श्रध्दांजलि देने का यह सबसे अच्छा तरीका है।

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