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डीटीएच कंपनियों के मुनाफे की धुंधली तस्वीर
स्वरूप चक्रवर्ती / मुंबई May 05, 2010

टेलीविजन पर डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) कंपनियों की पिक्चर गुणवत्ता भले ही सुधर गई है, लेकिन उनकी माली हालत दिनोंदिन बदतर होती जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया शोध कंपनी मीडिया पार्टनर्स एशिया (एमपीए) का कहना है कि भारतीय डीटीएच कंपनियों की हालत इस समय काफी खस्ता है और उनका ईबीआईडीटीए (ब्याज, कर, डेप्रीसिएशन और एमोर्टाइजेशन पूर्व)मार्जिन 84 फीसदी तक नीचे आ गया है।

गौरतलब है कि हाल के समय में इन कंपनियों के ग्राहकों की संख्या में खासी बढ़ोतरी हुई है लेकिन इसके बावजूद इनकी वित्तीय स्थिति दयनीय बनी हुई है। इस साल मार्च में टाटा स्काई के ग्राहकों की संख्या ने 50 लाख के आंकड़े को पार कर लिया था और इस समय प्रति महीने कंपनी के साथ1.5 लाख ग्राहक जुड़ रहे हैं।

इसी तरह, शहरी क्षेत्रों में भारती एयरटेल के ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ रही है और इसके ग्राहकों की कुल संख्या 20 लाख के पार पहुंच चुकी है। हालांकि, ये आंकड़े भले ही आकर्षक लग रहे हैं लेकिन ग्राहकों का फिर से केबल ऑपरेटरों के साथ जुड़ना या अपने ऑपरेटर को बदलना डीटीएच कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि ग्राहकों के कंपनियां बदलने या केबल कनेक्शन लेने की दर हरेक महीने 5-6 फीसदी के बीच हो गई है जबकि कुछ कंपनियों के लिए यह दर 8 फीसदी के स्तर पर चली गई है।

इस बारे में टाटा स्काई के विक्रम कौशिक कहते हैं 'ग्राहकों का दूसरी तरफ मुड़ना डीटीएच कंपनियों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर रहा है क्योंकि केबल उद्योग नियमन दायरे में नहीं आता है और वे कृत्रिम तौर पर कीमतें कम रखते हैं।'

इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनी डिश टीवी के साथ 70 लाख ग्राहक जुड़े हैं। कंपनी का कहना है कि उनके लिए यह दर प्रति महीने 1 फीसदी से भी कम है जो इस उद्योग के औसत से कम है और इसीलिए यह उनके लिए चिंता का विषय नहीं है।

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