बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकार छोड़ेगी चीनी का चम्मच
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सरकार छोड़ेगी चीनी का चम्मच
चीनी की कीमत और मार्केटिंग से अपना नियंत्रण हटाने पर सरकार कर रही है विचार
संजय जोग और राजेश भयानी / मुंबई May 05, 2010

चीनी की कीमत और मार्केटिंग से सरकार का नियंत्रण जल्द ही हट सकता है।

हालांकि सरकार के तमाम हलके इस मसले पर एकराय नहीं हो सके हैं, लेकिन कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) इसकी वकालत कर रहा है। इसकी वजह चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में चीनी का उत्पादन बढ़कर 2.25 करोड़ और 3 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

इसके लिए केंद्र सरकार सबसे पहले चीनी मिलों के लिए चीनी जारी करने और लेवी थोपने की प्रणाली खत्म करने पर विचार कर रही है। लेकिन कीमत से अंकुश हटाते समय सरकार गन्ना किसानों के लिए उचित लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करने की ताकत अपने ही हाथ में रखना चाहता है।

सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'चीनी से नियंत्रण खत्म करने का यह सही वक्त है क्योंकि भारत में दोनों साल चीनी का उत्पादन ज्यादा होने की उम्मीद है। फिलहाल सरकार लेवी और मुक्त चीनी के लिए कोटा तय कर रही है। इसके अलावा चीनी अनिवार्य जिंस अधिनियम के दायरे में भी आती है। अभी दो चीनी मिलों के बीच दूरी और आयात-निर्यात पर फैसला सरकार ही करती है।'

लेकिन सूत्रों के अनुसार एफआरपी तय करने के अलावा चीनी पर सरकार का अंकुश नहीं रह जाएगा। योजना आयोग के सदस्य डॉ. अभिजित सेन ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'मेरे निजी विचार में चीनी से नियंत्रण खत्म करने का यह सही वक्त है। दाम कम हुए हैं और चीनी का अधिशेष भी नहीं है और उत्पादन आगे बढ़ने के ही आसार हैं। इसलिए सरकार को इस तरफ काम करना चाहिए और चीनी का बफर तैयार करना चाहिए।'

हालांकि चीनी उद्योग में इस मसले पर मतभेद है। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के तहत निजी चीनी मिलें इसके समर्थन में खड़ी हैं, लेकिन सहकारी चीनी मिलों को इसकी रफ्तार धीमी रखने की दरकार महसूस हो रही है।

सहकारी मिलों को डर है कि सरकार के इस कदम से चीनी के दाम 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर सकते हैं, जो फिलहाल 2,400 से 2,900 रुपये प्रति क्विंटल हैं। ऐसे में किसानों को कम रकम मिलेगी।

चीनी से नियंत्रण हटाने के लिए सबसे पहले लेवी की व्यवस्था खत्म करनी होगी। लेवी के तहत मिली चीनी का प्रयोग सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बिक्री के लिए किया जाता है। सरकार लेवी खत्म करती है तो उसे चीनी खुले बाजार से खरीदनी होगी। चीनी का भाव बढ़ा तो सब्सिडी का बोझ बढ़ जाएगा। डॉ. सेन के मुताबिक इसकी भरपाई चीनी उद्योग पर अधिभार से की जा सकती है।

मुंह होगा मीठा

चीनी की कीमत से सरकार हटा सकती है अपना अंकुश
ऐसा हुआ तो बाज़ारों में सस्ती हो सकती है चीनी
अगले दो साल चीनी के बंपर उत्पादन के आसार
लेवी हटी तो सरकार को खरीदनी पड़ जाएगी महंगी चीनी

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