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पंजाब में सिनेमाघरों की चांदी
बीएस संवाददाता / जालंधर May 15, 2008
पंजाब में सिनेमा हॉलों पर लगने वाले मनोरंजन कर को खत्म किए जाने के ऐलान से राज्य के हॉल मालिक काफी राहत महसूस कर रहे हैं।
राज्य के सिनेमा हॉल मालिक काफी लंबे अर्से से इस टैक्स को खत्म करने की मांग कर रहे थे। नॉर्थ इंडियन मोशन पिक्चर्स असोसिएशन के अध्यक्ष धरम पाल ने राज्य सरकार के इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे राज्य की सिनेमा इंडस्ट्री को काफी फायदा पहुंचेगा।
उन्होंने बताया कि इस टैक्स की वजह से पिछले साल राज्य के 48 सिनेमा घर बंद हो गए और कई अन्य बंद होने के कगार पर पहुंच गए थे, क्योंकि मनोरंजन कर के रूप में हर सिनेमा घर को 65 से 70 हजार रुपये के बीच राशि अदा करनी पड़ती थी।
पाल के मुताबिक, सरकार ने राज्य के मल्टिप्लेक्सों को पहले ही यह छूट प्रदान कर दी थी और और इस वजह से सिनेमा घरों के मालिक को अपने कारोबार में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा, सरकार के इस कदम से राज्य की सिनेमा इंडस्ट्री को फिर से उभरने का मौका मिलेगा। साथ ही इससे राज्य में रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी होगी, क्योंकि हर सिनेमा घर को चलाने के लिए कम से कम 15 से 20 लोगों की जरूरत होती है।
जालंधर स्थित सिनेमा घर नरिंदर सिनेमा के मालिक हरिंदर संधु ने सरकार के इस कदम की तारीफ करते हुए कहा कि इससे राज्य की मृतप्राय हो चुकी सिनेमा इंडस्ट्री को नया जीवन मिलेगा। उन्होंने बताया कि अपने खर्चों में कमी करने के लिए उन्हें अपने सिनेमा घर के कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती करनी पड़ी थी।
इस फैसले के सिनेमा इंडस्ट्री पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में पूछे जाने पर हरिंदर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि घाटे में चलने वाले सिनेमाघर जल्द ही लाभ में चलनेवाली यूनिटों में तब्दील हो जाएंगे। उनका कहना है कि इस कदम से क्षेत्रीय फिल्म उद्योग को भी फलने-फूलने में मदद मिलेगी।
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