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निवेश को सरल बनाता डीमैट खाता
निवेश : अगर आपके पास डीमैट खाता है तो आपके पास विभिन्न परिसंपत्तियों में निवेश का अवसर होता है
आशीष पई /  May 02, 2010

पिछले एक दशक की समयावधि में देखें तो शेयर बाजार में निवेश करने का माध्यम कागजी न होकर अब इलेक्ट्रॉनिक हो गया है।

एक समय था जब निवेशक शेयर प्रमाणपत्रों के साथ बाजार में निवेश करने जाते थे लेकिन अब समय बदल गया है। अब शेयर बाजार में निवेश से पहले आपके पास डीमैट खाता होना निहायत जरूरी है और अगर नहीं है तो फिर शेयरों में निवेश करने की राह में यह सबसे बड़ी बाधा है।

मौजूदा समय में जितनी इकाइयां (जिंस वायदा, हाजिर बाजार) हैं, वे डीमैट खाते के जरिये ही निवेश स्वीकार करती हैं। डीमैट या 'डीमैटेरियलाइज्ड' खाते में शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं। और इससे शेयरों को कागजी रूप में रखने की परेशानियों से आपको निजात मिली है।

डिपोजिटरी

एक डिपोजिटरी बैंक की तरह ही काम करती है और निवेशकों के शेयरों को इलेक्ट्रिॉनिक फॉर्म में रखती है। निवेशक को डिपोजिटरी पार्टिसिपेन्ट (डीपी) के जरिये डिपोजिटरी अकाउंट खोलना होता है। डीपी डिपॉजिटरी और निवेशकों के बीच की कड़ी होती है।

भारत में मौजूदा समय में दो डिपोजिटरी काम करती हैं, ये हैं नैशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी और सेंट्रल डिपोजिटरी सर्विसेज। कई बैंक जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई आदि, ब्रोकर और वित्तीय संस्थाएं डीपी की तरह काम करते हैं।

किस तरह की सेवाएं देते हैं डीपी?

आप जितने शेयरों की खरीद या बिक्री करते हैं, उनकी जानकारी आपके डीमैट खाते में होती है। अगर आपके पास कोई शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में नहीं हैं तो भी उसे डिमैटेरियलाइज्ड कर आपके डीमैट खाते में रखा जाता है।

हाल में स्टॉक एक्सचेंजों ने म्युचुअल फंडों यूनिटों का अपने प्लेटफार्म से कारोबार करने की अनुमति दे दी है। डीपी नियमित अंतराल पर आपको डीमैट खाते और इसमें हुए परिचालन की जानकारी देता रहता है।

इसके अलावा डीपी अन्य कई सुविधाएं भी प्रदान करता है जिनमें स्टॉक एक्सचेंजों में कारोबार का इलेक्ट्रॉनिक निपटान, बैंक ऋण के एवज में डिमैटेरियलाइज्ड प्रतिभूतियों के गिरवी रखने और डीमैट खाते के लिए नॉमिनेशन सुविधाएं आदि शामिल हैं।

कैसे खोलें डीमैट खाता

आप किसी भी बैंक, ब्रोकर या वित्तीय संस्थानों के साथ डीमैट खाता खोल सकते हैं। अगर आपका किसी बैंक में बचत खाता है तो समान्य तौर पर बैंक डीमैट खाते के लिए आपको आकर्षक प्रतिफल देते हैं। लेकिन आप ऑनलाइन कारोबार करना चाहते हैं तो ऐसे में एक ही वित्तीय संस्थान के साथ आपका डीपी अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट दोनों खुलवाना ज्यादा आसान होता है।

डीपी सालाना रख-रखाव खर्च, प्रतिभूतियों के कारोबार पर परिचालन शुल्क, गिरवी रखी गई प्रतिभूतियों पर शुल्क और डिमैटेरियलाइजेशन फीस भी लेता है। डीपी सेवाओं के शुल्क पूरे देश में अलग-अलग हो सकते हैं।

लाभ

डिपोजिटरी प्रणाली में प्रतिभूतियों का स्वामित्व और स्थानांतरण इलेक्ट्रॉनिक बुक एंट्री के जरिये होता है। इससे कई तरह के लाभ मिलते हैं। प्रतिभूतियों के कागजी रूप में कारोबार करने से कई तरह के जोखिम जुड़े होते हैं। लेकिन डिपोजिटरी कारोबार में इस तरह की परेशानियां पैदा नहीं होती है।

भौतिक निपटान की तरह इलेक्ट्रॉनिक रूप में शेयरों के हस्तांतरण में स्टांप डयूटी भी नहीं लगती है। साथ ही इसे कंपनी के रजिस्ट्रार के पास भी भेजने की जरूरत नहीं होती है।

खाते को बंद कराना

अगर आप डीमैट खाते का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो इसे बंद करवाना जरूरी है। इसकी वजह यह है कि इस पर सालना रख-रखाव शुल्क लगता है। इसके साथ ही आपके खाते का इस्तेमाल कोई दूसरा व्यक्ति गलत कार्यों के लिए भी कर सकता है।

खाता बंद करवाने के लिए सबसे पहले आपको डीपी को इसके लिए एक आवदेन देना होता है। यहां यह याद रखना जरूरी है कि डीमैट खाता उसी स्थिति में बंद हो सकता है जब इसमें शेयर नहीं होते हैं। अगर आपके पास डीमैट खाता है तो आपके पास विभिन्न परिसंपत्तियों में निवेश का अवसर होता है। इनमें गोल्ड ईटीएफ और कमोडिटी वायदा भी शामिल हैं।

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