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सुस्त पड़ी विनिवेश एक्सप्रेस!
हर तीसरे हफ्ते एक आईपीओ की जगह इस साल 8-9 कंपनियों के आईपीओ का विचार
वृष्टि बेनीवाल / नई दिल्ली April 26, 2010

सरकारी कंपनियों का पूंजी बाजार में पिछले कुछ समय में जो ठंडा स्वागत हुआ है, उससे सरकार के विनिवेश कार्यक्रम के इंजन की गर्मी भी कम होती दिख रही है।

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने हर तीसरे हफ्ते में एक कंपनी का सार्वजनिक निर्गम लाने की योजना बनाई थी, लेकिन अब वह केवल 7 या 8 सरकारी कंपनियों में ही विनिवेश पर विचार कर रही है। ऐसा होने पर इस साल विनिवेश के जरिये 40,000 करोड़ रुपये उगाहने का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल हो सकता है।

इनमें से सबसे बड़े निर्गम कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और एमएमटीसी के हो सकते हैं। हिंदुस्तान कॉपर, मैगनीज ओर इंडिया लिमिटेड (एमओआईएल), सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) छोटे निर्गम होंगे।

वित्त मंत्रालय में एक अधिकारी ने नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया, 'हम इस साल सात से आठ कंपनियों के विनिवेश के बारे में सोच रहे हैं। इस साल कुछ और सार्वजनिक निर्गम लाना संभव नहीं है। निर्गमों के लिए बाजार को भी तैयार होना चाहिए।' उन्होंने बताया कि विनिवेश के लक्ष्य का अहम हिस्सा इस साल सीआईएल और सेल जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने से पूरा होगा।

इससे कुछ बड़े निर्गमों का भविष्य अधर में लटक रहा है, जिसकी वजह से विनिवेश का लक्ष्य इस बार भी अधूरा रह सकता है। एमएमटीसी का सही मूल्यांकन सरकार को नहीं सूझ रहा है और यह कंपनी इस साल विनिवेश की फेहरिस्त से बाहर की जा सकती है। इसके अलावा बीएसएनएल और सीआईएल के विनिवेश पर श्रम संगठन तीखे तेवर अपनाए हुए हैं।

हालांकि सीआईएल ने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए श्रम संगठन से समझौता होने का दावा किया है, लेकिन बीएसएनएल में विनिवेश का मामला मंत्रियों के समूह के पास पहुंचाया जाएगा। बीएसएनएल के साथ दिक्कत यह भी है कि इसकी 10 फीसदी हिस्सेदारी की कीमत 10,000 करोड़ रुपये लगाई गई थी, लेकिन पिछले कुछ साल में इसके मुनाफे पर जबरदस्त बट्टा लगा है।

बड़े निर्गमों के नाम पर इस साल सेल को ही कैबिनेट की मंजूरी मिल पाई है। सरकार को इस कंपनी में अपनी 10 फीसदी हिस्सेदारी 2 किस्तों में बेचकर 8,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। कंपनी नए शेयर जारी कर 10 फीसदी हिस्सेदारी और बेचेगी।

छोटे निर्गमों में सरकार को हिंदुस्तान कॉपर से 5,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। इसी तरह एमओआईएल से 500 करोड़ रुपये और एसजेवीएनएल और ईआईएल से 1,200-1,200 करोड़ रुपये हासिल होने की उसे उम्मीद है।

पिछले साल सरकार को 5 कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने से 23,552 करोड़ रुपये मिले थे। लेकिन 25,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य से वह पीछे रह गई थी। पिछले साल सबसे बड़ा निर्गम एनएमडीसी का था।

2010-11 में विनिवेश की योजना

कंपनी                   रकम                   निर्गम
सेल                     8,000                एफपीओ
सीआईएल         12,000              आईपीओ
एमओआईएल       500                आईपीओ
बीएसएनएल            -                   आईपीओ
एमएमटीसी             -                    एफपीओ
हिंदुस्तान कॉपर  5,000            एफपीओ
एसजेवीएनएल      1,200            आईपीओ
ईआईएल              1,200              एफपीओ
रकम करोड़ रुपये में

Keyword: disinvestment, ipo, fpo, CIAL, SAIL, BSNL, MMTC,
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