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फिर उलझीं दूरसंचार कंपनियां
तकनीकी तरकश
लेस्ली डिमोंटी और प्रियंका जोशी /  April 22, 2010

कुछ साल पहले की बात है भारती एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस कम्युनिकेशंस, टाटा टेलीकॉम और आइडिया में कुछ खास तकनीकों की वजह से तलवारें खिंच गई थीं।

दरअसल ये दूरसंचार कंपनियां कोड डिविजन मल्टीपल एक्सेस (सीडीएमए) और ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल (जीएसएम) नाम की दो अलग-अलग तरह की तकनीकों को लेकर भिड़ी हुई थीं। आखिरकार, जीएसएम तकनीक ही असल विजेता बनकर उभरी।

वक्त एक बार फिर खुद को दोहरा रहा है। इस बार मुकाबला हो रहा है 3 जी और वाइमैक्स तकनीकों के बीच में। सरकार भी 3जी स्पेक्ट्रम और ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्ल्यूए) के स्पेक्ट्रम के जरिये 50,000 करोड़ रुपये की कमाई की आस लगाए हुए है।

हालांकि 3 जी के लिए अभी नीलामी प्रक्रिया चालू है लेकिन वाइमैक्स (बीडब्ल्यूए तकनीक का एक रूप) सफलतापूर्वक पदार्पण कर चुका है। यूं तो कई मायनों में 3 जी बीडब्ल्यूए तकनीक के लिए चुनौती बनी हुई है लेकिन बीडब्ल्यूए तकनीक में वाइमैक्स के लिए आंतरिक चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ऐसी ही एक तकनीक का नाम है लॉन्ग टर्म इवॉल्यूशन टाइम डिविजन जिसे टीडी-एलटीई का नाम दिया जा रहा है।

इस बात का तर्क दिया जाता है कि 3 जी तकनीक वॉयल के लिए ज्यादा मुफीद है जबकि वाइमैक्स की खासियत उसकी डाटा स्पीड है। वैसे भारत में अभी तक डाटा सेवाओं से दूरसंचार कंपनियों को उतनी ज्यादा कमाई नहीं हो रही है। स्पेक्ट्रम की कमी के कारण भारत में यह आंकड़ा केवल 10 फीसदी है जबकि विकसित देशों के बाजारों में यही आंकड़ा 25 फीसदी के आसपास है।

आदर्श रूप से यह होना चाहिए कि वॉयस सेवाओं के लिए 3 जी और डाटा सेवाओं के लिए वाइमैक्स तकनीक को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारत में 2जी तकनीक पर दूरसंचार सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनियां वाइमैक्स के 2.3 गीगाहट्र्ज बैंड के बजाय टीडी-एलटीई के 2.5 गीगाहट्र्ज के स्पेक्ट्रम को हासिल करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा सकती हैं।

टीडी-एलटीई ऑल ऑल इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) नेटवर्क है। ग्राहकों की संख्या के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी चाइना मोबाइल टीडी-एलटीई के जरिये ही अपने आधुनिक नेटवर्क को विस्तार देना चाहती है। रूसी कंपनी स्व्याजीइन्वेस्ट भी इसी तकनीक को अपना रही है जबकि क्वॉलकॉम भारत में इसे हासिल करने की होड़ में शामिल है।

टीडी-एलटीई तकनीक 3 जी डब्ल्यूसीडीएमए एचएसपीए और ईवी-डीओ तकनीक के अनुकूल है। एसेंटियस कंसल्टिंग में प्रमुख विश्लेषक आलोक शेंदे कहते हैं, 'हमारा मानना है कि मौजूदा 2 जी और 3 जी स्पेक्ट्रम टीडी-एलटीई के लिए मददगार ही साबित होंगे क्योंकि दोनों एक दूसरे के लिए बेहद अनुकूल हैं।

इस तकनीक के लिए खास तरह के हैंडसेट चाहिए। वैश्विक स्तर पर इस तरह के हैंडसेट इस साल के आखिर तक आने की उम्मीद है। जहां तक कीमत की बात है तो शुरुआती तीन-चार साल में ये हैंडसेट ऊंचे दाम पर ही मिलेंगे।' इसको एक चिंता का सबब माना जा सकता है।

वाइमैक्स इंडिया फोरम के अध्यक्ष सी एस राव का कहना है, 'वाइमैक्स पिछले चार साल से बाजार में मौजूद है जबकि टीडी एलटीई को दुनिया में अपनी शुरुआत करनी बाकी है। आप एफडी एलटीई की बात छोड़िए जो कई मायनों में 4 जी पीढ़ी की सेवा है।

आखिर भारत एक ऐसी तकनीक के लिए परीक्षण स्थल बनाया जाए जिसका न तो कोई नेटवर्क है, कोई चिप नहीं और कोई एक डिवाइस भी नहीं है। यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है और अगर क्वालकॉम बोली के जरिये इसे हासिल करने में कामयाब हो जाती है तो यह वाइमैक्स के जरिये देश में आ रही इंटरनेट क्रांति की राह रोकने का काम करेगा।'

फ्रॉस्ट ऐंड सुलिवन में बीडब्ल्यूए के कार्यक्रम प्रबंधक ल्यूक थॉमस कहते हैं, 'एलटीई के लिए डिवाइस चाहने वाले ग्राहकों की संख्या बेहद सीमित है और हम इस तकनीक के 2012 से पहले इस तकनीक को फलीभूत होते नहीं देख रहे हैं। यूरोप, स्वीडन और नॉर्वे में केवल परीक्षण स्तर पर ही है। एलटीई में एमआईएमओ जैसी तकनीक का इस्तेमाल होता है जो फोन की बैट्री के लिए नुकसानदेह साबित होती है। हमें इस दिशा में काम करने में कई साल लग जाएंगे।'

जहां तक वाइमैक्स तकनीक की बात है तो इसे इन्टेल, एल्वेरियन, मोटोरोला, सैमसंग और जेडटीई के अलावा कई दिग्गज कंपनियों का साथ मिल रहा है। इन कंपनियों को क्वॉलकॉम, एरिक्सन और नोकिया सीमेन्स नेटवर्क का सहयोग भी हासिल है। इनमें से क्वॉलकॉम ऐसी कंपनी है जो टीडी के लिए भी होड़ में शामिल है।

हालांकि वाइमैक्स तकनीक के आलोचकों की भी कमी नहीं हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 तक भारत में वाइमैक्स ग्राहकों का आंकड़ा 1.4 करोड़ का स्तर छू सकता है जिसमें सालाना 130 फीसदी की उछाल आएगी।

दावा किया जा रहा है कि 3 जी नेटवर्क 1 एमबीपीएस की स्पीड तक की  इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराएगी लेकिन जानकार भी इस बात पर सहमत हैं कि यह व्यावहारिक रूप से 384 केबीपीएस स्पीड की इंटरनेट सेवाएं प्रदान करेगी।

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