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लंबी दौड़ के घोड़े पर दांव की रणनीति होगी कारगर
फंड प्रबंधक की राय : एस नरेन पैसा कमाने के लिए बेहतरीन दीर्घावधि संभावना वाले शेयरों में निवेश करने में रखते हैं यकीन
राम प्रसाद साहू /  April 11, 2010

आईसीआईसीआई प्रूडेशियल एएमसी में सीआईओ (मुख्य निवेश अधिकारी, इक्विटी) एस नरेन के लिए वित्त वर्ष 2009-10 अच्छा रहा।

उनके पांच फंडों (डिस्कवरी टैक्स प्लान) में से दो फंड पिछले कुछ वर्षों के दौरान अपनी श्रेणी में दिग्गज बने हुए हैं। मिसाल के तौर पर वैल्यू खरीद पर फोकस करने वाला डिस्कवरी फंड पिछले एक और दो साल की समय-सीमा के दौरान क्रमश: 144 फीसदी और 31 फीसदी के शानदार प्रतिफल के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला फंड रहा है।

इसी अवधि में इक्विटी डायवर्सिफाइड फंड्स ने औसतन 82 फीसदी और 9 फीसदी का रिटर्न दिया है। नरेन क्षमता से लैस कंपनियों के शेयरों और संभावनाओं से भरे क्षेत्रों में निवेश करने में भरोसा रखते हैं। लेकिन कमजोर पैच के जरिये किया गया निवेश भी उस स्थिति में श्रेष्ठ तरीका है जब तेजी की वापसी हो रही हो।

यही वजह है कि वे अपने कुछ फंडों को चार्ट के शीर्ष पर जगह दिलाने में सफल रहे हैं। हालांकि बाजार की मौजूदा स्थिति अगर बरकरार रहती है तो इससे धन कमाना आसान है, लेकिन अगर मौजूदा तेजी बनी रही तो कौन से कारकों पर ध्यान दिए जाने और निवेशकों को किस तरह की रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। इसकी विस्तार से चर्चा की जा रही है।

मजबूत बनाएं दांव

नरेन का मानना है कि अनुकूल माहौल, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और क्या खपत की तुलना में सरकार का निवेश के पक्ष में होना आदि प्रमुख कारक हैं। वह कहते हैं कि बुनियादी ढांचे में निवेश दीर्घावधि के लिए अच्छा है जबकि खपत बढ़ाने (प्रोत्साहन के जरिये) की रणनीति एक अल्पावधि कदम है।

नरेन का मानना है कि इसके अलावा न तो ब्याज दरें और न ही कंपनियों के खातों पर ऋण चिंता का कारण है। उनका कहना है कि एक साल पहले की स्थिति के साथ अगर तुलना करें तो कुछ रियल एस्टेट और विमानन कंपनियों को छोड़ कर बाकी कंपनियां इक्विटी रूट के जरिये धन जुटाने में सफल रही हैं।

वह कहते हैं, 'मल्टी-कैप कंजरवेटिव स्ट्रेटेजी को अपनाएं क्योंकि बाजार फिलहाल फेयर वैल्यू के उच्च स्तर पर है।' हालांकि मल्टी-कैप स्ट्रेटेजी फिलहाल अच्छा विचार साबित हो सकता है, लेकिन शेयरों के चयन से पहले निवेशकों को किस तरह की गाइडलाइंस को दिमाग में रखना चाहिए?

सही रणनीति

नरेन ने ऐसे क्षेत्रों के शेयरों की खरीद की जिन्हें लेकर बाजार में आशंका व्याप्त थी और ये शेयर मुनाफा दिलाने के लिहाज से अनुकूल नहीं समझे जा रहे थे। उन्होंने दूरसंचार जैसे क्षेत्र का उदाहरण दिया। टैरिफ में कमी के बाद अक्टूबर 2009 में दूरसंचार क्षेत्र के शेयरों को लेकर आशंका पैदा हो गई।

वह कहते हैं, 'तब आप ऐसी स्थिति से जूझ रहे थे जिसमें यह क्षेत्र काफी सस्ता था और अभी भी सस्ता है। लेकिन आपको यह पता था कि तीन साल बाद यह प्रतिस्पर्धा (शुल्क दरों में गिरावट की होड़) समाप्त हो जाएगी। यह एक मॉडल है जिसमें लोगों को निवेश करने की जरूरत है।'

वह कहते हैं कि दुनिया के श्रेष्ठ निवेशक वही हैं जिन्होंने संकट या आशंका में निवेश किया। उदाहरण के लिए बर्कशायर हैथवे के मुखिया वॉरेन बफेट का नाम गिनाते हैं। बफेट के पास 2007 में 20 अरब डॉलर की नकदी थी जबकि अब वह 10 अरब डॉलर के कर्ज में हैं।

वह कहते हैं, 'आप उस वक्त भी निवेश करें जब संकट या थोड़ी आशंका भी नजर आए और विश्वास बनाए रखें।' वह निवेशकों को कंपनी के ट्रैक रिकॉर्ड, खासकर गिरावट के चक्र से संबंधित कंपनी के प्रदर्शन की समीक्षा करने की भी सलाह देते हैं।

विकास पर जोर

लेकिन वैल्यू के भरोसे निवेश करने का मतलब यह नहीं है कि आप विकास की तरफ ध्यान ही न दें। एक उदाहरण देते हुए वह कहते हैं, 'एक साल पहले प्रौद्योगिकी उचित मूल्यांकन पर उपलब्ध थी, लेकिन इसके साथ विकास भी जुड़ा हुआ था और इसलिए इसने अच्छा प्रतिफल दिया।'

टेक्नोलॉजी गाइडेंस के बाद पिछले साल यह एक घृणास्पद क्षेत्र बन गया था। लेकिन हाल के समय में इसने अच्छा प्रतिफल दिया है। वह कहते हैं, 'अगर आप सस्ते मूल्यांकन पर उपलब्ध विकास क्षेत्र की पहचान कर सकते हैं तब आप अच्छा प्रतिफल हासिल कर सकते हैं।'

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