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चलता है, बिकता है, पर सबको नहीं दिखता है
निवेश : कंपनी के ब्रांड, लाइसेंस, पेटेंट और विज्ञापन ऐसी परिसंपत्तियां हैं जिनका हिसाब किसी बहीखाते में नहीं मिलता
जितेंद्र कुमार गुप्ता /  April 11, 2010

अकाउंटिंग और रिपोर्टिंग नीतियों के संकुचित दायरे की वजह से कंपनियों की अस्प्ष्ट परिसंपत्तियों पर निवेशक गौर नहीं कर पाते हैं। पर इनसे कंपनियों की साख और योग्यता का स्तर तय होता है।

किसी कंपनी को हासिल लाइसेंस, पेटेंट, विकास अधिकार और कंपनी की तरफ से विज्ञापन पर भारी खर्च, उसके ब्रांड, बौद्धिक संपदा अधिकार और शोध जैसी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन काफी मुश्किल है। इनमें से ज्यादतर चीजों का जिक्र कंपनी के वित्तीय ब्योरे या बहीखाते में नहीं होता है।

जैसे एडयुकॉम्प सॉल्यूशंस ने सालों के प्रयास और शोध के जरिये बौद्धिक परिसंपत्ति जुटाई है। जनवरी 2006 में कंपनी 155 रुपये प्रति शेयर पर सूचीबद्ध हुई। बाजार का मानना था कि कंपनी के शेयर का मूल्यांकन ज्यादा था क्योंकि यह अपनी आमदनी के 30 गुना पर कारोबार कर रही थी।

कंपनी को हासिल बौद्धिक संपदा अधिकार कहीं सूचीबद्ध नहीं हुए थे, पर इसका फायदा कंपनी को मिला। पिछले चार साल में कंपनी की बिक्री करीब 20 गुना तक बढ़ी है। सूचीबद्ध होने से पहले कंपनी के शेयर ने 2,500 फीसदी का भारी प्रतिफल दिया था।

इस तरह के मामलों में निवेशक को सिर्फ शेयर के पी ई अनुपात को नहीं देखना चाहिए बल्कि कंपनी को हासिल इस तरह की संपत्ति का आकार भी मायने रखता है। अगर संभव हो तो ऐसी परिसंपत्ति के चलते मौद्रिक रूप में होने वाले फायदे का भी हिसाब लगाएं।

शोध एवं विकास और विज्ञापन

किसी खास उत्पाद के मामले में शोध और विकास पर किया गया खर्च कंपनी के मुनाफे और नुकसान के खाते में बतौर खर्च जोड़ा जाता है। अगर यह कंपनी दवा क्षेत्र से जुड़ी हो, तो इस शोध से मिलने वाला फायदा कंपनी को किसी दवा या पद्धति के पेटेंट या निर्माण अधिकार के तौर पर मिलेगा जिसका हिसाब-किताब किसी खाते में दर्ज नहीं किया जाता है।

मसलन सन फार्मा एडवांस्ड रिसर्च कंपनी (एसपीएआरसी) औषधीय उत्पादों के शोध और विकास में लगी है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 2,074 करोड़ रुपये है। महज 35.14 करोड़ रुपये की बिक्री और 2008-09 में 91.4 लाख रुपये के घाटे के मुकाबले बाजारा हिस्सेदारी विशाल है। कंपनी के विकास और शोध प्रयासों के चलते कंपनी द्वारा विकसित कई दवाइयां पेटेंट हासिल करने की प्रक्रिया में हैं।

एसपीएआरसी की तरह कई कंपनियां शोध और विकास के काम में लगी हैं। मगर इन कोशिशों के फायदों का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है जब तक कि वास्तविक बिक्री में इनका असर न दिखने लगे। मगर निवेशकों को कंपनी के ऐसे प्रयासों पर भी गौर करना चाहिए। कंपनी की ओर से इस क्षेत्र में किया जा रहा निवेश, विकास के विभिन्न स्तर और मौकों पर भी विचार करना चाहिए।

एक नया आविष्कार जिसे पेटेंट हासिल हो भारी बदलाव ला सकता है। निवेशकों को शोध और विकास प्रयासों को देखना चाहिए। सालाना रिपोर्ट में निदेशकों की ओर से पेश ब्योरे और कंपनी की ओर से दी जा रही जानकारियों में निवेशक शोध और विकास से जुड़े प्रयासों की जानकारी हासिल कर सकते हैं। निदेशक विशेष सेगमेंट में मौकों को लेकर अपने आकलन भी बताते हैं।

सिप्ला के शोध और विकास का नतीजा जानी-मानी गर्भनिरोध दवा आई-पिल को पिरामल हेल्थकेयर ने 95 करोड़ रुपये में खरीदा है। सिप्ला ने न सिर्फ इसके शोध और विकास पर भारी खर्च किया बल्कि दवा के लिए बड़े स्तर पर प्रचार अभियान भी चलाया। इस तरह के प्रयासों के फायदे कंपनी के खातों में नजर नहीं आते पर कंपनी को भविष्य में इनका फायदा जरूर मिलता है।

अपने उत्पादों के लिए लंबे समय के बाजार बनाने और लोगों के बीच जानकारी फैलाने के लिए कंपनियां शुरुआती प्रचार पर ध्यान देती है। कई बार निवेशक इस तरह के प्रयासों के फायदे नहीं देख पाते हैं। पर इससे काफी फर्क पड़ता है और यह कंपनी की आमदनी बढ़ाने में मददगार सबित होते हैं।

निवेशकों को इन पर गौर करना चाहिए और कंपनी को इनसे मिले वाले फायदों का मूल्यांकन करने की कोशिश करनी चाहिए। इसका अंदाजा लगाएं कि कंपनी की आमदनी और मुनाफे पर इनसे कितनी मदद मिल सकती है।

ब्रांड नाम

कंपनी के ब्रांडों की साख और मूल्यांकन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है पर इनका जिक्र भी अकाउंट बुक में नहीं होता। जैसे मारुति सुजूकी इंडिया, हीरो होंडा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और कई भारतीय ब्रांड अपनी पहचान और हैसियत की मदद से विकास दर बढ़ाने में कामयाब रही हैं।

ब्रांड की हैसियत निवेशकों को एक ही क्षेत्र की अलग-अलग कंपनियों में अंतर करने में मदद करता है। अगर कंपनी के पास कोई जाना-माना ब्रांड है तो निश्चित तौर पर इसका फायदा कंपनी को बेहतर बिक्री और मुनाफे के रूप में होता है। निजी क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो को अपने ब्रांड नाम की वजह से अच्छी बिक्री और बेहतर मुनाफा मिलता है।

आमतौर पर निवेशक ब्रांड नाम को तब तक ज्यादा तव्वजो नहीं देते जब तक कि यह बिकता नहीं है। जैसे सुरक्षा उत्पादों के क्षेत्र में जीकॉम एक बड़ा ब्रांड है जो हाल ही में स्नाइडर को 225 करोड़ रुपये में बेची गई है। कंपनी ने इस व्यावसाय को प्रीमियम पर बेचा है क्योंकि इस बिक्री में जीकॉम ब्रांड को तीन साल तक इस्तेमाल करने का अधिकार भी शामिल है।

निवेशकों केलिए एक जाने-माने ब्रांड का मतलब दूसरों के मुकाबले प्रतियोगी लाभ और बिक्री में बढ़ोतरी है। अगर किसी कंपनी के पास कोई ब्रांड नाम नहीं है तो इसे इसी तरह के दूसरे उत्पादों से अलग करना भी मुश्किल होता है जिससे कीमत शुद्ध और यहां तक कि बिक्री बंद होने तक की स्थिति खड़ी हो सकती है।

Keyword: company, brand, license, petent, advertising, R&D,
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