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कंपनियां-सरकार करेंगी घर का सपना साकार
आमची मुंबई
सुशील मिश्र /  April 11, 2010

मायानगरी मुंबई को भले ही सपनों का शहर कहा जाता हो लेकिन इस शहर में कुछ लोगों की जिंदगी बीत जाती है लेकिन अपने आशियाने का सपना, सपना ही रह जाता है।

इसकी सबसे बड़ी वजह तो यही है कि इस शहर में जमीन-जायदाद की कीमत इतनी ऊंची है कि एक बड़ा तबका अपनी जीवन भर की जमा पूंजी से भी यहां मकान खरीदने में अपने आप को मुश्किल में पाता है। बहरहाल इस तबके के लिए अब एक बढ़िया खबर है।

रियल एस्टेट कंपनियां अब किफायती मकान बनाने के लिए 'सब के लिए घर ' परियोजना का आगाज कर रह रही हैं। इसके तहत सरकारी सहयोग से पांच लाख घर बनाए जाएंगे।

सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी वाली यह योजना रियल एस्टेट की तेजी पर ब्रेकर का काम भी कर सकती है। हालांकि भवन निर्माताओं का मानना है कि रियल एस्टेट कारोबार पर इसका फिलहाल कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। 

निजी हाथों में सरकारी फ्लैट

भवन निर्माताओं की प्रमुख संस्था महाराष्ट्र चेंबर ऑफ हाउसिंग इंडस्ट्री (एमसीएचआई) की निगरानी में इस परियोजना पर काम किया जाएगा। इसमें अगले पांच साल में मुंबई और आस-पास के इलाकों में पांच लाख फ्लैट तैयार किये जाएंगे। 

एमसीएचआई के अध्यक्ष प्रवीण दोशी के अनुसार इस परियोजना का शुभारंभ 18 अप्रैल को किया जाएगा। एमसीएचआई 18 अप्रैल को 'सबके लिए घर' सम्मेलन का आयोजन कर रही है और इसी सम्मेलन में राज्य सरकार और भवन निर्माताओं के बीच इस परियोजना की साझेदारी पत्र पर हस्ताक्षर भी किये जाएंगे।

प्रस्तावित फ्लैट मुंबई, मीरा रोड, ठाणे, कल्याण, डोंबिवली, विरार, वसई, नालासोपारा, भायंदर जैसी जगहों पर बनाए जाएंगे। इस परियोजना पर तकरीबन 15,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसके तहत बनने वाले मकान 160 वर्ग फुट से लेकर 600 वर्ग फुट के होंगे।

वादा होगा पूरा

महाराष्ट्र सरकार ने वित्त वर्ष 2010-11 के बजट में आगामी पांच साल में 10 लाख मकान बनाने का वादा किया है। इसी वादे को पूरा करने के लिए सरकार निजी भवन निर्माताओं से हाथ मिला रही है।

एमसीएचआई की निगरानी वाली परियोजना में मुंबई महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की मौजूदा रेंटल परियोजना, महाराष्ट्र आवासीय एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) और स्लम पुनर्वास योजना के तहत बनने वाली योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा।

एमसीएचआई की निगरानी में निर्माण कार्य किया जाएगा और आवंटन का काम सरकारी एजेंसियां ही करेंगी। अभी सरकारी एजेंसियों जो फ्लैट बना रही हैं उनके निर्माण में भी बहुत समय लगता है और दूसरी बात उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किये जाते रहे हैं।

रियल एस्टेट पर पड़ेगा भारी!

रियल एस्टेट को इससे नुकसान की आशंका पर सुनील मंत्री रियल्टी के चेयरमैन सुनील मंत्री कहते हैं, 'इस परियोजना से प्रॉपर्टी की कीमतें प्रभावित नहीं होने वाली हैं क्योंकि इनका निर्माण मुंबई के स्थानीय लोगों और कम आय वर्ग के लोगों के लिए किया जा रहा है। इससे मुंबई की सूरत बदलेगी, झुग्गियों की जगह इमारतें होंगी। इसे रियल एस्टेट कारोबार को कोई नुकसान नहीं होने जा रहा।'

मगर विश्लेषकों की राय कुछ अलग ही है। रियल एस्टेट के जानकार यशवंत भाई कहते हैं कि यह परियोजना अगर अपने निर्धारित समय पर पूरी होती है तो इसका फर्क तो पड़ने ही वाला है क्योंकि लोग सस्ते घरों की उम्मीद में निजी परियोजनाओं में घर खरीदने से बचेंगे। बुकिंग कमजोर होने से कीमतें प्रभावित होंगी।

कीमतों में गिरावट आना तो मुश्किल होगा लेकिन जिस तेजी से प्रॉपर्टी बाजार तेजी से ऊपर की ओर भाग रहा है उसमें कमी जरूर दिखाई देगी।

सरकार से सहयोग

जमीन की कीमत बढ़ने, श्रमिकों की मजदूरी ज्यादा होने और निर्माण लागत बढ़ने के कारण मुंबई और मुबई महानगरीय क्षेत्र में मकान महंगे हैं और किफायती मकानों की खूब मांग है।

किफायती मकान मिलना तभी संभव है जब सरकार जमीन मुहैया करे , एफएसआई को बढ़ाए, करों को कम करें, प्लान के लिए एकल खिड़की मंजूरी की व्यवस्था हो तथा माइक्रो फाइनेंस मुहैया हो। इस साझेदारी के मार्फत हमारा प्रयास घरों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ पर्याप्त समाधान पर पहुंचने की है।

माल भी मिलेगा खूब

कंपनियों का कहना है कि वह इससे कोई फायदा नहीं चाहती हैं। दोशी कहते हैं फायदे के लिए बहुत योजनाएं हैं लेकिन इस योजना को हम मुंबई के भले के लिए पूरा करना चाहते हैं।

इस मुद्दे पर सुनील मंत्री से जब सीधा सवाल किया गया कि भवन निर्माता कितने फीसदी पर काम करने वाले हैं तो उनका जवाब था कि हम लोग इस परियोजना में 10 से 15 फीसदी की मार्जिन पर काम करेंगे।

यानी दावे भले ही भलाई के किये जाए लेकिन 15,000 करोड़ रुपये वाली इस परियोजना से भी भवन निर्माताओं को 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का फायदा होने वाला है और यही वजह है।

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