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पिछले वित्त वर्ष में वाहन उद्योग ने भरा फर्राटा
वित्त वर्ष 2009-10 में वाहनों की बिक्री 26.41 फीसदी बढ़ी, चालू वित्त वर्ष में 10 से 14 फीसदी विकास की उम्मीद
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली April 09, 2010

वाहन उद्योग ने मंदी को पीछे छोड़ते हुए बीते वित्त वर्ष में बेहतर प्रदर्शन किया। इसमें सरकारी प्रोत्साहन और मांग में तेजी का भी असर देखा गया।

सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2009-10 में वाहनों की बिक्री 26.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,22,92,770 इकाइयों पर पहुंच गया। 2008-09 में देश में कुल 97,24,243 वाहन बिके थे। हालांकि चालू वित्त वर्ष के लिए वाहन क्षेत्र की विकास दर 10 से 14 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है।

सायम के अध्यक्ष पवन गोयनका ने कहा कि जब 2009 की शुरुआत हुई थी तो इस तरह की विकास दर की उम्मीद नहीं थी, लेकिन बीता साल बिक्री के लिहाज से बेहतर रहा, जो चकित करने वाला है।

जीएम इंडिया के उपाध्यक्ष (बिक्री एवं विपणन) अंकुश अरोड़ा ने बताया कि टियर-1 और टियर-2 शहरों में वाहनों की मांग बढ़ने और नए मॉडलों के आने से चालू वित्त वर्ष में वाहन उद्योग 15 फीसदी की दर से विकास कर सकता है।

गोयनका ने कहा कि जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी वाहन उद्योग के लिए बड़ी बाधा है। इससे वाहनों की कीमतों में भी इजाफा करना पड़ा, जिससे ग्राहकों की भावनाओं पर असर पड़ सकता है। गोयनका ने कहा कि राहत पैकेज, कम ब्याज दरें, छठे वेतन आयोग का लागू होना तथा वाहन कंपनियों की ओर नए मॉडलाें की पेशकश के चलते उद्योग को अच्छी वृध्दि हासिल करने में मदद मिली है।

इस मजबूत वृध्दि के बाद भारत वाहन क्षेत्र में चीन के बाद दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता बाजार हो गया है। समाप्त वर्ष में चीन के वाहन क्षेत्र की वृध्दि दर 42 प्रतिशत रही है, जबकि 23 फीसदी की वृध्दि के साथ जर्मनी तीसरे स्थान पर है।

वित्त वर्ष 2009-10 में यात्री कारों की बिक्री 25.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 15,26,787 इकाई रही। इससे पिछले वित्त वर्ष में 12,20,475 यात्री कारें बिकी थीं। वित्त वर्ष के दौरान बाजार की शीर्ष कंपनी मारुति सुजूकी इंडिया की बिक्री 20.23 प्रतिशत की वृध्दि के साथ 7,65,526 इकाई पर पहुंच गई।

हुंडई मोटर की बिक्री 29.07 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 3,14,967 इकाई रही। टाटा मोटर्स की बिक्री में 25.54 प्रतिशत का इजाफा हुआ और यह 2,01,399 इकाई पर पहुंच गई। बीते वित्त वर्ष में मोटरसाइकिलों की बिक्री में 25.88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 73,41,139 इकाइयों पर पहुंच गई।

हीरो होंडा की बिक्री 23.14 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 42,93,991 इकाई रही। वहीं बजाज ऑटो की बिक्री 39.59 प्रतिशत बढ़कर 17,81,748 इकाइयों पर पहुंच गई।

निर्यात के मोर्चे पर भी मारी बाजी

मंदी के दौर में जहां दुनिया के प्रमुख कार बाजारों में गिरावट का रुख रहा, वहीं भारतीय कार कंपनियां विदेशी बाजारों में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने में सफल रहीं।

2009-10 में देश से कार निर्यात में 33.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। बीते वित्त वर्ष में देश का कार निर्यात बढ़कर 4,41,710 इकाई पर पहुंच गया। जबकि 2008-09 में भारत ने 3,31,535 कारों का निर्यात किया था।

गोयनका ने कहा कि यूरोपीय देशों में छोटी कारों की मांग बढ़ने की वजह से देश से कारों का निर्यात बढ़ा है। यूरोप में पुरानी कार देकर नई कार खरीदने पर विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है। इस स्क्रैपेज प्रोत्साहन कार्यक्रम का सबसे ज्यादा फायदा हुंडई मोटर इंडिया और मारुति सुजूकी इंडिया को मिला।

हुंडई मोटर इंडिया का निर्यात 2009-10 में 12.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2,85,658 इकाई पर पहुंच गया। इससे पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने 2,53,344 कारों का निर्यात किया था।

इस अवधि के दौरान मारुति का कार निर्यात लगभग दोगुना होकर 1,46,156 इकाई पर पहुंच गया। 2008-09 में कंपनी ने 68,835 कारों का निर्यात किया था। कुल वाहन निर्यात 17.90 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 18,04,619 इकाई पर पहुंच गया।

वाहन उद्योग ने पकड़ी तेज रफ्तार, आगे सफर नहीं आसान

बीते वित्त वर्ष में कारों की बिक्री में 25.10 फीसदी का हुआ इजाफा
मोटरसाइकिलों की बिक्री भी 25.88 फीसदी बढ़ी
सरकारी प्रोत्साहन और ब्याज दरों में नरमी का मिला फायदा
कारों के निर्यात में भी 33.23 फीसदी की वृद्धि

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