बिजनेस स्टैंडर्ड - आईटीआई : साझा उद्यम पर न मिला साथ
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आईटीआई : साझा उद्यम पर न मिला साथ
विभु रंजन मिश्रा / बेंगलुरु April 06, 2010

सरकार नियंत्रित दूरसंचार उपकरण निर्माता कंपनी इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज (आईटीआई) ने कहा है कि संयुक्त उद्यम लगाने के उसके प्रस्ताव को सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

बेंगलुरू स्थित इस कंपनी ने 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में अब तक का सबसे अधिक 4,732.43 करोड रुपये का राजस्व अर्जित किया है। कंपनी ने सोमवार को संयुक्त उद्यम के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं।

आईटीआई के निदेशक (उत्पादन) और कार्यवाहक सीएमडी, रवि अग्रवाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हमारे संयुक्त उद्यम के  प्रस्ताव के लिए अब तक कोई प्रस्ताव नहीं मिले हैं, जो वाकई अफसोसनाक है। हमें यह भी नहीं पता कि इसके पीछे क्या वजह है। अपनी अगली नीति तय करने से पहले हम दूरसंचार सचिव से बात करेंगे।'

कंपनी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार तीन कंपनियों ने निविदा के कागजात खरीदे थे। इनमें अमेरिका की दूरसंचार निर्माता कंपनी यूटी स्टारकॉम, चीन की दूरसंचार उपकरण निर्माता कंपनी हुवावेई और भारतीय नेटवर्किंग उपकरण निर्माता कंपनी तेजस नेटवर्क शामिल हैं। सूत्र ने कहा 'इन तीनों कंपनियों ने निविदा प्रक्रिया में भी भाग लेने का वादा किया है।'

उल्लेखनीय है कि आईटीआई को पिछले कई सालों में भारी नुकसान हुआ है। घाटे से उबरने के उपायों के तहत कंपनी ने रायबरेली, नैनी और बेंगलुरू के अपने संयंत्रों में साझा उद्यम के लिए निविदांए आमंत्रित की थीं।

उसका इरादा भारतीय और वैश्विक कंपनियों को दूरसंचार उपकरण कारोबार में अपने साथ संयुक्त उद्यम लगाने के लिए आमंत्रित किया था। कंपनी की रायबरेली में वाईमैक्स टेक्नोलॉजी पर संयुक्त उद्यम और नैनी में गीगाबिट पैसिव ऑप्टिकल नेटवर्क(जी-पीओएन), गीगाबिट इथर पैसिव ऑप्टिकल नेटवर्क (जीई-पीओएन) और ऑप्टिकल ट्रांसमिशन इक्विपमेंट लगाने की योजना थी।

बेंगलुरु, जहां आईटीआई के 2,200 कर्मचारी हैं, में कंपनी आईटी कोर सिस्टम में संयुक्त उद्यम लगाना चाह रही है। आंतरिक सूत्रों का कहना है कि आईटीआई दूरसंचार विभाग के साथ बातचीत के बाद निविदा मंगाने की तारीख को आगे बढ़ा सकती है।

मौजूदा समय में आईटीआई की 6 विनिर्माण इकाईयां हैं जिनमें से तीन उत्तर प्रदेश (मनकापुर, रायबरेली और नैनी) मं। जबकि श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर), पलक्कड (केरल) और बेंगलुरु में एक-एक इकाइयां हैं। कहा जा रहा है कि इन छह में से 3 यूनिट मुनाफे में चल रही है। आईटीआई में सरकार की करीब 93 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि 7 फीसदी हिस्सेदारी जनता के पास है।

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