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2011 तक पहुंच श्रेष्ठ शिक्षा ऑनलाइन मौजूद
कारोबारी शिक्षा
कल्पना पाठक /  April 05, 2010

राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) पर मार्च 2011 तक काम खत्म होने के बाद देश के हजारों छात्रों की पहुंच विश्व की श्रेष्ठ ऑनलाइन शिक्षा सामग्री, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और संकाय सदस्यों तक सुनिश्चित हो सकेगी।

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग (एनकेसी) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा द्वारा सुझाए गए नेटवर्क ने अब तक देश में 60 शिक्षा संस्थानों को आपस में जोड़ा है और छह से ज्यादा आभासी (वर्चुअल) कक्षाओं को स्थापित किया है। ऐसा अनुमान है कि बाकी बचे 1,440 संस्थान मार्च 2011 तक आपस में जोड़ दिए जाएंगे।

पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुनियादी ढांचे पर मंत्रिमंडलीय समिति की एक बैठक में एनकेएन की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। इसे अगले 10 साल में 5,990 करोड़ रुपये के व्यय के साथ राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा लागू किया जाएगा।

एक प्रोफेसर ने बताया, 'इस वित्तीय मंजूरी से यह पूरी प्रक्रिया बड़ी तेजी से चलने लगेगी। बुनियादी ढांचा जहां 2011 तक तैयार हो जाएगा, जबकि सुधार अगले 10 साल की अवधि में होते रहेंगे। दरअसल उपयोगकर्ताओं को भी नेटवर्क का इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहना होगा, वर्चुअल लैबों से जुड़ना होगा और यह अगले कुछ साल में ही हो पाएगा।' एनकेएन की घोषणा तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने 2008-09 के बजट भाषण में की थी।

शुरुआत में इस नेटवर्क की स्थापना करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और संचार व आईटी मंत्रालय ने 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। एनकेएन का शिल्प बढ़ाए जा सकने लायक होगा और नेटवर्क में 10 जीबीपीएस व उससे ज्यादा के गुणज में एक अल्ट्रा-हाई स्पीड केंद्र भी होगा।

ब्रॉडबैंड नेटवर्क 100 एमबीपीएस या उससे ज्यादा तेज बैंडविड्थ का होगा। ऐसा गति के अनुरूप होने के लिए तकरीबन सभी उपयोग करने वाले संस्थानों को अपने नेटवर्क का उन्नयन करना होगा। जहां कई संस्थानों में पहले से ही संभवत: उन्नत नेटवर्क है, वहीं बड़ी संख्या में संस्थानों को अपने कैंपस के इन्फ्रास्ट्रक्चर को उन्नत करना होगा।

इस प्रक्रिया में शामिल एक नेटवर्क विशेषज्ञ और आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर ने बताया, 'हमने अब तक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) (नए भी), दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, परमाणु ऊर्जा प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक एवं अनुसंधान परिषद समेत 60 संस्थानों को आपस में जोड़ा है। हमें आशा है कि पूरा नेटवर्क मार्च 2011 तक तैयार हो जाएगा।' 

केंद्रीय नेटवर्क के 24 महीने में बन जाने का अनुमान है। इससे देश भर में कक्षाएं एक दूसरे से जुड़ी होंगी। यह उस स्थान पर फायदेमंद होगी जहां प्रशिक्षित संकाय की कमी है। किसी एक आईआईटी संस्थान में एक प्रोफेसर के व्याख्यान से इस नेटवर्क से जुड़े सभी संस्थान जुड़ पाएंगे।

Keyword: national knowledge network, online education, research laboratories, faculty, sam pitroda,
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