बिजनेस स्टैंडर्ड - कर्ज़ का निपटान नहीं आसान
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कर्ज़ का निपटान नहीं आसान
रिज़र्व बैंक ने सख्त कर दिए कंपनियों के लिए कर्ज़ पुनर्गठन के नियम
अभिजित लेले / मुंबई April 02, 2010

आर्थिक हालात तेजी से पटरी पर लौटते देखकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तेवर भी बदल गए हैं।

बैंक ने कंपनियों के लिए ऋण पुनर्गठन यानी नए सिरे से कर्ज तय करने के नियम कड़े कर दिए हैं। अब अगर कर्ज का पुनर्गठन करने की सूरत में बैंकरों को घाटा होता है तो उस घाटे का कम से कम 15 फीसदी प्रवर्तकों को फौरन देना होगा।

आरबीआई ने इस बारे में तमाम भ्रम दूर कर दिए हैं। उसने बैंकों को 30 मार्च को भेजे अपने पत्र में कहा कि पुनर्गठन में प्रवर्तकों की ओर से जो रकम दी जानी है, उसका भुगतान फौरन कर दिया जाना चाहिए और उसे आगे के लिए नहीं टाला जाना चाहिए। यह पत्र ऐसे मौके पर आया है, जब तमाम कंपनियों के प्रवर्तक अपनी इकाइयों का कर्ज पुनर्गठन करा रहे हैं।

केंद्रीय बैंक ने सितंबर 2008 में लीमन के भरभराकर गिरने के बाद कर्ज के पुनर्गठन की शतर्ें बेहद आसान कर दी थीं। इसका मकसद अच्छी परियोजनाओं को वैश्विक वित्तीय संकट से बचाना था। इस राहत पैकेज के तहत कंपनी का दर्जा कम किए बिना या कर्ज का खाता घटाए बिना दो बार ऋण पुनर्गठन की इजाजत दे दी गई थी।

हिंदुजा समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी प्रवाल बनर्जी ने कहा कि बैंक अगर पूरा घाटा झेल रहे हैं तो प्रवर्तकों को 15 फीसदी भरपाई करने के लिए कहना बिल्कुल उचित है। उन्होंने कहा, 'आरबीआई की ओर से यह अच्छा कदम है, जिससे बैंकों को फंसे हुए कर्ज से होने वाला घाटा कम करने में मदद मिलेगी और उनके बहीखाते में भी अच्छा खासा सुधार आ जाएगा।'

पंजाब नैशनल बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि अब अर्थव्यवस्था सुधर रही है। ऐसे में बैंक कर्ज के पुनर्गठन का प्रस्ताव तभी देखना चाहेंगे जब प्रवर्तक परियोजना के प्रति गंभीर दिखेंगे और कुछ रकम अपनी जेब से भी देना चाहेंगे। उनके मुताबिक नए नियमों के बाद कर्ज पुनर्गठन के पहले से कम प्रस्ताव बैंकों के पास पहुंचेंगे।

जो परियोजनाएं फायदेमंद नहीं हैं या जिनके प्रवर्तकों के पास रकम ही नहीं है, उन्हें बिस्तर बांधना पड़ेगा या किसी तीसरे पक्ष के हाथों में उसे सौंपना पड़ेगा। खाते को मानक संपत्ति माने जाने के लिए अब प्रवर्तकों की ओर से फौरन भुगतान को जरूरी शर्त बना दिया गया है। मानक संपत्ति वे खाते होते हैं, जिनमें बकाया का नियमित भुगतान होता रहता है।

बैंकरों ने बताया कि उनके वार्षिक वित्तीय निरीक्षण के दौरान आरबीआई के निरीक्षकों ने यह मसला उठाया था। उनका कहना था कि प्रवर्तकों का योगदान, जो घाटे का कम से कम 15 फीसदी होता है, फौरन मिल जाना चाहिए।

आरबीआई-बैंकर बैठक 5 को

सोमवार को आरबीआई और बैंकरों की बैठक होगी, जिसमें नकदी और गैर निष्पादित संपत्तियां ही चर्चा का केंद्र रहेंगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि बैंकर आरबीआई से मौद्रिक नीति की समीक्षा में अहम दरों में बदलाव न करने का आग्रह करेंगे।

अब कर्ज़ मिलेगा तब, माल निकालोगे जब

ऋण पुनर्गठन के नए नियम महंगे पड़ सकते हैं कंपनी प्रवर्तकों को
बैंकों को होने वाले घाटे का 15 फीसदी फौरन भरेंगे प्रवर्तक
इससे बैंकों का फंसा कर्ज़ घटेगा और बहीखाता भी जाएगा सुधर
ऋण पुनर्गठन के प्रस्तावों में भी अब कमी आने के आसार

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