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वॉकहार्ट : कर्ज ने ली सौदे की कुर्बानी
दिशासूचक
पुनीत वाधवा और रामप्रसाद साहू /  April 02, 2010

वॉकहार्ट और एबॉट लैबोरेटरीज ने जुलाई 2009 में घोषित 627 करोड़ रुपये के सौदे को खत्म कर दिया है। यह सौदा कॉर्पोरेट ऋण पुनर्गठन कार्यक्रम का एक हिस्सा था जिसके तहत वॉकहार्ट को 750 करोड़ रुपये जुटाने के लिए अपने वैकल्पिक कारोबार का विनिवेश करना था।

वॉकहार्ट के कुछ विदेशी कर्जदाता बम्बई उच्च न्यायालय में अपना बकाया निकालने के लिए कंपनी के साथ लड़ रहे हैं। जून 2009 में घोषित कंपनी के पशु स्वास्थ्य व्यवसाय और जर्मन परिसंपत्ति की बिक्री से कंपनी को 290 करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद है।

वहीं, एबॉट के साथ सौदे से वॉकहार्ट को अपने 3,500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज के बोझ को कम करने में कुछ मदद मिलती। आश्चर्यजनक रूप से बाजार ने कंपनियों के इस फैसले का स्वागत किया है और वॉकहार्ट के शेयर ने 3.7 फीसदी की उछाल दर्ज की है।

कंपनी पर कर्ज का भारी बोझ होते हुए भी बाजार को उम्मीद है कि वॉकहार्ट को अपने न्यूट्रीशन व्यवसाय के लिए इससे अच्छा सौदा मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि फॉरेक्स और प्रोटीनेक्स जैसे ब्रांड जो करीब 18 फीसदी की दर से बढ़ रहे हैं, के लिए और बेहतर खरीद पेशकश मिल सकती है।

कंपनी को हाल-फिलहाल नकदी की भी समस्या नहीं होने वाली है क्योकिं इसने अपने सुरक्षित कर्जदाताओं से 500 करोड़ रुपये का कर्ज हासिल किया है। कंपनी के पास हाल फिलहाल का आराम तो है, लेकिन कंपनी के लिए भविष्य की राह अब भी आसान नहीं है। कंपनी का ऋण शेयर अनुपात 4 है जो साथी कंपनियों की तुलना में काफी ज्यादा है। ब्याज प्राप्ति अनुपात भी 2 से थोड़ा ही ऊपर है।
 
दिसंबर 2009 को खत्म साल में कंपनी ने 435 करोड़ रुपये का नुकासान दिखाया था। कंपनी को 661 करोड़ रुपये का विदेशी विनिमय घाटा हुआ था। कंपनी के यूरोपीय और भारतीय व्यवसाय 21-23 फीसदी की विकास दर्ज कर रहे हैं, लेकिन इसे अपने अमेरिकी व्यवसाय से ज्यादा कमाई हासिल करने की जरूरत है जहां यहह 74 उत्पाद बेचती है।

कंपनी को न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाने की जरूरत है बल्कि इसे उत्पादन लागत भी कम करने पर जोर देना होगा ताकि परिचालन मुनाफा बेहतर किया जा सके।

क्रॉम्पटन ग्रीव्स : अधिग्रहण के दौर में

क्रॉम्पटन ग्रीव्स ने ब्रिटेन की इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कंपनी पावर टेक्ोलॉजी सॉल्युशंस (पीटीएस) के अधिग्रहण का समझौता पूरा किया है। क्रॉम्पटन ग्रीव्स ने ब्रिटेन की कंपनी को करीब 203 करोड़ रुपये में खरीदा है।

पिछले पांच सालों में क्रॉम्पटन का यह छठा बड़ा विदेशी अधिग्रहण होगा। पिछले कुछ सालों में कंपनी ने पॉवेल्स, गैंज, माइक्रोसोल, एमएसई पावर और सोनोमात्रा जैसे कई महत्त्वपूर्ण अधिग्रहण सौदे निपटाए हैं। इन कंपनियों के पुनर्गठन और परिचालन के स्तर को सुधारने में भी कंपनी कामयाब रही है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है, 'ये कंपनियां वित्त वर्ष 2010 में यूरोप और उत्तरी अमेरिका में प्रतिकूल आर्थिक परिस्थितियों की वजह से विकास नहीं कर सकीं, पर हम वित्त वर्ष 2011 में इनकी वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।'

क्रॉम्पटन प्रबंधन के मुताबिक पीटीएस का अधिग्रहण 2015 मे 8 अरब डॉलर की कमाई के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। इन अधिग्रहणों ने कंपनी को दुनिया के प्रमुख प्रसारण और वितरण कंपनियों में शामिल कर दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि बृहत्त इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पीटीएस की पहुंच और ब्रिटेन में इसकी पैठ से क्रॉम्पटन को क्षेत्र विस्तार में मदद मिलेगी। ब्रिटेन में विकसित होते अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी पीटीएस संभावनाएं तलाश रही है। मौजूदा समय में क्रॉम्पटन की बिक्री का 50 फीसदी विदेशी बाजार से हासिल होता है।

वित्त वर्ष 2010 में कंपनी के एबिटा मार्जिन में खासी बढ़त देखने को मिली। वित्त वर्ष 2009 के 9 महीनों में एबिटा मार्जिन 10.7 फीसदी था जो 2010 के 9 महीनों में 13.2 फीसदी हो गया। 2011 के लिए कोटक सिक्योरिटीज आमदनी में 14.4 फीसदी और शुद्ध मुनाफे में 16 फीसदी बढ़त की उम्मीद करता है।

कंपनी का शेयर 1 अप्रैल को  274 रुपये पर बंद हुआ। विश्लेषकों के मुताबिक कंपनी का शेयर वित्त वर्ष 2011 की अनुमानित आमदनी के 17.7 गुना और वित्त वर्ष 1012 की अनुमानित आमदनी के 15.6 गुना पर कारोबार कर रहा है।

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