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भोपाल में जहरीले पानी से जान हलकान
शशिकांत त्रिवेदी / भोपाल April 01, 2010

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के 14 गैस प्रभावित इलाकों में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद इन इलाकों के तकरीबन 25,000 लोग जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं।

गैस प्रभावितों के हितों को लेकर काम कर रही कई गैर सरकारी संगठनों ने इस सरकारी लापरवाही पर असंतोष जताया है और कहा है कि वे इसके खिलाफ नए सिरे से अभियान चलाएंगे।

प्रभावित इलाकों में राम नगर, प्रेम नगर, ब्लूमून कॉलोनी, टिंबर मार्केट, चांदवाड़ी, गरीब नगर, शिव नगर, सुंदर नगर, नव जीवन कॉलोनी और उरीया बस्ती शामिल हैं। यूनियन कार्बाइड के आसपास होने की वजह से इन इलाकों पर ज्यादा बुरा असर पड़ा है।

प्रदेश के गैस राहत एवं पुनर्वास मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा है, 'हमारे विभाग ने 14 गैस प्रभावित इलाकों में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भोपाल नगर निगम को 1.8 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। हम जल्द ही इन इलाकों में नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।'

गैस प्रभावितों के लिए काम करने वाली चिंगारी ट्रस्ट के प्रबंध ट्रस्टी और सामाजिक कार्यकर्ता रशीदा बाई कहती हैं, 'कोलार पाइपलाइन से सिर्फ 30 फीसदी लोगों को पानी मिल पा रहा है और वह भी एक दिन बीच करके। पाइपलाइन बिछाने का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन इलाकों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के आदेश के बावजूद सरकार ऐसा करने में असक्षम साबित हो रही है।

केंद्र सरकार ने जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन के तहत 2008 में 14.18 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे लेकिन अभी तक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। अभी भी यहां लोग जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। हम जल्द ही इसके खिलाफ एक अभियान शुरू करने वाले हैं।'

जहरीली पानी की वजह से यहां के लोगों कों पाचन संबंधी बिमारियां हो रही हैं। इस बात की पुष्टि शिव नगर में रहने वाली लाइका मुन्नी भी करती हैं। वह कहती हैं कि मुझे भी पाचन संबंधी दिक्कतें हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन इलाकों में 96 जल भंडारण टैंक लगाए गए थे। पर इसमें से ज्यादातर या तो नगर निगम कर्मचारियों द्वारा तोड़ दिए गए हैं या फिर इनमें स्वच्छ जल भरा नहीं जा रहा है।

इन इलाकों के कई परिवारों ने गर्मियों में होने वाली पानी की समस्या से निजात पाने के लिए अपने घरों में बोरवेल खुदवा लिए हैं। गैर सरकारी संगठन भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन ऐंड एक्शन की कार्यकर्ता रचना ढींगरा कहती हैं, 'अभी भी यूनियन कार्बाइड के बंद परिसर में जहरीला कचरा रखा हुआ है और इस वजह से आसपास के इलाकों का भूजल बुरी तरह से खतरनाक हो गया है।'

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