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क्या पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट उचित कदम है?
जिरह
बीएस संवाददाता /  March 31, 2010

खर्च का रखना होगा खयाल
राकेश भरतिया
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इंडिया ग्लाईकॉल्स

सरकार ने एक बार फिर गैसोलीन के साथ 5 फीसदी एथेनॉल मिलाए जाने के अपने इरादे को दोहराया है। पिछले दशक में सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की योजना को देश भर में लागू करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सकी।

वास्तव में ताजा घोषणा के साथ एक तरह से सरकार ने अपने कदम पीछे खींचे हैं। सरकार की योजना अक्टूबर 2008 तक पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 10 फीसदी तक बढ़ाने की थी। भारत के नीति निर्माता अब समझ चुके हैं कि भारत में बायो-एथेनॉल योजना कभी सफल नहीं हो सकती है।

एथेनॉल उत्पादन और मिश्रण की रुकावटों को समझते हुए शुद्ध ऊर्जा के लिए दूसरे रास्ते तलाशे जाने चाहिए जहां सफलता हासिल की जा सके। भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था है। ऐसे में विकास के साथ-साथ ऊर्जा और भोजन दो वस्तुओं की मांग भी लगातार बढ़ रही है। देश में ऊर्जा नीति का प्राथमिक उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा होना चाहिए। आर्थिक और पर्यावरण के मसले उसके बाद आते हैं।

दुर्भाग्य से फिलहाल देश में एथेनॉल उत्पादन का एकमात्र स्त्रोत मोलासेस यानी शीरा है। चीनी बनाते समय सहायक उत्पाद के रूप में शीरा हासिल होता है। देश में चीनी का उत्पादन क्षेत्र काफी उतार-चढ़ाव भरा है। लिहाजा शीरे से एथेनॉल हासिल करना भी काफी अस्थिर होगा। ऐसे हालात में भारत में एक स्थिर एथेनॉल कार्यक्रम चलाना संभव नहीं है।

चीनी और शीरे के उत्पादन में स्थिरता लाने के लिए चीनी उद्योग और गन्ने की कीमतों को लेकर मौजूदा सरकारी नीतियों में बदलाव की जरूरत है। भारत विश्व में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। देश में आवश्यक चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को सतर्कतापूर्वक कदम बढ़ाने होंगे।

हाल ही में सरकार की तरफ से घोषित 'बायो-ईंधन पर राष्ट्रीय नीति' के तहत देश में बायो-ईंधन निर्माण की शर्तें तय की गई हैं। एथेनॉल उत्पादन के संबंध में नीति में कहा गया है, 'पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा समय समय पर बदले जाने पर चीनी और डिस्टलरी उद्योग को एथेनॉल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जएगा। पर, इस सिलसिले में इस बात का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए कि देश में चीनी उत्पादन और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए एथेनॉल की कमी न हो।'

सरकारी नीति में भी एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं करती है। इसरकार बाकी उद्योगों के ऊपर ईंधन निर्माण के लिए एथेनॉल के उत्पादन को प्राथमिकता नहीं देती है। पर्यावरण की नजर से सुरक्षित रसायन बनाने वाली कंपनियों को एथेनॉल की आपूर्ति कम नहीं होने दी जाएगी।

पेट्रोलियम पर निर्भरता होगी कम
जी के सूद
एथेनॉल प्रमोशन सब-कमिटी
आईएसएमए के चेयरमैन

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वाहनों का ईंधन पर्यावरण प्रदूषण के लिए जिम्मेदार सबसे बड़े कारणों में से एक है। ज्वलनशीलता बढ़ाने के लिए गैसोलीन में एमटीबीई ऑक्सिजेनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है। यह कैंसरजनक और नॉन-बायोडिग्रेडेबल माना जाता है।

पूरे विश्व में एमटीबीई के बदले एथेनॉल के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जा रही है। एथेनॉल दोनों मामलों में एमटीबीई की तुलना में सुरक्षित है। एथेनॉल का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने में भी मददगार होगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। इसलिए सरकार ने गैसोलीन में 5 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाना अनिवार्य कर दिया है।

साथ ही इसे बढ़ाकर 10 फीसदी करने का लक्ष्य भी रखा गया है। कार्बन मोनोऑक्साइड के उत्सर्जन को बेअसर करने के लिए गैसोलीन मिश्रण में आवश्यक ऑक्सिजेनरेशन को पूरा करने के लिए एथेनॉल की 5 फीसदी मात्रा आवश्यक है। इसके साथ ही एथेनॉल का इस्तेमाल सरकार और तेल विपणन कंपनियों के लिए अच्छा है।

एथेनॉल और गैसोलीन की की मौजूदा कीमतों एथेनॉल के प्रति लीटर इस्तेमाल से तेल विपणन कंपनियों को 11 रुपये की बचत होती है। इस तरह पेट्रोलियम उद्योग में अंडर-रिकवरी के भार को कम करने में भी एथेनॉल मिश्रण योजना फायदेमंद होगी। भारत में एथेनॉल का उत्पादन शीरे से किया जाता है।

एथेनॉल उद्योग को बढ़ावा दिए जाने से शीरा, कृषि उत्पादों और कृषि अपशिष्ट की मांग भी बढ़ेगी। इससे किसानों की आमदनी को अतिरिक्त सहारा मिलेगा। सामान्य चीनी उत्पादन के मौसम में देश में 2.4 अरब लीटर एल्कोहल उत्पादन के लिए मोलासेस की आपूर्ति पर्याप्त होती है।

मौजूदा सत्र की तरह अगर गन्ने की किल्लत रहती है, तो उपलब्ध शीरे से 1.70 अरब लीटर एल्कोहल का उत्पादन हो सकता है। देश में दूसरे साधनों से करीब 30 करोड़ लीटर एल्कोहल उत्पादन होता है, पर इसमें इजाफा हो रहा है। चालू साल में देश में कुल 2 अरब लीटर एल्कोहल उत्पादन का अनुमान है।

गैसोलीन में एथेनॉल मिलाए जाने की जरूरत को समझते हुए इस बात से कोई भी असहमत नहीं होगा कि घरेलू एथेनॉल उत्पादन का पहला इस्तेमाल ईंधन बनाने में किया जाएगा। जिन राज्यों में एथेनॉल मिश्रण को आवश्यक किया गया है वहां 69 करोड़ लीटर एथेनॉल की मांग है।

दूसरी प्राथमिकता पेय उत्पाद उद्योग को मिलेगी जहां करीब 90 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत है। बाकी एथेनॉल रसायन उद्योग जैसे दूसरे उपयोगकर्ताओं के लिए होगा। इनके लिए एल्कोहल का दूसरा कोई विकल्प नहीं है।

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