बिजनेस स्टैंडर्ड - 'मधुमेह और कैंसर सेगमेंट पर ध्यान'
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'मधुमेह और कैंसर सेगमेंट पर ध्यान'
सवाल-जवाब : संदीप गुप्ता, प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष, एलाई लिली
जो मैथ्यू और वंदना गोम्बर /  March 30, 2010

अमेरिका की एलाई लिली की सालाना कमाई 2009 में 21.8 अरब डॉलर रही। दुनिया की शीर्ष 10 दवा कंपनियों में शुमार एलाई लिली गैर-पेटेंट जेनेरिक दवाओं में मौजूद अवसरों के बजाय अभिनव प्रयोग आधारित उत्पादों पर अपना ध्यान बरकरार रखने की योजना बना रही है।

लिली इंडिया के अध्यक्ष संदीप गुप्ता बौध्दिक संपदा सुरक्षा के अभाव को एक चिंता बताते हैं। उन्होंने बात की जो मैथ्यू और वंदना गोम्बर से। प्रस्तुत हैं कुछ अंश: 

कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बौध्दिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से आपत्तियां हैं। भारत की उत्पाद पेटेंट व्यवस्था पर आपकी क्या राय है?

2005 में उत्पाद पेटेंट व्यवस्था शुरू करके भारत ने दुनिया को जाहिर कर दिया कि वह अभिनव प्रयोगों का सही मूल्यांकन और उसकी सुरक्षा करने को तैयार है। हालांकि इसे इसके पूरे स्वरूप में नहीं लागू किया गया है।

मसलन, जब तक प्रगतिशील अभिनव प्रयोगों की कुशलता में कोई बेहद महत्वपूर्ण सुधार नहीं, तब तक भारत का इसे पेटेंट के रुप में स्वीकार नहीं करना, हतोत्साहित करता है।

जैसे, डायबिटीज के पेटेंट के तौर पर इनसुलिन को ही लें। यह गर्मी के प्रति संवेदनशील उत्पाद है और उच्च तापमान में खराब हो जाता है। इसे 2-8 डिग्री सेल्सियस में रखना पड़ता है। कल को अगर कोई इसे तापमान सहन करने लायक बना दे तो क्या इस बेहद लाभकारी अभिनव प्रयोग को सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए?

ऐसा ही एक मुद्दा आंकड़ों की सुरक्षा है। यह आप जैसी कंपनियों के लिए कितना जरूरी है?

दुनिया भर में इनोवेटर कंपनियां दवा की कुशलता व सुरक्षा साबित करने और नियामकों से मार्केटिंग मंजूरी पाने के लिए विस्तृत क्लिनिकल ट्रायल आंकड़े पैदा करने के लिए लाखों डॉलर खर्च करती है। भारत ऐसे आंकड़ों की सुरक्षा को अनुमति नहीं देता है। अगर यह अन्यायपूर्ण व्यावसायिक उपयोग नहीं तो क्या है?

क्या पेटेंट से जुड़े मामलों की वजह से भारत में आपके उत्पादों की उपलब्धता सीमित है?

इस वक्त हमारे पास नौ उत्पादों की रेंज है। सभी में कई अलग-अलग सूत्रण हैं। हालांकि हमने बोन हैल्थ ऐंड क्रिटिकल केयर सेगमेंटों में भी अपनी पहचान बनाई है, मगर मूलत: हम एक मधुमेह और कैंसर कंपनी हैं।

भारत में आज इनमें बिकने वाले कोई भी उत्पाद पेटेंट सुरक्षा प्राप्त नही है। अब किस उत्पाद को भारत में लाना है, यह एक कारोबारी निर्णय है। आईपीआर इस निर्णय में एक भूमिका अदा करती है, मगर सिर्फ यही एक कारण नहीं है।

नए उत्पादों के लिए क्या कारोबार बेहतर नजर आ रहा है?

भारत में हमारा ध्यान मधुमेह और कैंसर सेगमेंट पर बरकरार है। इसके अलावा हम अन्य अवसरों का मूल्यांकन करेंगे। हम जल्द से जल्द लिली के अनुसंधान उत्पाद भारत में लाने को प्रतिबध्द हैं। इस साल हम मधुमेह और ओस्टियोपोरोसिस सेगमेंट में तीन नए उपकरण बाजार में उतारने की प्रक्रिया में हैं।

लिली की वैश्विक योजनाओं में भारत समेत अन्य उभरते बाजारों से अपनी आय को दोगुना करना शामिल हैं। इसे हासिल करने के लिए क्या आपकी कोई देश विशेष रणनीति है?

लिली के लिए उभरते बाजार वाले सात शीर्ष देशों में भारत शामिल है। भारत में हमारे पहले से ही 6-7 शोध करार हैं। जायडस कैडिला के साथ करार की घोषणा कुछ महीने पहले ही हुई। सुवेन, पीरामल, जुबिलिएंट कुछ अन्य शोध सहयोगी हैं।

इन अनुसंधान करारों के अलावा क्या भारत में कुछ और गठजोड़ भी हैं?

विभिन्न क्षेत्रों में टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और सन फार्मास्यूटिकल्स के साथ भी हमारे करार है।

लिली इंडिया की विकास दर क्या है?

पिछले 3-4 साल में लिली ने 15-17 फीसदी की स्वस्थ बढ़ोतरी की, जबकि इस वक्त में उद्योग की रफ्तार 12-13 फीसदी रही।

भारत में दवा की कीमतों को लेकर आपका क्या नजरिया है?

भारत में दवाओं की कीमतें कमोबेश दुनिया में सबसे कम हैं। अगर लिली की बात करें तो हमारे इंसुलिन रेंज की कीमतें यहां पर विश्व के अन्य इलाकों की तुलना में करीब सबसे कम है। अन्य उत्पादों के मामलों में भी लगभग यही स्थिति है।

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