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वैश्विक साझेदारी की कोशिश में अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय
विभु रंजन मिश्रा / बेंगलुरु March 30, 2010

कर्नाटक में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा स्थापित स्व वित्त पोषित निजी विश्वविद्यालय, अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी दुनिया के बेहतरीन विश्वविद्यालय से साथ साझेदारी के मौके तलाश हो रही है।

इस राज्य में यह अपनी तरह का अनोखा विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय, उत्तर अमेरिका के कम से कम 4 विश्वविद्यालयों से बातचीत कर रहा है ताकि इसे पाठयक्रम, कक्षाओं के संचालन और फैकल्टी के विकास में मदद मिल सके।

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सीईओ दिलीप रांजेकर का कहना है, 'हम कुछ विदेशी विश्वविद्यालयों से बातचीत कर रहे हैं ताकि पाठयक्रम विकास, फैकल्टी और शिक्षकों के विकास के क्षेत्र में सहयोग कर सकें। उनके जरिये शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में विश्वस्तरीय ज्ञान की गुंजाइश बनेगी। हम उन्हें शोध के लिए भी साझेदार बनाने के लिए सोच सकते हैं।'

यह विश्वविद्यालय एक गैर लाभ वाला संगठन है जिसका प्रबंधन विप्रो के अध्यक्ष अजीम प्रेमजी करते हैं। रांजेकर का कहना है कि दूसरे क्षेत्रों में संयुक्त फैकल्टी का विकास शामिल है क्योंकि देश में शिक्षण प्रबंध का विचार नया है और ऐसे में बेहतर प्रतिभा पाना थोड़ा मुश्किल है। फाउंडेशन ने टोरेंटो के ओंटारियो इंस्टीटयूट फॉर स्टडीज इन एजुकेशन के साथ शोध समझौता किया है।

रांजेकर का कहना है, ' हमारी साझेदारी शिक्षा शोध के क्षेत्र में होगी।' अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने पिछले साल राज्य सरकार से विश्वविद्यालय बनाने के लिए संपर्क किया था ताकि कई क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षण, शोध एवं विकास की प्रक्रिया शुरू की जा सके। इसमें प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और शिक्षा प्रबंधन शामिल है।

हाल ही में कनार्टक की विधान सभा और विधान परिषद ने विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद अजीम प्रेमजी फाउंडेशन विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी। अब इस विधेयक को राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। उम्मीद की जा रही है कि यह वैधानिक विरोधाभास जल्द ही खत्म होगा।

रांजेकर का कहना है, 'विश्वविद्यालय की सफलता पूरी तरह से फैकल्टी की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी जिसे हम नियुक्त करने और उसका विकास करने की क्षमता रखते हैं। हम विश्वविद्यालय में एक बेहतर कल्चर तैयार करने की कोशिश करेंगे। कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने की विशेष तौर पर कोशिश की जाएगी। यहां बहुत प्रतिभाएं हैं।

उन्हें बस एक मौके की तलाश है और भाषा और संवाद में थोड़ी मदद की जरूरत है। ऐसा समझा जाना चाहिए की विश्वविद्यालय देश की एक बड़ी शिक्षा व्यवस्था में अपना योगदान देगा। विभाग प्रमुख और फैकल्टी के सदस्यों को पहचानने की प्रक्रि या भी शुरू हो चुकी है।' ऐसा माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय ने कुलपति के पद के लिए एक व्यक्ति का चयन कर लिया है।

फाउंडेशन ने विश्वविद्यालय की स्थापना करने के लिए बेंगलुरु में 3 जगहों का चयन भी कर लिया है। इस जगह के लिए अंतिम फैसला छात्रों और फैकल्टी के सदस्यों की सुविधा के मुताबिक कर लिया जाएगा।

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