बिजनेस स्टैंडर्ड - विकल्प कारोबार बढ़ा पर कमाई नहीं
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 12, 2019 07:57 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम बाजार खबर

विकल्प कारोबार बढ़ा पर कमाई नहीं
आशीष रुखईयार / मुंबई March 29, 2010

पिछले कुछ महीने से इक्विटी बाजार में विकल्प कारोबार धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है।

विकल्प की श्रेणी में कुल कारोबार वायदा श्रेणी की तुलना में कहीं अधिक रहा है। लेकिन, कारोबार बढ़ने से शेयर ब्रोकरों की कारोबारी आय में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसकी वजह है कि ब्रोकिंग कंपनियां विकल्प श्रेणी में काफी कम मार्जिन पर काम करती है। कई ब्रोकर तो लॉट के आधार पर शुल्क लेते हैं।

इंडिया इन्फोलाइन के प्रेसिडेंट (रिटेल ब्रोकिंग) नंदीप वैद्य ने कहा, 'विकल्प में ब्रोकरेज एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और यही वजह है कि ग्राहक इसके प्रति संवेदनशील होते हैं। विकल्प की तरफ निवेशकों का अकर्षण बढ़ने के साथ ही ब्रोकरेज कंपनियों के मार्जिन भी प्रतिस्पर्ध्दी हो गए है।'

उन्होंने कहा कि बाजार के कई बिचौलिए बड़ पैमाने पर कारोबार करने वाले ग्राहकों के साथ ब्रोकरेज के मामले में मोल-तोल करते हैं। बाजार के अस्थिरता के चरण में जाने के बाद विकल्प के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। विकल्प अनुबंध में एक खरीदार अनुबंध होते समय केवल प्रीमियम का भुगतान करता है।

परिपक्वता के समय खरीदार विकल्प को क्रियान्वित करता है और उसे केवल अपना प्रीमियम गंवाना होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो गिरावट प्रीमियम की राशि तक सीमित होती है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की नवीनतम मासिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 6 महीने में इंडेक्स विकल्प श्रेणी के कारोबार में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

एंजल ब्रोकिंग के कार्यकारी निदेशक विनय अग्रवाल ने कहा, 'ब्रोकरेज के नजरिये से विकल्प से होने वाली कमाई महत्वपूर्ण नहीं है। प्रतिस्पध्र्दा बढ़ने की वजह से कई ब्रोकरेज कंपनियां प्रीमियम राशि का 0.5 से 1 प्रतिशत लेती है।' दिलचस्प बात यह है कि अपने डिजाइन की वजह से जहां विकल्प श्रेणी का कारोबार बढ़ रहा है वहीं ब्रोकरेज कंपनियों को विकल्प श्रेणी से होने वाली कमाई उस हिसाब से नहीं बढ़ी है।

नेटवर्थ स्टॉक ब्रोकिंग के गिरीश देव ने कहा, 'एक्सचेंज के नियमों के अनुसार, कोई ब्रोकर केवल प्रीमियम की राशि पर ही ब्रोकरेज वसूल सकता है और कभी कभार यह काफी कम होता है। इसलिए अधिकांश ब्रोकरों ने सपाट शुल्क की नीति अपनाई है जिसके तहत प्रति लॉट 15 से 75 रुपये लिए जाते हैं।'

विकल्प श्रेणी में कोई ब्रोकरेज कंपनी अधिकतम ब्रोकरेज के तौर पर प्रीमियम राशि का 2.5 प्रतिशत ले सकती हैं। खुदरा निवेशक धीरे-धीरे डेरिवेटिव क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। एनएसई की मासिक रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में कुल डेरिवेटिव कारोबार में खुदरा हिस्सेदारी 57 प्रतिशत थी। सितंबर 2009 में यह हिस्सेदारी 54.7 प्रतिशत थी।

खुदरा हिस्सेदारी में बढ़त से ब्रोकरेज शुल्क भी प्रतिस्पध्दी हुए हैं क्योंकि छोटे निवेशक लेन-देन की लागत के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। आरंभिक लागत कम होने की वजह से विकल्प श्रेणी निश्चित ही आकर्षक हुआ है। बीएस रिसर्च ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर के बाद से विकल्प श्रेणी में वायदा की अपेक्षा अधिक कारोबार हुआ है।

वर्तमान महीने में (23 तारीख तक) कुल विकल्प कारोबार 6,83,679.21 करोड रुपये का रहा जबकि वायदा श्रेणी में 5,05,620.43 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। साल 2008-09 के आम बजट में विकल्प कारोबार को और आकर्षक बनाया गया।

सरकार ने निर्णय किया था कि अगर विकल्प को क्रियान्वित नहीं किया जाता है तो प्रतिभूति लेन-देन कर (एसटीटी) केवल प्रीमियम की राशि पर लगाया जाएगा। अगर विकल्प को क्रियान्वित किया जाता है तो एसटीटी निपटान मूल्य पर लगाया जाएगा।

विकल्प कारोबार में तेजी

एनएसई की नवीनतम मासिक रिपोर्ट के अनुसार इंडेक्स विकल्प कारोबार में पिछले छह महीने के दौरान 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है
विकल्प कारोबार में ब्रोकरेज कंपनियां प्रीमियम पर शुल्क लेती हैं जो 0.5 से 1 फीसदी होता है
कई कंपनियां लॉट के हिसाब से सपाट शुल्क लेती हैं

Keyword: equity market, option trading, future segment, share brokaers, india infoline, angel broking, networth stock broking,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:

स्मार्ट इंवेस्टर

बैंकिंग प्रणाली में विफल रहा भारत

Investmentsएशमोर इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के लंदन स्थित प्रमुख जैन डेन ने पुनीत वाधवा

इस्पात कंपनियों के शेयरों पर सतर्क हैं विश्लेषक

शीर्ष आईटी कंपनियों की सामान्य रहेगी वृद्धि दर

दूसरी छमाही में आरआईएल की रफ्तार में आएगी तेजी

आईआरसीटीसी आईपीओ: दांव लगा सकते हैं निवेशक

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.