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गोल्ड फंड ऑफ फंड्स - नया है पर ईटीएफ का ही दूसरा जरिया है
निवेश : निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ के बाद फंड ला रहे हैं एक और नई योजना जिसके जरिए सोने में निवेश करने वाले फंडों में निवेश किया जा सकता है
अर्णव पंडया /  March 28, 2010

म्युचुअल फंड की दुनिया में नई-नई चीजों के आने का सिलसिला अब रफ्तार पकड़ लगा है। परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (एएमसी) नई तरह की फंड योजनाएं पेश कर रही हैं।

निवेशकों को अपनी विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनको इन नई योजनाओं का पूरा-पूरा  फायदा मिले। हाल में कई फंड घरानों ने एक नई योजना गोल्ड फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) के लिए पेशकश दस्तावेज दाखिल किए हैं। यहां हम बता रहे हैं कि निवेशक कैसे यह परखें कि इन योजनाओं से उनको वांछित फायदा किस प्रकार से हो सकता है।

क्या है गोल्ड एफओएफ

गोल्ड फंड ऑफ फंड्स आम म्युचुअल फंड योजनाओं से थोड़ा अलग है। फंडों के फंड का शेयरो, ऋण साधनों और  सोने में सीधा कोई निवेश नहीं होता है। इनके पोर्टफोलियो में ऐसे फंड होते हैं जिनके पास इस तरह के निवेश साधन होते हैं।

गोल्ड फंड ऑफ फंड्स को भी ऐसे ही फंडों में निवेश करना है जो सोने में निवेश करते हैं। यह आपको आम निवेश विकल्पों से अलग साधन सोने में निवेश का विकल्प देता है।

निवेश के पुराने विकल्प

अभी तक सोने में निवेश की चाहत रखने वाले लोगों के पास सिर्फ गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) का ही विकल्प है। मौजूदा फंडों के फंड का विकल्प फिलहाल ऋण साधनों और शेयरों तक ही सीमित है। गोल्ड फंड ऑफ फंड्स (एफ ओ एफ) एक नई तरह की परिसंपत्ति होगा जिसमें अन्य फंड भी शामिल होंगे।

गोल्ड फंड ऑफ फंड्स में निवेश करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहला, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए आपके पास पहले से ही ईटीएफ का विकल्प मौजूद है। ऐसे में अगर नए गोल्ड एफ ओ एफ में ही ये सब बातें शामिल हैं तो फिर इसमें निवेश क्यों करें?

बाजार नियामक के पास गोल्ड एफ ओ एफ के लिए जो पेशकश दस्तावेज दाखिल किए गए हैं, उनसे साफ होता है कि ये फंड ऋण या मुद्रा बाजार के साधनों  में बहुत थोड़ा सा निवेश करने जा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि ईटीएफ की तुलना में इनमें प्रतिफल की दर थोड़ा ज्यादा होगी। हालांकि इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती।

कुल मिलाकर प्रतिफल फंड प्रबंधक की कुशलता पर ही काफी हद तक निर्भर करेगा। एफ ओ एफ के मामले में इस बात का भी खयाल किया जाना चाहिए कि इसमें पैसा लगाने के लिए निवेशकों को जो अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा, वह निवेश के हिसाब से होना चाहिए। अगर ऐसा न हो, तो फिर ईटीएफ में निवेश करना ही बेहतर विकल्प है।

कहां होगा निवेश

अभी तक चार फंडों ने गोल्ड एफ ओ एफ के लिए पेशकश दस्तावेज दाखिल किए हैं और इन सब का प्रस्ताव गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने का है। लिहाजा, रिटर्न पर बहुत ज्यादा असर नहीं होने वाला है।

अगर ईटीएफ के अलावा सोने के खनन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश करने वाले फंडों को भी पोर्टफोलियो में शामिल किया जाता है, तो यह एक अच्छा गोल्ड पोर्टफोलियो माना जा सकता है। इससे न सिर्फ सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का फायदा मिलेगा बल्कि खनन से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे और प्रदर्शन का असर भी फंड की रिटर्न पर पड़ेगा।

साथ ही इस बात पर गौर करना चाहिए कि  गोल्ड एफ ओ एफ शुरू करने वाली फंड कंपनी अपने ही घराने के ईटीएफ में निवेश करने जा रही है या वह अपने फंड घराने से बाहर के विकल्प भी तलाश रही है।

फिलहाल पेशकश दस्तावेज से तो यही लगता है कि इस मामले में फंड कंपनिया दोनों ही विकल्पों पर ध्यान दे रही हैं। कई परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों ने अपने ही घराने के ईटीएफ में निवेश की बात कही है, तो कई बाहर के ईटीएफ में निवेश करने की इच्छुक हैं।

क्या करें निवेशक

फिलहाल कई निवेशक सोने में निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में जब तक नई फंड योजना उपलब्ध नहीं हो जाती और इनके निवेश का तौर-तरीका बिल्कुल साफ नहीं हो जाता, तब तक निवेशकों को गोल्ड ईटीएफ में अपना निवेश जारी रखना चाहिए।

नए गोल्ड एफ ओ एफ की पोर्टफोलियो में 10-15 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी नहीं होना चाहिए। संभावना है कि इन फंडों को ऋण-उन्मुख फंडों की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसा हुआ तो फिर लाभांश वितरण कर (डीडीटी) का भुगतान करना होगा।

निवेशकों के हाथ में आने वाला लाभांश तो कर मुक्त होगा पर डीडीटी के रूप में अप्रत्यक्ष कर का बोझ उठाना पडेग़ा। इसी तरह फंड में निवेश की अवधि के हिसाब से पूंजीगत लाभ पर कर की मात्रा तय होगी। एक साल से कम समय तक निवेश रखने पर प्राप्त आमदनी अल्पावधि पूंजीगत लाभ की श्रेणी में आएगा और इस पर सामान्य आमदनी की तरह कर लगेगा।

एक साल से ज्यादा वक्त में हासिल होने वाले पूंजीगत लाभ को दीर्घावधि पूंजीगत लाभ माना जाएगा और इस पर इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी छूट दर पर या बिना इंडेक्सेशन के 10 फीसदी के हिसाब से कर लगेगा।

लेखक प्रमाणिक वित्तीय योजनाकार हैं

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